रूबी का महकता जिस्म

रूबी का महकता जिस्म – बहुत से डूबे इस चुत की गहराई में

 

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जंगल में फैले सनते के बिच उसका महल था , अपने शिकार को वह अपने साथ ले आई थी। साडी तो रूबी उतार चुकी थी और बस ब्लाउज में से दिख रहे उसके स्तन उसके हर कदम पर हिले जा रहे थे। मनु ने अपनी पूरी ज़िन्दगी में इतनी खूबसूरत औरत को नहीं देखा था। मनु का गावठी लंड पूरी तरह से खड़ा होचुका था , “तेरी जैसी औरत को चोदने की मेरी औकात नहीं है। लेकिन पता नहीं कैसे आज मुझे मौका मिल रहा है। ”

हस्ते हुए रूबी ने कहा , “औकात तो किसी की नहीं है , लेकिन उसकी वजह से मेरी चुत प्यासी नहीं रेहनी चाहिए ना। ”

“बिलकुल सही , क्या मस्त बात बोली है। अभी दर्शन करवा दो ना। ”

फिर रूबी ने अपना ब्लाउज खोल दिया और उसकी बड़ी और मुलायम चूचिया दुबककर बहार आगई, उसके गुलाबी निप्पल को देख मनु उन्हें चूसने के लिए तड़पने लगा। वह रूबी की तरफ लपका और अपने दोनों हाथो से पकड़कर उसके स्तनों को चूमने लगा। रूबी कराह उठी जैसे ही मनु के लालची सूखे होठ उसके निप्पल से लिपटे। “आह… , चूस अच्छे से। ”

रूबी की गीली चुत की महक पुरे कमरे में फेल चुकी थी , तभी मनु ने अपनी उंगलियों से उसकी गीली चुत को सहलाना शुरू किया। रूबी को बहुत मज़ा आ रहा था , उसने भी अचानक से मनु के लंड को पकड़ लिया। लंड खड़ा था लेकिन बड़ा नहीं था , “अबे साले तेरा लंड तो छोटा सा है। ”

“रूबी बाई आपको पूरा सुख दूंगा में। ”

“हम्म , चल खोल इसको और दाल मेरी चुत के अंदर। ”

फिर मनु से अपनी पंत उतरी और रूबी को लेटकर चोदने लगा , जैसे ही वह झड़ा , रूबी ने उसके गले में अपने दांत गाड़े और उसकी सारी जवानी चूस ली।

मनु की सुखी हुई लाश को रूबी के एक बाशिंदे ने दिलकश बार के पास फेक दिया।

इंस्पेक्टर अजय अपने कांस्टेबल से पूछते हुए , “कौन है ये रूबी ? अब तक जितनी गवई हम लोगो को मिली है सभी का कहना है की दिलकश बार के आसपास इससे देखा गया है। वही कभी कभी धंदे के लिए दिखाई देती है ये। जो एक बार इसके साथ चला गया वह दोबारा कभी ज़िंदा दिखाई नहीं देता। ”

कांस्टेबल पाटिल , “सर , मुझे लगता है की वह इस इलाके की नहीं है। ”

“हम्म , जो कुछ भी हो पाटिल हमे इससे पकड़ना होगा। अब तक चार लोगो को अपना शिकार बना चुकी है और देखो सभी के गले पर वही निशान है। जैसे की किसी नोकीली चीज़ से इनके जिस्म में ज़हर डाला गया हो। ”

“मामला मुझे तो कुछ ज़यादा ही गड़बड़ लगता है अजय सर। ”

“मामला कितना भी गड़बड़ हो पाटिल , में इस case को solve करके रहूँगा। बस अब और लोगो की जान नहीं जाएगी। ”

तो उस रात दिलकश बार के सामने इंस्पेक्टर अजय ने अपने आप को तेहनत रखा। वह भेस बदल कर गए ताकि उन्हें कोई पहचाने नहीं। वहा आनेवाले लोग बहुत ही घटिया किसम के थे। ऐसे लोग जिन्हे आप समाज की गन्दगी कह सकते हो।

मुजरिम के लिए घात लगाए बैठा था इंस्पेक्टर अजय , अचानक किसीने उसे पीछे से आवाज़ दी , “आप जिसकी तलाश कर रहे है , वह ऐसे नहीं मिलेगी आपको। ”

तुरंत अजय पीछे मुड़ा तो उसने एक बुड्ढे आदमी को देखा , “क्या कहा तुमने ? ”

“यहाँ आओ में बताता हु आपको सब कुछ। ”

चलते हुए वह बार से थोड़ी दूर लगाया अजय को जहा उसकी एक छोटी सी झोपड़ी थी। “इस जंगल के पास अकेले रहते हो तुम ?”

“हाँ सालो से। ”

“हम्म… क्या बताने वाले थे बताओ। ”

“आप उस रूबी विष कन्या की तलाश कर रहे हो ना ?”

“विष कन्या ? क्या मतलब है ?”

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“वही रूबी विष कन्या बाबूजी जो अपने बदन की खुशबु और अपने उभरे जिस्म की हवस में नोजवानो को फस्ती है। ”

इंस्पेक्टर अजय को ये अब तक की सबसे काबिल lead लग रही थी इस पुरे case में , उन्होंने बुड्ढे को इस विष कन्या के बारे में और बताने कहा।

“सालो से देख रहा हु साहब उसे में , जब इस बार की जगह एक छोटा सा धाभा था बस। वह एक ऐसी माया है जिसकी चूचिया बड़ी और कमर लचीली है। उसका गोरा जिस्म चमकता है और बिलकुल चिकना है। उसकी चुत हमेशा गीली रहती है , जिसकी खुशबु से वह अपने शिकार को अपनी तरफ आकर्षित करती है। लाल साड़ी में वह आपको नज़र आएगी , उसके गुलाबी होठो के नीचे एक टिल है और बाल उसके काले और घने है जो उसकी गांड के नीचे तक पॅहुचते है। गांड उसकी मटके की तरह गोल है और आखे उसकी साहब बिलकुल अलग , ऐसी जैसी अपने अपनी ज़िन्दगी में कभी नहीं देखि होगी। ”

“ये सब क्या बकवास किये जा रहे हो तुम? कुछ ठीक से पता है तो बताओ।”

“जो सच्चाई है वही बता रहा हु आपको साहब। पर आप की तरह ही मुज बुड्ढे की बात पर कौन विश्वास करता है। सभी मुझे बस पागल समझते है। ”

कुछ पलो के लिए सोचने के बाद अजय ने बुड्ढे की बात पर भरोसा करने का फैसला किया , “ठीक है चल मान लिया की तेरी बात में सचाई है , तू मुझे रूबी तक ले जा सकता है? ”

मुस्कुराते हुए बुड्ढे ने कहा , “हमे उसके पास जाने की ज़रूरत नहीं है। कल वह खुद यहाँ आएगी अपना नया शिकार ढूंढ़ने। ”

“ठीक है , फिर कल देखते है की ये है कौन। ”

अगले दिन इंस्पेक्टर दोबारा भेस बदल कर तेहनत था , बार में लोगो का आना शुरू होगया था। तकरीबन ११:३० के आसपास जब अजय उम्मीद छोड़ चूका था , तब उसने रूबी को देखा।

बार से निकलकर कुछ लोग तुरंत रूबी के पास दौड़ कर गए , “रूबी बाई , रूबी बाई आज मुझे लेकर जाओ अपने साथ। ” इस तरह से सभी चिल्ला रहे थे। अजय वो नज़ारा देख कर हैरान था और तभी बुद्धा अजय के पास आया , “इन सब पर उसकी माया का असर है। ”

अजय ने एक अजीब सी खुशबु सुंगी, “ये खुशबु किसी ?”

“ये उसके जिस्म की खुशबु है जो लोगो को उसकी तरफ आकर्षित करती है। तुम इसको ज़यादा देर तक मत सुंग्ना , वार्ना तुमपर भी असर होने लगेगा। ”

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जैसा उस बुड्ढे ने अजय से कहा था उसी तरह रूबी गज़ब की खूबसूरत थी , वह बिलकुल शांति से वहा आई और अपने साथ एक लड़के को ले गई। अजय ने उन दोनों का जंगल में पीछा किया। जंगल के बीचो बिच पहुचकर अजय ने देखा की वह अपने शिकार को अपने साथ लेकर एक आलीशान घर में गई। अजय चुपके से खिड़की से झाकते हुए देख रहा था घर के भीतर। वह जवान लड़का बहुत ही उत्तेजित था और अपने कपडे उतार रहा था , रूबी एक कमरे के भीतर गई और अपनी साड़ी खोलकर बस bra और panty पहनकर बहार आई।

उसका bra पूरी तरह से कसा हुआ था और panty पर गीले दाग साफ़ नज़र आ रहे थे। उसकी चुत का पानी काफी ज़ायदा बह रहा था क्युकी वह भी काफी उत्तेजित थी इस लड़के के साथ चुदाई करने के लिए।

अब तक तो अजय को किसी जुर्म के होने की उम्मीद नहीं थी , लेकिन रूबी की जवानी और खूबसूरती देख कर अजय का भी लंड खड़ा हो चूका था। किसी तरह से अजय भूलता जा रहा था की उसके वहा होने का मकसद क्या था।

रूबी उस नौजवान का लंड चूस रही थी और वह रूबी के बड़े बड़े मुम्मो को दबा रहा था जो अब भी bra के अंदर थे। “रूबी जी अपने बुब्बो का दर्शन करवादो। ”

“अच्छा इतनी बेताबी ?” मुस्कुराते हुए रूबी ने उस नौजवान से पूछा और फिर अपना bra खोल दिया। जिस तरह पेशाब करने कोई औरत बैठती है , रूबी उसी तरह से बैठकर उसका लंड चूसे जा रही थी।

लड़के ने रूबी को लेटा दिया और उसके बुब्बो को चूसने लगा , वह रूबी की चुत पर अपनी ऊँगली मसल रहा था और रूबी कराह रही थी। “आह उफ़…” फिर लड़के ने रूबी की panty को हलके से खिसकाया और अपनी ऊँगली उसकी चुत में डाली। रूबी की चीख निकल आई , “आह…”

बुब्बो को चूसते हुए और ऊँगली से चुत को चोदते हुए लड़का रूबी को बहुत मज़े दे रहा था। फिर उस लड़के ने रूबी की टैंगो को और फैलाया और panty निकालकर रूबी के पेरो के बिच आगया। उसने अपना लंड रूबी की गीली चुत के अंदर डाला और फिर रूबी की चुदाई शुरू करदी।

“मज़ा आ रहा है आपको ?”

“अच्छे से चोद तू मुझे , पूरा मज़ा दे। ”

लड़का जोर जोर से झटके मार रहा था। चुदाई और रूबी का नंगा जिस्म देखकर अजय पूरी तरह से हवस से भर चूका था , उसका मन रूबी को चोदने का था और वह बस यही सोच रहा था की कैसे।

अजय अपना लंड हिलाने लगा और वहा वह नौजवान रूबी की चुत के अंदर झड़ गया। जैसे ही ये हुआ तो रूबी ने अपने दातो को उसके गले के अंदर गदया और उसकी जवानी को पूरी तरह चूस लिया।

लड़का एक सुखी लाश बन गया था अजय की आखो के सामने। लेकिन अजय को इस जुर्म का एहसास नहीं था। अजय तो अब पूरी तरह से रूबी के काबू में था और उसने महल का दरवाजा खटखटाया।

रूबी ने दरवाजा खोला और अजय को देख कहा , “इस्पेक्टर , काफी दिनों से तलाश कर रहे है आप मेरी। ”

रूबी ने बस एक हल्का कपडा ओड रखा था अपने जिस्म पर , वह पूरी नंगी थी , अजय ने कहा , “हम्म काफी दिनों से तलाश थी तुम्हारी रूबी बाई। जो उस लड़के को करने दिया वो मुझे भी करना है तुम्हारे साथ। ”

“तो बस फिर चले आओ अंदर मेरे गरीब खाने में। ”

जैसे ही इंस्पेक्टर अंदर गया दोनों की चुम्मा चाती शुरू होगई और अजय ने रूबी के जिस्म पर से कपडा हटा दिया और उसके बुब्बे दबाते हुए उससे चूमता रहा। रूबी pant के अंदर इंस्पेक्टर के खड़े लंड को महसूस कर रही थी , “हम्म बड़ा और मोटा है आपका इंस्पेक्टर। ”

फिर रूबी ने इंस्पेक्टर के लंड को अपने हाथ से बहार निकाला और झुकार चूसने लगी। अजय अपनी आखे बंद करके चुसाई के मज़े ले रहा था।

रूबी ने अजय से कहा , “में चाहती हु की तुम मेरी चुत नहीं बल्कि मेरी गांड मारो। ”

“जैसा तुम चाहो रूबी बाई। ” फिर रूबी घोड़ी बनगई और अजय ने अपना मोटा लंड रूबी के गांड के छेद में डाला और जम कर रूबी की गांड मारी। रूबी ज़ोर ज़ोर से चीख रही थी ऐसा मोटा लंड अंदर लेने के कारन।

अजय ने बहुत अच्छे से रूबी की गांड को चोदा और फिर वह झड़ने वाला था तो उसने अपना लंड बहार निकाला और वह रुक गया।

“अरे क्या हुआ इंस्पेक्टर , रुक क्यों गए कितना मज़ा आ रहा था। ”

“अगर में झड़ गया तो तुम मुझे भी मार डालोगी ?”

“हाँ , जो मुझे चोदता है इंस्पेक्टर में उसकी जवानी चूसलेती हु। ये कीमत तो सभी को अदा करनी पड़ती है मेरे जिस्म के लिए। ”

“लेकिन में मरना नहीं चाहता रूबी बाई। ”

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“अरे इंस्पेक्टर होकर मोत से इतना डरते हो? में मरना तुम्हारे लिए आसान कर दूंगी। ”

अजय का लंड अबतक झडा नहीं था इसीलिए रूबी उससे मार नहीं सकती थी। वह अपनी चुत फैलाकर लेट गई और अजय को लुभाने लगी की वह उसे चोदे। अजय अपने आप से लड़ता रहा लेकिन रूबी की चुत की महक का मुकाबला नहीं कर पाया वह और उसने रूबी की चुत मारी और चुत के अंदर झड़ गया। जैसे ही अजय झडा रूबी ने अपने दातो को गड़ा कर उसकी जवानी को चूस लिया।

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