सेक्स वाली दोस्ती

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दोस्त से सेक्स या सेक्स से दोस्ती

हेलो दोस्तों! उम्मीद है आप सब स्वस्थ और अछे है। मेरा नाम मोना है और मैं अभी इंजीनियरिंग के पेहले साल में हूँ। ये मेरी अब तक कि कॉलेज लाइफ का सबसे हसीन किस्सा है। दो महीने पेहले की ये बात है जब मेरे दोस्त समीर ने मुझे चोदा था, हमारे एक दोस्त के घर।

दरसल हम सब नए नए दोस्त बने थे। कॉलेज के पेहले हफ्ते में ही हमारा दस लोगों का फ्रेंड सर्कल बन गया, जिसमे चार लड़के थे और छे लड़कियाँ। समीर की और मेरी दोस्ती कॉलेज के पहले दिन से ही थी। हम दोनों एक ही बेंच पर बेठा करते थे और खूब गप्पे लड़ाते थे। हम दोनों को एक दूसरे के क्रश के बारे में मालूम था। समीर अब मेरा खास दोस्त बन चुका था।

एक दिन हम सब ने कॉलेज बंक करके घूमने जाने जा प्लान किया। हम दिन टू-व्हीलर्स पर बहुत घूमे। शाम को हम सब हमारी एक दोस्त प्रांजलि के फ्लैट पर गए। वहा पर हम ने एक मूवी साथ मे देखी। उस मूवी में कुछ बोल्ड सीन्स भी थे, जिन्हें देखते वक्त सब एकदम शांत हो गए थे। मौहोल हल्का करने के लिए हम कुछ नॉन वेज जोक्स मारने लगे। सब खूब हस रहे थे। मुझे किसी को छेड़ने का मन कर राय था तो मैने गौरी और विनय को लेकर जोक मारा। गौरी और विनय एक दूसरे से प्यार करते थे।

रूम में सारी लाइट्स बंद रखी थी। गौरी और विनय पीछे वाले सोफे पर बैठे थे। मेरा ध्यान उनकी ओर गया तो वो दोनों एक दूसरे को चोरी चोरी किस कर रहे थे। समीर मेरे बगल में बेठा था। मेने अपने पैर से उसके पैर को छुआ तो वो चौंक कर मेरी ओर देखने आगा। मैंने इशारे से उसे पीछे मुड़ने को कहा। उसने भी उन्हें किस करते हुए देखा। उसने तुरंत लाइट ऑन की ओर सबने उनको रंगे हाथ पकड़ा। हम सब बहुत हँसे मगर इसके बाद मौहोल थोड़ा गर्म हो गया था।

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अगले दिन इतवार था तो कॉलेज को छुट्टी ही थी। हम सब ने प्लान किया नाईट आउट का। प्रांजलि के घरवाले भी उनके गाँव गए थे तो हमे डाँटने वाला कोई नही था। हम सबने फिरसे गाड़ियां निकाली और चल पड़े। समीर और में एक गाड़ी पर बैठे। घूमते घूमते लड़को ने रेस लगाई और जोर से गाड़ी भगाई। मेने समीर को कस कर पकड़ लिया तो उसने गाड़ी धीरे की। मेने उसे कहा ‘अरे भगाओ!’ तो उसने फिर से गाड़ी तेज की। उस एक सेकंड में मुझे पहली बार समीर के लिए कुछ महसूस हुआ। उसकी गर्म पीठ की छुवन मेरी चुचियों तक पहुँच रही थी। उस रात मौसम भी इतना अच्छा था की मेरे सारे अरमान जागने लगे थे।

हम सब फिर एक चौक में रुक गए। रास्ते पर कम ही लोग थे। सीमा ने कहा ‘यहाँ पास कोई दुकान खुली है क्या देखते है…कुछ खाने का मन कर रहा है’ सब मान गए और अलग अलग मोड़ पर दुकाने चेक करने लगे। मैने समीर को बोला “हम यही रुकते है यार, ले आयेंगे ये लोग कुछ मिला तो” और हम वही रुक गए। सबके जाने के बाद मैंने फिर से समीर को पीछे से कस कर पकड़ा और बैठी रही। उसने बोला “क्या हुआ मोना डार्लिंग, नींद आ रही है क्या?” में गाड़ी से उतरी और उसके सामने खड़ी हो गयी। मेने बोला “नही! कुछ और ही हो रहा है”

हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे। मेने एक कदम आगे बढ़ाया और उसके थोड़ा करीब गयी। उसने मुझे कमर से पकड़ लिया और मुझे किस कर लिया। वो तुरंत रुका और सोचने लगा। मैंने दोनों हाथ उसके गर्दन पर रखे और में फिर किस करने लगी। बस एक ही मिनट हुआ था कि गाड़ियों की आवाज आयी। हमारे दोस्त वापस आ रहे थे तो हम रुक गए और एक दूसरे से दूर खड़े हो गए। हमारे दोस्त आइस क्रीम ले कर आए थे। तो हम सब उधर ही खड़े हो कर खाने लगे।

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समीर और मैं एक दसूरे से आँखे नही मिला रहे थे। फिर हम सब वापस प्रांजलि के घर की ओर निकले। गाड़ी पर भी हम दोनों एक दूसरे से बात नही कर रहे थे और में उसे लिपट के भी नही बैठी। हम दोनों को ही अजीब लग रहा था क्यूंकि हम हमेशा से ही अच्छे दोस्त रहे थे। हम फ्लैट पर जाने के बाद भी एक दूसरे से दूर जाके बैठे।

हम सब बैठे हुए थे और बातें करने लगे। गौरी और विनय को मुझसे बदला लेना था शायद। तो गौरी अचानक मुझे मेरे क्रश सुमीत के नाम से चिढाने लगी। तब तक सिर्फ गौरी और समीर को ही मेरे क्रश के बारे में पता था। बाकी सब जानने के बाद मस्ती करने लगे। विनय ने कहाँ “हाँ भाई! सुमीत और मोना काफी अच्छे लगते है साथ में” और बाकी सब भी उसकी हाँ में हाँ मिलाने लगे। तभी अचानक समीर उठा और उस रूम से बाहर चला गया।

बाकी सब का ध्यान नही था मगर मैंने उसे देखा। कुछ मिनट बाद में भी उधर से बाहर निकली। बाहर प्रांजलि कुछ कर रही थी। उसने मुझे रोका और बोली “समीर को जलन महसूस हो रही थी। मैंने उसके चेहरे पर साफ देखा।” मैंने बिना कुछ बोले उसकी ओर देखने लगी। प्रांजलि ने आगे कहाँ “ज्यादा भोली मत बनो मेने तुम दोनों को किस करते हुए देख लिया था। वैसे…तुम चाहो तो अंदर वाला कमरा यूज़ कर सकती हो…” ऐसा कहकर उसने आँख मारी और वहासे बाकी सब के पास चली गयी।

प्रांजलि के सुझाव ने मुझे हॉर्नी बना दिया था। और समीर भी शायद मुझे पसंद करता है, मेने सोचा। मैं उसके पास हॉल में चली गयी। मैंने बोला “यहा क्या कर रहे हो समीर?” उसने थोड़ी देर जवाब नही दिया और फिर बोला “तुमसे मतलब! वैसे भी कौन हूँ में तुम्हारा?” मैने उसे कॉलर पकड़ कर खड़ा किया और उसकी गर्दन पर अपना नाखून घुमाया। में बोली “अब ये भी बताना पड़ेगा!”

मैंने अपना जैकेट उतारा और उसकी हाथ में दे दिया। में घूमी और अंदर वाली रूम की ओर जाने लगी। मैने मुड़ कर पीछे देखा तो वो अभीभी मेरी जैकेट पकड़ कर वही खड़ा था। मेने अपनी टॉप की पीछे वाली चैन खोली और समीर को देख कर मुस्काई। उसे तब समझ आया में क्या कहना चाह रही थी। उसने मेरा जैकेट फेंका और मेरे पीछे पीछे आने लगा। वो इधर उधर देख रहा था कि कोई और न देख ले। तो मैने अपना टॉप पूरा निकाल दिया और उसके मूह पर फेंका। में भाग कर रूम में गयी और वो भी पीछे पीछे भागा। इस तरह की और कहानियाँ पाने के लिए nightqueenstories.com पर जाएं।

हमने रूम का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। समीर मेरे करीब आया और मुझे किस करने लगा। मेने उसका हाथ अपने हाथ में लिया और फिर अपनी चुचियों पर रखा। वो रुका और बोला “अ..मोना…तुम सचमे चाहती हो कि मैं..?” मेने कहा “क्यूँ! अंदर बड़ी जलन हो रही थी ना तुम्हे। अब मेरे बदन में लगी आग तुम ही बुझा दो…मेरी चुत की प्यास बुझा दो” मेरी ऐसी बातें सुन कर समीर भी जोश में आ गया।

उसने अपना शर्ट उतार दिया। मेने उसे फिर अपने करीब खींचा और उसके होठ चूमने लगी। उसने मेरी ब्रा को नीचे किया और मेरी चुचियाँ पकड़ ली। मेरी चुचियाँ गर्म थी और उसके हाथ ठंडे। इस कारण मुझे उसका एक एक स्पर्श बेहका रहा था। मेरी चुत भी तड़पने लगी थी। उसने फिर एक हाथ मेरी स्कर्ट के अंदर डाला और मेरी पैंटी पर लगाया। मैने अपना स्कर्ट निकाल दिया। मेरी चुत अब और इन्तेजार नही कर सकती थी

मेने उसके जीन्स का बटन खोला और उसे बेड पर ढकेला। और में उसके ऊपर लेट गयी। उसने पीछे से मेरे पैंटी के अंदर हाथ डाला और मेरे चूतड़ पकड़ लिए। और फिर मेरी पैंटी के बीच का हिस्सा खींचा। मेरी पैंटी मेरी चुत के अंदर घुसने लगी। मेरी चुत पेहले से ही गीली हो रखी थी और अब और भी मचल रही थी। में उसके पैरों पर बैठ गयी और अपनी पैंटी उतार दी। मेने ब्रा अभी भी पहनी हुयी थी। मेने फिर उसकी जीन्स भी उतार दी और अंडरपैंट भी उतार दी।

उसका मोटा लंड देख पर मेरी हवस और बढ़ गयी। मै उसकी जांघो पर पैर फैला कर बैठ और मैने अपनी चुत को दो उंगलियों से खोलने लगी। उसने मुझे खींचा और में फिर उसके ऊपर लेट गयी और उसकी वक्त उसने अपना लंड मेरी चुत के अंदर डाल दिया। उसका लंड इतना बड़ा था कि पूरा अंदर जाने तक मेरा बदन काँपने लगा था। और फिर उसने जो मेरी चुदाई की….मै खुशी के मारे जोर जोर से चींखने लगी…

ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…

सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. आहहहहहहहहहहहहहहहहह……

समीररररर…उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह… आहहहहहहहहहहहहहहहहह…ओहहहहहहह हहहहहहह…… आहहहहहहहहहहहहहह….. समीर चोदो मेरी चुत।… आआआहहहहहहह और जोर से..जोर से ओह मेरे हीरो आआआहहहहहहह

आहहहहहहहहहहहहहहहहह…ओहहहहहहह हहहहहहह…… आह हहहहहहहहहहहहह…..

चोदो मेरी चुत।…तबाही मचा दो मेरी चुत में…

आआआहहहहहहह जोर से..। आहहहहहहहहहहहहहहहहह…ओहहहहहहह हहहहहहह…… आह हहहहहहहहहहहहह…..

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हम दोनों ही पूरे जोश में थे। अब में उसके लंड पर ऐसे उछल रही थी जैसे में घुड़ सवारी कर रही हूँ। मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। में अपनी चुचियों को दबा रही थी और अपने होठ चबा रही थी। मेरी इतनी बेहोश थी कि में कहा हूँ ये सोचे बगैर बस चिल्लाए जा रही थी…

उममहहहहहहहहहहहहहहहहह…

उममहहहहहहहहहहहहहहहहह…आहहहहहहहहहहहहहहहहह…ओहहहहहहहहहहहहहह…… आह हहहहहहहहहहहहह….. ऐसे ही…

चोदो मेरी चुत…फिर कभी सुमीत का नाम भी नही लूंगी…

सिर्फ समीर!!! आहहहहहहहहहहहहहहहहह…

आआआहहहहहहह जोर से..। आहहहहहहहहहहहहहहहहह…ओहहहहहहह हहहहहहह…… आहहहहहहहहहहहहहह…..

ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…

सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. आहहहहहहहहहहहहहहहहह……

समीररररर…उममहहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहहहहहहहहहहहहहहहहह…

उममहहहहहहहहहहहहहहहहह…

कुछ देर बाद उसका पानी निकल गया। हम थोड़ी देर पड़े रहे। में अभी पूरी तरह संतुष्ट नही थी। में उसे गले लगा कर सो गयी। वो मेरी नंगी पीठ पर हाथ घुमाने लगा। में उठ के बैठी तो मैने देखा कि वो आँखे बंद करके लेटा हुआ था और चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी। मेने उसके गाल पर चूमा तो उसने आँखे खोली। मेने बोला “तुम्हे क्या लगा…मै तुम्हे इतनी जल्दी सोने दूँगी?” वो कुछ बोलता उसके पहले ही मैंने अपनी दोनों टांगे उसके ऊपर चढ़ गयी। उसने मेरी जांघों को कस कर पकड़ लिया और मेरी चुत को चाटने लगा। में हमेशा से ही ये मजा लेना चाहती थी, आज जाके मौका मिला था। वो मेरी चुत में अपनी जीभ ऐसे घुमा रहा था जैसे आइस क्रीम चाट रहा हो।

मेरी हल्की हल्की आहे निकल रही थी…

उममहहहहहहहहहहहहहहहहह… आहहहहहहहहहहहहहहहहह…ओहहहहहहह हहहहहहह…… आहहहहहहहहहहहहहह….. समीर चाटो! आआआहहहहहहह….

मेरे हीरो आआआहहहहहहह

ओहहहहहहहहहहहहहह……

और फिर मेने उसका लंड मुह में ले लिया और खूब चूसा। वो धीमी धीमी आहे भर रहा था। अब वो भी जोश में आ गया था। वो उठ गया और मुझे घोड़ी की तरह घुटनों के बल बैठने को बोला। में बैठ गयी। उसने अपना लंड पीछे से अंदर डाला और फिर एक बार मेरी खूब चुदाई की। इस बार मुझे पेहले से कई ज्यादा मजा आया। कुछ देर बाद हम दोनों ही झड़ गए।

सुबह के पाँच बज रहे थे। हमने सोचा बाकी सब सो रहे थे तो हमे भी जाकर कही थोड़ी देर सो जाना चाहिए। इस लिए हमने कपड़े पहन लिए और धीरे धीरे बाहर गए। सब लोग हॉल में सो रहे थे और लाइट भी डिम थी। हम सोने के लिए खाली सोफा ढूंढ रहे थे तभी किसी की आवाज आयी। विनय बोला “हमने किसीने कुछ भी नही सुना…” गौरी इस बात पर हँसने लगी और बोली “वैसे मोना…तुम्हारा जैकेट उस टेबल पर है।” प्रांजलि भी जगी हुई थी, वो भी हँसने लगी। हम पकड़े गए थे और गौरी का बदला पूरा हुआ था।

मेने उन सब को इशारा से चुप रहने को बोला। समीर भी चुप चाप एक सोफे पर जाके लेट गया। अगले दिन भी सबने इस बात को लेकर हमे बहुत छेड़ा। और हमे भी मजा ही आ रहा था। तो दोस्तों, ये थी मेरी कहानी! ऐसे मेने और मेरे दोस्त ने एक दूसरे की आग बुझाई…अगर ये कहानी पढ़ कर आपको मजा आया तो लाइक और कमेंट जरूर करे।

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मेरी अगली कहानी का शीर्षक है “हॉट बॉयफ्रेंड”

धन्यवाद।

नमस्कार।।

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