कार में प्रिंसिपल मैडम चुद गई भाग-1

चलती कार में प्रिंसिपल मैडम चुद गई भाग-1

दोस्तों मैं जान बुझ के घर से निकलते वक्त ही पैंटी और ब्रा उतार दी थी। और कुर्ती और लांग स्कर्ट में आई थी। अब वह मेरी चुत में उँगली डालने कोशिस करने लगा लेकिन वह नही कर पा रहा था। फिर मेरे से नही रहा गया तो मैं बोली अभी आगे आ जाओ। चुकी फॉर्च्यूनर में काफी जगह होती है और अभी दुबला पतला था भी। अभी तो वह जावानी की दहलीज पर कदम ही रखा था। तो अभी उठा और बोला कैसे। तो मैं बोली मेरे पैरों के पास आकर बैठो। वह आ गया और अच्छे से बैठने में थोड़ा दिक्कत हुआ लेकिन वह बैठ गया और मैं ड्राइव किये जा रही थी। दोस्तों मैं उम्मीद नही की थी कि अभी ऐसा कुछ करेगा मैं तो सोची थी वह चुत को सहलाएगा लेकिन उसने

हेलो दोस्तों मेरा नाम सोनिया सक्सेना है। मैं दिल्ली की हूँ और एक सफल बिजनेस वीमेन हूँ। मेरा फेवरेट और एकमात्र सेक्सी कहानियों के संग्रह https://nightqueenstories.com के पाठकों को नमस्कार है।

मेरी उम्र 28 साल है। और मेरी फिगर हाहाकारी है। जो एक बार मुझे देख ले उसका लन्ड बिना चुवे ही पानी छोड़ देता है। 32 की मेरी चुचियाँ और 28 कि कमर है और जो सबसे खास है वो है मेरी गांड़ हाँ दोस्तों मेरी गांड़ की साइज 38 इंच है। और बिल्कुल दिल के आकार का है।

वेसे तो मेरे कई बिजनेस हैं होटल, रेस्टोरेंट, मॉल लेकिन जो मेरे लिए सबसे अहम है वो है मेरा स्कूल। जी हां मैं उस स्कूल के प्रिंसिपल हूँ जो वर्ल्ड के टॉप 10 स्कूल में से एक है।

यह कहानी बाहर की नही बल्कि मेरे घर की ही है। और यह मेरे और मेरे 16 साल के देवर के बीच की है। हां दोस्तों यह घटना मेरे सोलह साल के देवर और मेरी चुदाई की है।

मैं स्कूल में डेली 2 घंटे के लिए जाती थी। मैं इसलिए स्कूल नही जाती थी क्योंकि मैं वहाँ की प्रिंसिपल थी बल्कि इसलिए जाती थी क्योंकि लड़के मुझे देखकर घूरते थे। और सभी लड़के आंहे भरते थे। जब मैं गाड़ी से उतरकर अपने चैम्बर में जाति थी तो लड़के मेरी पिछवाड़े को देखकर लन्ड सहलाने लगते थे। और इनमें ज्यादातर वो लड़के होते थे जो 8th से 12th तक के थे।

मेरा सपना था कि मैं इन उम्र के लड़के के साथ चुदाई करूँ। क्योंकि मुझे पता था कि लड़के 14 साल से ही बहुत हॉर्नी हो जाते है। लेकिन मैं चुदवाती तो किससे स्कूल के किसी लड़के से चुदवाती तो हल्ला हो जाता और बहुत बदनामी होती। इसलिए मन मसोस के रह जाती।

लेकिन दोस्तों एक कहावत कहते हैं कि नजदीक की नजर कमजोर है क्या। दरअसल मेरे घर मे ही मेरा देवर ही तो था। जो बहुत क्यूट था। और भाभी भाभी कहके मेरा टाइम पास करता था। वह 16 साल का था और उसका नाम अभिषेख था। वह था तो 16 साल का लेकिन उसे सब ज्ञान था। मैं उससे बहुत हँसी मजाक करती थी अक्सर उसकी मोटी मोटी गाल को खींच देती थी। तो वह भी कभी कभी मेरे गाल खिंच देता था। मैं जब बैठी रहती तो पीछे से आके पकड़ लेता और गालों पर किसी कर लेता। कभी कभी वह किचन में पीछे से पकड़ लेता और मेरे पीठ और चढ़ जाता। वह बहुत नटखट था। वह जितना नटखट था उतना ही सीरियस मेरे पति थे। दोनो भाइयों के व्यवहार से लगता ही नही था कि दोनों एक ही माँ के चुत से निकले हैं।

मेरे पति जहां बिल्कुल खड़ूस थे। वहीं अभी बहुत चंचल और मजाकिया मस्तीखोर था। हमदोंनो कि खूब जमती थी। मैं अक्सर उसे लेकर मार्केट या घूमने जाती थी। मैं जब गाड़ी चलाती थी तो वह बहुत शरारत करता था कभी मेरे गालों पर किसी कर लेता। कभो गोद मे सर रख देता कभी पीछे जाकर मुझे पकड़ लेता।

उसकी नटखटपन मुझे बहुत भाता था। मैं शुरू से सेक्स की दीवानी रही हूँ। मुझे सेक्स करना बहुत पसंद है। मेरे लिए सेक्स से बढ़कर कुछ भी नही है। जब तक मेरे चुत से पानी नही निकल जाता मुझे नींद ही नही आती है।

वह कभी कभी मेरी चुचियों को उमेठ देता था। और उसकी यह हरकत मुझे बहुत अच्छा लगता था। मैं भी कभी कभी उसे अपने माल का दीदार करा देती थी। चुकी घर मे हम तीन ही लोग रहते थे। मेरे पति, मेरा देवर और मैं। मेरे पति तो महीने में बमुश्किल 3, 4 दिन घर मे रहते थे।

मैं अक्सर अभी को अपना जिस्म का दीदार करा देती थी जिससे वह खुश हो जाता था। मैं कभी कभी पीछे से सिर्फ ब्रा में उसको दिख देती थी। पिछले कुछ समय से मैं नोटिस कर रही थी। जब मैं कपड़े चेंज करती तो वह छुप छुप के देखता था। जब मुझे ये एहसास हुआ तो मैं जानबूझ के दरवाजा खुला छोड़ के कपड़े चेंज करती और वह मेरे जिस्म का दीदार कर खुश हो जाता।

मेरे पति को सिंगापुर गए 10 दिन हो गया था। और मुझे अब चुदाई की सख्त जरूरत महसूस होने लगी थी। मैं कई दिन से मुठ मार के काम चला रही थी । हलाक़े मेरा पति से भी मुझे कम ही मजा आता था। लेकिन कहते हैं ना कि भागल भूत के लंगोट ही सही।

तो एक दिन सुबह का टाइम था। मैं नहाने जा रही थी। तभी मुझे अभी के कमरे से कुछ आवाज सुनाई दी। और मैं जब धीरे से उधर बढ़ा और उसके कमरे में झांक कर देखा तो हैरान रह गई। वह पैंट को घुटनों तक कर दिया था। और दोनो पैरो को सीधा किया हुआ था और अपने बेड पर बैठा था। और अपना लन्ड जोर जोर से हिला रहा था। वह बीच बीच मे लन्ड पर थूक भी रहा था। जिससे उसके लन्ड से हचपच की आवाज आती थी।

और फिर उसके लन्ड से गाढ़ा सफेद माल बाहर गिरने लगा। वह जोर से मुट्ठी में लन्ड को भीच लिया। और दबा के रस गारने लगा। अब वह वेसे ही बेड पर लुढ़क गया और फिर 2 मिनट बाद उठ के पैंट पहन लिया।

दोस्तों उसका लन्ड बड़ा सा था। मेरे पति से भी बड़ा था। मैं हैरान थी कि एक 16 साल के लड़के का लन्ड इतना बड़ा है।

फिर मैं वहाँ से धीरे धीरे हटी। मेरा बाथरूम सीसे का है। अंदर से पर्दा लगा हुआ है। फिर मैं अभिषेख को आवाज दी।

अभी तौलिया कहाँ है मिल नही रहा मुझे नहाने जाना है। तो वह भागे भागे आया और तौलिया ढूंढकर दे दिया। वेसे यह तो बहाना था वरना तौलिया तो मैं ही छुपा दी थी। फिर मैं नहाने बाथरूम में चली गई। और अपनी गाउन उतारी और नंगे हो गई। मैं पर्दा नही लगाई थी। इसलिए मेरा बदन साफ अभी को दिख रहा था। फिर मैं शावर चालू की और नहाने लगी। मैं अपनी चुचियों को मसलकर नहाने लगी। मैं जानबूझ के ऐसा कर रही थी। फिर चुत को भी रगड़ी। और अब मैं कांच में देखी अभी मुझे नंगा देख पागल हो गया और अपना लन्ड निकाल के जोर जोर से हिलाने लगा।

मैं भी एक पैर टब पर रखी और चुत रगड़ने लगी। और चुत में उँगली डाल के चोदने लगी। यह देखकर अभी और पागल हो गया और जल्दी जल्दी मुठ मारने लगा। और फिर मैं नोटिस की हम दोनों थोड़े ही अंतराल पर झड़ गए। फिर जब मैं शरीर पोछकर तौलिया बांधने लगी तो अभी वहां से अपने रूम में चला गया।

फिर हम ब्रेकफास्ट किए और मैं ऑफिस के लिए निकल गई। लेकिन मेरे नजरो के सामने से अभी का लन्ड हट ही नही रहा था।

चुकी मैं एक बार घर से निकलने के बाद शाम 5, 6 बजे ही वापस लौट पाती थी। लेकिन उस दिन मेरा मन बिल्कुल नही लग रहा था। और मेरे सर में हल्की दर्द भी होने लगा थ। सो मैं 2 घंटे में ही घर वापस आ गई। घर आई तो घर पे अभी भी नही था वह स्कूल गया हुआ था। और फिर वह 2 बजे आया। तो मैं अपने कमरे में लेटी हुई थी। और जान बूझकर मैं सिर्फ पैंटी और ब्रा में लेट गई थी। अभिषेख जब आया तो मुझे इस हाल में देखकर मस्त हो गया। वह पर्दे के पीछे से मुझे देख रहा था और मैं उसे देख चुकी थी लेकिन अनजान बनने का नाटक की। और अपने एक हाथ से चूची दबाने लगी और दूसरे हाथ को पैंटी में डाल दी और चुत को रगड़ने लगी। अभी यह देख पागल हो गया और अपना लन्ड पैंट से बाहर निकाला और जोर जोर से लन्ड हिलाने लगा। शायद वह ढेर सारा थूक लन्ड पर लगा रखा था। इसलिए उसके लन्ड से चपड़ चपड़ की आवाज आ रही थी। फिर थोड़ी देर में ही वह झड़ गया।

और मैं भी चुत पर से हाथ हटा ली और चादर खिंच के ओढ़ ली। और जब देखी की अभी वहाँ से जाने लगा तो मैं इंतजार करने लगी वो चेंज करे फिर उसे बुलाऊंगी। लेकिन फिर डिसाइड की अभी नही बुलाते हैं।

फिर मुझे नींद आ गई और मैं फिर 6 बजे उठी। फिर हम बैठ के कॉफी पीए। अभी मुझे भूखे शेर की तरह आज देख रहा था। और पीछे से आ के मुझे पकड लिया। और मेरे गालों पर किस किया तो मैं भी उसके गालों पर किस करने के लिए मुड़ी लेकिन उसके होंठो पर मेरे होठ चले गए। फिर भी मैं जोरदार चूमी उसके होठ पर रशिद कर दी। फिर मैं बोली अभी चलो कही घूमने चलते हैं। वेसे भी काफी अंधेरा हो चुका था। और खाना बनाने वाली भी तब तक आ चुकी थी।

फिर हम तैयार हुए और अभी से पूछे कि कौन सी गाड़ी में चले तो वह बोला कि बड़ी वाली कोई गाड़ी ले चलो। तो मैं फॉर्च्यूनर निकाली और फिर हमदोंनो निकल लिए मैं अभी से बोली कहा घूमना है बताओ आज तुम्हारी मर्जी से घूमेंगे। तो वह बोला चलो लांग ड्राइव पे। मैं भी सोची की यह ठीक बोल रहा है। तो मैं दिल्ली दून हाईवे पे निकल ली। अभी लगातार शरारत कर रहा था। कभी वह मेरे गालों को चूमता कभी मेरे गालों को खिंचता। फिर उसने मेरे गोल मटोल चुचियों को दबाने लगा। उसके इस हरकत ने मुझे पागल कर दिया। मैं अंदर ही अंदर मस्त होने लगी। फिर वह पीछे गया और मेरे सीट के पीछे जाकर मेरी गालों और नेक पे किसी करने लगा। वह अक्सर ऐसी बदमाशियां करता था सो मुझे अच्छा भी लगता था। फिर वह मेरी दोनो चुचियों को मसलने लगा। मैं पागल होते जा रही थी। इस दौरान हम बात भी कर रहे थे। लेकिन सिर्फ मैं ही बोल रही थी वह तो बीच बीच मे हां ना में जवाब देता था। फिर वह आगे सीट पर आके बैठ गया और मेरी जांघो को सहलाने लगा। उसकी इस हरकत ने मेरी चुत में 11 हजार वाल्ट का करंट दौड़ा दिया था। चुकी वह काफी देर से ऐसा कर रहा था और उसकी शैतानियों ने मुझमे जोश जगा दिया था। हम अब करीब 50 km दूर जा चुके पता ही नही चला लेकिन मुझे उसकी परवाह नही थी। फिर वह धीरे धीरे नीचे से मेरी लांग स्कर्ट उपर करने लगा। मैं हैरान हो गई। कि आज वह क्या करने वाला है। मैं कोई रोकटोक नही कर रही थी फिर वह मेरा पूरा स्कर्ट ऊपर कर दिया और मेरी जांघो पर हाथ फिराने लगा तो मैं पागल हो गई और उसका हाथ पकड़ के चुत पर रख दी।

दोस्तों मैं जान बुझ के घर से निकलते वक्त ही पैंटी और ब्रा उतार दी थी। और कुर्ती और लांग स्कर्ट में आई थी। अब वह मेरी चुत में उँगली डालने कोशिस करने लगा लेकिन वह नही कर पा रहा था। फिर मेरे से नही रह गया तो मैं बोली अभी आगे आ जाओ। चुकी फॉर्च्यूनर में काफी जगह होती है और अभी दुबला पतला था भी। अभी तो वह जावानी की दहलीज पर कदम ही रखा था। तो अभी उठा और बोला कैसे। तो मैं बोली मेरे पैरों के पास आकर बैठो। वह आ गया और अच्छे से बैठने में थोड़ा दिक्कत हुआ लेकिन वह बैठ गया और मैं ड्राइव किये जा रही थी। दोस्तों मैं उम्मीद नही की थी कि अभी ऐसा कुछ करेगा मैं तो सोची थी वह चुत को सहलाएगा लेकिन उसने अपना मुंह मेरे चुत पर रख दिया। क्या बताऊँ दोस्तों और यही उसकी हरकत मुझे उसके प्रति दीवाना बना दी। क्योंकि इसके भाई और मेरे पति को चुत चाटने में घिन्न आती थी। वह कभी चुत नही चाटता था जबकि मुझे चुत चटवाना बहुत पसंद है।

अभी जोर जोर से मेरी चुत चाटे जा रहा था और मैं ड्राइव कर रही थी। हम करीब 70 km दिल्ली से दूर आ गए थे। अब मुझसे रहा नही जा रहा था। तो मैं तेजी से सोचने लगी कि क्या करूँ। और मैं गाड़ी स्लो कर दी। चुकी हाइवे था इसलिए मुझे समझने में दिक्कत हो रही थी। फिर मैं इधर उधर नजरें दौड़ाने लगी। चुकी इस रास्ते पर मैं अक्सर आती थी क्योंकि दून में मेरा एक ब्रांच था। और कई होटल भी तभी मुझे उस बगीचे का याद आया जिससे लगभग 15 km मैं आगे आ चुकी थी। मैं गाड़ी वही से मोड़ दी। अभी मेरी चुत चाट चाटकर मुझे पूरा पागल कर चुका था।

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