चुदाई के करंट में उलझ गए माँ बेटे

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चुदाई के करंट में उलझ गए माँ बेटे : स्टेशन के वेटिंग रूम में माँ-बेटे की चुदाई की दास्तान

इधर मेरा लन्ड पूरे आवेग में ऊपर नीचे हो रहा था। तो मैं माँ के चूतड़ों को हल्का फैलाया और अपना लन्ड माँ के चुत में डालने कोशिस करने लगा। लेकिन मेरा लन्ड थोड़ा भी अंदर नही जा रहा था। वही माँ के चुत बिल्कुल गर्म थी और बिल्कुल गीली थी। मैं वैसे ही अपने लन्ड के सुपाड़े को माँ के गीली चुत के छेद पर रगड़ने लगा। मैं थोड़ी तेज तेज ऐसा कर रहा था। मुझे झुंझलाहट भी होने लगी थी। क्योंकि ऐसा करने में मुझे बिल्कुल मजा नही आ रहा था। और ऐसा करते 5,6 मिनट हो चुका था। तभी माँ हिली और उनका पैर थोड़ा ऊपर हुआ और मैं उसी टाइम पीछे से धक्का मारा ही था कि ऐसा करते ही मेरा लन्ड का सुपाड़ा माँ के चुत में समा गया। मैं तो डर गया कि माँ जाग जाएगी और उनको पता चल जाएगा। लेकिन माँ फिर शांत हो गई।

 

हेलो दोस्तों मेरा नाम रोहन विस्वास है। मैं 24 साल का हूँ और मैं दिल्ली में रहता हूँ और IT सेक्टर में जॉब करता हूँ। मेरे फैमिली में मेरी माँ और मेरी एक बहन है पिताजी का देहांत 10 साल पहले जो चुका है।

मेरी मॉम एक सरकारी अधिकारी हैं। और कानपुर में पोस्टेड हैं। मेरी माँ की उम्र 46 साल है लेकिन वो 35 से भि कम की लगती हैं। उनका नाम कलावती है। मैं मेरी बहन और माँ एक दोस्त की तरह हैं। हमारे बीच हर तरह की बातें होती हैं मैं जब कानपुर में रहता था तो मेरी एक गर्लफ्रेंड थी उसके बारे में भी नॉर्मली घर मे बातें होती थी। मेरी माँ और बहन तो मुझे इस बात को लेकर चिढ़ाते भी थे। और मेरी टांग खिंचाई करते थे। हमारा घर का माहौल बिल्कुल खुला था और हम सभी हंसी मजाक किया करते थे।

माँ और मेरी बहन कानपुर में ही रहते थे। और 6 महीने पहले मेरी बहन की शादी गोरखपुर में हो गई। तबसे माँ अकेले ही रहती थी।

कैसे माँ-बेटे स्टेशन पर बेझिझक चुदाई कर लिए

एक दिन माँ कॉल की तो बातों बातों में बताई की उनकी सर में हल्की दर्द रहती है और यहाँ कई डॉक्टर को दिखाए लेकिन ठीक नही हो रहा। तो मैं बोला कि आप छुट्टी लेकर दिल्ली आ जाइए यहाँ एम्स में दिखा देंगे। इसी बीच मैं एक वीक की छुट्टी लेकर कानपुर गया हुआ था। और घर जाने के बाद माँ से पूछा तो माँ बताई की अभी भी ठीक नही हुआ है। और अक्सर ही दर्द होते रहता है। तो मैं माँ से बोला कि आप छुट्टी ले लीजिए और चलिए दिल्ली वहीं रहना और दिखा देंगे। ठीक होने पर आप आ जाइयेगा। पहले तो माँ तैयार नही हो रही थी फिर मान गई। वो 26 दिसम्बर का दिन था और हमारा टिकट राजधानी एक्सप्रेस के फर्स्ट AC में था। https://nightqueenstories.com

जबरदस्त ठंढ पड़ रहा था। और घना कोहरा हो रहा था। पूरा दिन कानपुर में फॉग रह रहा था। हमारी ट्रेन रात के 11 बजे था। तो हम 10 बजे ही स्टेशन पर आ गए। यहां आकर पता चला को फॉग के कारण ट्रेन 6 घण्टे लेट से चल रही है अब हमें बहुत टेंसन हुई। ब्लैंकेट तो हमारे पास था लेकिन स्टेशन के वेटिंग रूम में इतना देर तक रुकना मुश्किल काम था। एक तरह से पूरी रात रुकना पड़ता। तो मैं मॉम से बोला कि चलो घर चलते हैं और फिर बाद में आएंगे तो माँ बोली कि ठंढ बहुत तेज हो रहा है। घर आने जाने में बहुत समस्या होगी। हमारे पास ब्लैंकेट है ही यहीं आराम करते हैं। तो हम वेटिंग रूम के एक कोने में एक ब्लैंकेट बिछा के लेट गए। धीरे धीरे सभी लोग सोने लगे। जो बैठे थे वे अब सोने का जगह ढूँढने लगे। रात के 1 बज चुके थे। और लगभग सभी लोग सो चुके थे। इसी बीच किसी ने मेन लाइट बन्द कर दिया। तो अब लाल रंग की मध्यम लाइट ही जल रहा था। मैं और माँ भी सो रहे थे। चुकी हम कोने में थे तो ज्यादा डिस्टर्ब नही हो रहा था। हाँ स्टेशन पर ट्रेन और लाउड स्पीकर की आवाज से परेशानी हो रही थी। मेरी माँ साडी पहनी थी और मैं लोअर पहना हुआ था।

हमदोनों माँ बेटे एक ही कम्बल के नीचे सो रहे थे। मेरी माँ गहरी नींद में सो चुकी थी। और मैं भी सो चुका था। हमदोनों बिल्कुल चिपके हुए थे। मैं मॉम को पीछे से पकड़ा हुआ था और एक पैर माँ के कूल्हों के ऊपर रखकर सो रहा था। और जब मेरी नींद खुली तो मैं देखा कि मेरा लन्ड पूरी तरह से तना हुआ है। और माँ के गांड़ के दरारों में कुश्ती कर रहा है। लेकिन माँ फिर भी गहरी नींद में सो रही है।

और तब मेरे अंदर चुदाई का शैतान जाग गया। और मैं मॉम के गांड़ पर साड़ी के ऊपर से ही लन्ड रगड़ने लगा। लाइट बिल्कुल हल्की थी और सभी गहरी नींद में थे और सबका मुँह ब्लैंकेट के अंदर था इसलिए मेरे हिलने का कारण भी किसी को नही पता चल सकता था। तो मैं आहिस्ता आहिस्ता लन्ड रगड़ने लगा। लेकिन मेरे लोअर के अंदर से लन्ड ठीक से नही रगड़ पा रहा था। तो मैं धीरे से अपना लोअर नीचे कर दिया और साथ मे अंडरवियर भी अब मेरा फनफ़नाता लन्ड माँ के गांड़ में साड़ी के ऊपर से रगड़ खा रहा था। और माँ अब भी गहरी नींद में ही थी। तो मैं धीरे धीरे पैरों से माँ की साड़ी ऊपर करने लगा। जब साड़ी घुटनों से ऊपर आ गया तो मैं वापस पैर को नीचे किया और हाथों से साड़ी ऊपर करने लगा और बहुत जल्द मैं माँ के नंगी चिकनी जांघो को महसूस करने लगा। माँ के जांघो पर एक भी बाल नहीं थे। मैं माँ के जांघो को सहलाने लगा। मेरी माँ तो घोड़े बेचकर सो रही थी। इसलिए मेरा हिम्मत और बढ़ गया तो मैं माँ के पैंटी को नीचे करने लगा। लेकिन दबे होने के कारण पैंटी टस से मस नही हुआ। तो मैं साइड से पैंटी हटाया। पीछे से माँ की पैंटी बिल्कुल खुली थी। और सिर्फ एक स्ट्रिप ही थी जो माँ के गांड़ के दरारों में धसी हुई थी। तो मैं स्ट्रिप हटाया और एक तरफ कर दिया। अब मैं माँ के गांड़ को टटोलने लगा। https://nightqueenstories.com

क्या बताऊँ दोस्तों माँ की गांड़ बिल्कुल सॉफ्ट थी। मैं अच्छे से महसूस कर पा रहा था मेरी उंगलियाँ माँ की गांड़ के छेद को अच्छे से सहला रहा था। और मैं जब माँ की चुत को टटोलना चाहा तो नाकाम रहा क्योंकि माँ की पैर सीधी थी इस कारण उनकी चुत तक मेरी उंगलियाँ नहीं पहुच पा रही थी। मैं कुछ देर तक ऐसे ही नाकाम कोशिश करता रहा। तभी माँ थोड़ा हिली और अपने पैरों को थोड़ा मोड़ ली उस कारण उनकी चुत नीचे की तरफ हो गई। और मेरी उंगलियाँ उनकी चुत को जैसे ही टच हुआ मैं हैरान हो गया क्योंकि उनकी चुत पुरी गीली थी। और चिकना लसलसा पदार्थ मेरी उंगलियो पर महसूस हुआ।

जैसे ही मॉम थोड़ा हिली मेरे लन्ड का सुपाड़ा मॉम के चुत में समा गया।

इधर मेरा लन्ड पूरे आवेग में ऊपर नीचे हो रहा था। तो मैं माँ के चूतड़ों को हल्का फैलाया और अपना लन्ड माँ के चुत में डालने कोशिस करने लगा। लेकिन मेरा लन्ड थोड़ा भी अंदर नही जा रहा था। वही माँ के चुत बिल्कुल गर्म थी और बिल्कुल गीली थी। मैं वैसे ही अपने लन्ड के सुपाड़े को माँ के गीली चुत के छेद पर रगड़ने लगा। मैं थोड़ी तेज तेज ऐसा कर रहा था। मुझे झुंझलाहट भी होने लगी थी। क्योंकि ऐसा करने में मुझे बिल्कुल मजा नही आ रहा था। और ऐसा करते 5,6 मिनट हो चुका था। तभी माँ हिली और उनका पैर थोड़ा ऊपर हुआ और मैं उसी टाइम पीछे से धक्का मारा ही था कि की ऐसा करते ही मेरा लन्ड का सुपाड़ा माँ के चुत में समा गया। मैं तो डर गया कि माँ जाग जाएगी और उनको पता चल जाएगा। लेकिन माँ फिर शांत हो गई। और डर के मारे मैं भी वैसे ही लन्ड को चुत में डाले शांत हो गया। 5, 6 मिनट तक मैं नही हिला। जब देखा कि माँ सो ही रही है तो मैं धीरे धीरे हिलना शुरू किया। अब मुझे मजा आने लगा। और मेरा लंड भी हर धक्के के साथ थोड़ा अंदर होते जा रहा था। मैं ऐसे ही पीछे से माँ को चोदे जा रहा था। कुछ देर बाद ही मुझे लगा कि अब मेरा लन्ड पानी छोड़ देगा। तो मेरा धक्के का स्पीड भी बढ़ गया। और फिर मेरा लन्ड माँ के चुत में ही पानी छोड़ दिया।

कैसे मैंने मॉम को सोते हुए चोद दिया

दोस्तों अब मैं घबराने लगा कि मैं लन्ड बाहर कैसे निकालूँ कही माँ को पता ना चल जाए। तो मैं ऐसे ही 2, मिनट शांत रहा और फिर लन्ड को खींच लिया। जैसे ही मैं लन्ड खिंचा। माँ के चुत से कप की आवाज आई। और फिर मैं माँ के साड़ी को नीचे किया और अपना लन्ड लोअर के अंदर डालकर माँ से चिपक कर सो गया। सुबह 4 बजे मॉम मुझे जगाई और बोली रोहन उठो ट्रेन आने वाली है 3 नम्बर प्लेटफॉर्म पर चलना है। तो मैं उठा और ब्लैंकेट समेटकर हमदोनों 3 नम्बर प्लेटफॉर्म पर चले गए। लेकिन मेरे दिमाग मे वही सिन घूम रहा था। की कैसे मैं माँ को सोते हुए चोद दिया।

थोड़ी ही देर में ट्रेन आ गई। और हम ट्रेन में बैठ गए। हमारा टिकट फर्स्ट AC में था। जो एक केबिन टाइप का था। तो हम अंदर बैठ गए। फिर माँ बोली कि बेटा मैं चेंज कर लेती हूँ साड़ी में सीट पर सोने में दिक्कत होता है। फिर मॉम बैग से टॉप और पायजामा निकाली और बाथरूम में जाने लगी तो मैं बोला मॉम आप यही चेंज कर लो मैं बाहर चला जा रहा हूँ। माँ बोली ठीक है। और मैं बाहर चला गया। 5 मिनट में ही माँ बोली अब आ जाओ। मैं अंदर गया तो देखा माँ गुलाबी रंग की टॉप और ग्रे कलर की पायजामा पहनी थी। माँ बहुत सुंदर लग रही थी।

मेरी माँ मोटी नही हैं बल्कि फिट हैं और उनकी चुचियाँ भी लूज़ नही हुई हैं। तो मैं साड़ी फोल्ड करने में माँ का मदद किया। और फिर हम बैठ गए।

उस केबिन में सिर्फ हमदोनों ही थे और ठंढ की वजह से माँ बोली कि रोहन केबिन लगा दो। बहुत ठंढ है। और फिर हम अपने अपने सीट पर लेट गए। मॉम बोली कि ठंढ बहुत है अच्छे से ब्लैंकेट ओढ़ लो। नींद में ब्लैंकेट हटा मत देना। और अगर ज्यादा ठंड लगे तो मेरी ही सीट पर आ जाओ। ठंड है दोनो को हो जाएगा। माँ तो जैसे मेरी दिल की बात सुन रही थी, और उन्होंने मेरे दिल की बात कह दी। तो मैं बोला हाँ मॉम ठंड तो बहुत है लेकिन सीट छोटा है एक सीट पर नही हो पाएगा। तो माँ बोली कि जो जाएगा। अगर ठंड लग रही तो इसी पर आ जाओ। तो मैं कहा ठीक है। और मैं माँ के बर्थ पर ही चला गया। माँ पूछी तुम किधर सोवोगे तो मैं बोला मैं बाहर साइड ही सोऊंगा। और आपके पैर तरफ मैं सर कर लेता हूँ। तो माँ बोली नही मेरा पैर तुम्हे लगेगा इधर ही सर करो हो जाएगा। फिर हम एक ही बर्थ पर लेट गए। और ब्लैंकेट के नीचे हो गए। माँ दीवार तरफ मुँह कर ली और मैं माँ को बच्चे की तरह पकड़ के सो गया मेरा पैर माँ के कूल्हों पर कर लिया। और माँ कों पकड के सोने लगा। थोड़ी देर में ही लगा जैसे माँ सो गई। इधर वेटिंग रूम का चुदाई याद कर करके मेरा लन्ड फिर से हलचल करने लगा। और माँ की गर्म जिस्म ने मुझे हद से ज्यादा गर्म कर दिया था। मैं माँ के पायजामे के ऊपर से ही लन्ड को रगड़ रहा था।

अब मुझसे बर्दास्त नही हुआ तो मैं फिर से मॉम के पायजामे को नीचे करने लगा। और थोड़ी कोशिस कर बाद मॉम का पायजामा नीचे हो गया लेकिन मैं ये देखकर हैरान हो गया क्योंकि माँ इस बार ना सिर्फ साड़ी ही उतारी थी बल्कि साड़ी के साथ पैंटी भी उतार दी थी। माँ सिर्फ पायजामा पहनी थी। और जब मैं माँ के चुत को टटोला तो माँ की चुत पूरी गीली थी।

मेरा हाल तो पहले से बुरा था तो मैं बिना देर किए अपना लन्ड माँ के चुत के छेद पर रगड़ने लगा। तभी माँ हाथ पीछे की और मेरे लन्ड को पकड़ ली और घूम गई और बोली रोहन ये क्या कर रहे हो। ये गलत है। तब मैं बोला सॉरी मॉम मुझसे नही बर्दास्त हुआ तो ऐसा कर दिया। मुझे माफ़ कर दीजिए। तो माँ बोली बेटा मैं समझ सकती हूँ इस उम्र में ऐसा होता है। और मुझे गले से लगा ली। और बोली मेरा बेटा कितना अच्छा है।

माँ ढेर सारा थूक मेरे लन्ड पर लगाई और हाथों में पकड़कर जोर जोर से हिलाने लगी

लेकिन मेरा लन्ड तो अभी भी सलामी मार रहा था। थोड़ी देर इंतजार के बाद माँ बोली कि रोहन मैं समझ रही हूँ तुम परेशान हो। बताओ मैं क्या करूँ। तो मैं अच्छे बच्चे की तरह बोला कि मॉम कोई बात नही मैं ठीक हूँ। तो माँ बोली। बेटा मैं अच्छे से समझ रही हूँ। तुम्हारा मन सेक्स के लिए तड़प रहा है। फिर माँ बोली बेटा मुझे उठने दो मैं कुछ करती हूँ। मैं तुम्हे शांत करने की कोशिश करती हूँ। फिर माँ उठी और मेरे पैरों तरफ बैठ गई और मेरे लन्ड को पकड़ ली। जैसे ही मॉम मेरे लन्ड को पकड़ी मैं सिहर गया और मेरे मुँह से आहहहहहहहहहहहहहहह…… मॉम…. की आवाज निकली और फिर मॉम ढेर सारा थूक मेरे लन्ड पर लगाई जिससे मेरा लन्ड माँ के हाथ मे फिसलने लगा और माँ जोर जोर से मेरा लन्ड हिलाने लगी। मेरे मुँह आहहहहहहहहहहहहहहहहह….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. आहहहहहहहहहहहहहहहहह….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई…..आहहहहहहहहहह… ऊँहऊँहऊँहउहहहहहहहहहहह मॉम… की आवाज आती रही और थोड़ी देर में ही मेरा लन्ड झड़ने वाला था तो मेरा शरीर ऐंठने लगा। तो मॉम समझ गई कि मैं झड़ने वाला हूँ। तो माँ और जोर जोर से मेरा लन्ड हिलाने लगी। और मेरा लन्ड ढेर सारा गाढ़ा वीर्य उगल दिया।

अब मैं शांत हो गया फिर माँ बैग से एक तौलिया निकाली और अपना हाथ से वीर्य साफ की फिर मेरे लन्ड को भी और जो भी वीर्य गिरा था सब अच्छे से माँ साफ की।

और फिर हम बातें करने लगे। और ढेर सारी बाते की। और दिल्ली पहुँच गए।

दोस्तों आगे मैं और माँ कैसे फिर चुदाई किये कैसे मेरी माँ मुझसे गांड़ मरवाई। ये सब मैं किसी और कहानी में बताऊंगा।

आप सब अपना ख्याल रखें और https://nightqueenstories.com पर चुदाई की कहानियों का आनंद लेते रहें।

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दोस्तों कहानी कैसी लगी कमेंट करके मुझे जरूर बताएं। और कहानी को लाइक और शेयर करना ना भूलें। धन्यवाद।।

 

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