हवस की जीत

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घर में हुई हवस की जीत

नमस्ते दोस्तो! मेरा नाम तारा है। में उन्नीस साल की हूँ। पिछले महीने मेने मेरे बॉयफ्रेंड के साथ भाग कर शादी की। में आज आपसे वो किस्सा शेयर करना चाहती हूँ जब मैने और मेरे बॉयफ्रेंड ने मेरे घर पर ही सेक्स किया था। मेरे पापा बहुत ही सख्त स्वभाव के है और उन्होंने मुझ पर कई पाबंदियां लगाई थी मगर अंत मे हवस की ही जीत हुई। कैसे? जानने के लिए आगे पढ़िए।

दरसल में एक मिडिल क्लास घर से हूँ। मेरे पापा और मेरी माँ, दोनो स्वाभाविक तौर पर बहुत ही अलग थे। इसी वजह से घर मे हमेशा छोटे मोटे झगड़े चलते रहते थे। मेरी माँ कुछ बातों के मामले में नासमझ है। उसे कब क्या बात करनी चाहिए ये सब समझता ही नही था। और वही पापा, हर छोटी चीज पर नजर रखते थे। उन्हें मेरी किसी लड़के के साथ दोस्ती बिल्कुल बरदाश्त नही होती थी। मगर मेरी माँ, मेरे हर दोस्त को अपना जमाई बनाने की बातें करती थी।

यही कारण है कि आज तक मेरे कई बोयफ़्रेंडस रह चुके है। और यही कारण है कि हर बार पकड़े जाने पर पापा ने मुझे बहुत पीटा है। इस सब के कारण मेरी जिंदगी बर्बाद हो गयी मगर मेने मजे भी खूब किये। उन्ही में से ये एक मजेदार किस्सा है। बात दो साल पहले की है।

मेरे क्लास में केशव नाम का एक लड़का था। हम दोनों का एक ही फ्रेंड सर्कल था। एक बार हम सब बाहर घूमने गए थे। तब केशव ने मुझे सबके सामने प्रोपोज़ कर दिया। वो भी मेरे सामने घुटने टेक कर, गुलाब का फूल दे कर। मुझे वो पसंद तो था मगर में फिरसे पापा की डांट नही खाना चाहती थी। इस लिए मेने उसे मना कर दिया था।

केशव बहुत सेक्सी था। उसे मना कर देने के बाद मुझे बार बार अफसोस हो रहा था। में जब भी अपनी रूम में अकेली होती थी तब मैं केशव की याद में अपने आप को खूब सहलाती थी। मेरी चुत अक्सर उसको याद करने से ही गीली हो जाती थी। अगर मेने उसे ‘हाँ’ कह दिया होता तो आज मेरी चुत में मेरे हाथ के जगह उसका लंड होता।

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इस सब के बारे में मैने बहुत सोचा मगर पापा की चेतावनी याद करते ही में कमजोर पड़ जाती थी। उन्हीने कहा था “तारा! अगली बार अगर किसी लड़के के साथ पकड़ी गई तो मार मार कर दोनों की शक्ल बिगाड़ दूंगा…”

एक दिन मेरी माँ ने मेरे फ़ोन में कुछ फोटो देखी। उसमे वो फ़ोटो भी थी जब केशव ने मुझे प्रोपोज़ किया था। उसने तुरंत मुझे उसके बारे में पूछ लिया। मेने उसे बताया कि में केशव को मना कर चुकी हो। मगर उसका मेरी बातों पर ध्यान ही नही था। उसने मुझे कहा “तारा, तू इतने अच्छे लड़के को हाथ से जाने नही दे सकती। मेरी बात मान इसे ‘हाँ’ बोल दे। पापा को में संभाल लुंगी।” उसने मुझे बहुत मनाया और में भी यही चाहती थी। तो में मान गयी। अगले दिन माँ ने केशव को घर बुलाने को बोला।

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उस दिन पापा हमेशा की तरह काम पर थे। माँ के कहने पर मैने केशव को कॉल लगाया। उसे कहा “केशव, तुमसे कुछ बात करनी थी। आज घर आ सकते हो? उसे घर आने में जिझक हो रही थी शायद। उसने कहा “घर मे? कही बाहर मिलते है ना।” मेने कहा “नही। घर पे ही आना पड़ेगा।” तो जसने कहा “अच्छा! ऐसा क्या काम है जो घर मे ही कर सकते है? इरादा ठीक नही लग रहा मुझे तुम्हारा…”

में : “मजाक मत करो! बस आ जाओ। माँ मिलना चाहती है तुमसे। वजह मुझे भी नही पता।”

केशव : “क्या! माँ क्यूँ? मेरी शिकायत की तुमने?”

में : “अरे…”

केशव : “देखो में प्यार करता हूँ तुमसे। मगर तंग नही करूँगा। उसके लिए माँ से मिलवाने की जरूरत नही है।”

में : “नही बबा। वो बात नही है। तुम आओगे या नही?”

केशव : “ठीक है आता हूँ…”

मेने माँ को बता दिया कि वो आ रहा है। माँ ने हम दोनों के लिए खास खाना बनाया। में तैयार होने के लिए अपने रूम में गयी तो बेड पर माँ ने मेरा नया सलवार कमीज निकाल कर रखा था। और साथ ही नई ब्रा और पैंटी भी रखी थी। मुझे है थोड़ा अजीब लगा पर मैने सोचा लायी होगी उसने नए ड्रेस के साथ। मेने वो ब्रा और पैंटी पहन कर शीशे में अपने आप को देखा। इसमें में बहुत ही हॉट लग रही थी। मेने सोचा काश केशव मुझे इन कपड़ों में देखता। फिर मेने सलवार कमीज पहनी और तैयार हो गई।

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केशव घर आया। मेने उसे माँ से मिलाया। खाने का वक्त हुआ था तो हम तुरंत खाना खाने बैठ गए। माँ केशव से बात करने लगी। माँ ने कहा “तारा बता रही थी कि तुम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हो…तो मैने सोचा एक बार तुमसे मिल लूँ।” ये सुनते ही केशव के हाथ से निवाला गिर गया और वो मेरी तरफ देखने लगा। में बस शर्मा के नीचे देखने लगी। फिर आगे हम सब ने इधर उधर की बहुत बातें की। प्यार वाली बात के बाद से केशव का मूड एकदम खुश हो गया था। माँ ने एक ही झटके में हम दोनों की सेटिंग करा दी। फिर मुझे माँ ने अंदर पानी लाने के लिए भेजा।

में किचन में गयी तो पीछे माँ भी आयी। उसने कहा “इतना अच्छा ड्रेस दिया था मेने। ठीक से नही पहन सकती थी?” और माँ ने मेरे ड्रेस का एक बटन खोल दिया। मेरा क्लीवेज दिख रहा था। “देख अब कितनी हॉट लग रही है…” माँ ने कहा। फिर हम दोनों बाहर आकर बैठे। खाना हो गया था।

थोड़ी देर बाद कुछ बहाना बना कर माँ कही बाहर चली गयी। मुझे उसने इस बारे में नही बताया था। तो मुझे भी कुछ समझ नही आया। शायद वो चाहती थी कि में और केशव कुछ वक्त एक दूसरे के साथ बिताए। माँ के जाने पर केशव थोड़ा खुल कर बात करने लगा। मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपने पास बिठा लिया और कहने लगा “तो तुम्हारे होठों पर कुछ और था और दिल मे कुछ और?” में बस मुस्काई। वो मेरे और करीब आया। उसकी सांसे मेरे होठों को छू रही। फिर हम ने एक दूसरे को किस कर लिया।

वो मुझे किस करता ही जा रहा था। और मुझे पसंद भी आ रहा था। उसने एक हाथ मेरी गर्दन पर रखा था और दूसरा हाथ मेरी कमर पर। वो अपने हाथ को मेरी पीठ पर धीरे धीरे घुमाने लगा। मुझे बेचैनिन हो रही थी। वो अपने हाथ को मेरे सीने तक लाया। और मेरी चूचीयों पर घूमने लगा। मेरी चुत अब मचलने लगी थी। वो फिर मेरी गर्दन चूमने लगा। उसने एक हाथ से मेरे ड्रेस का दूसरा बटन भी खोल दिया और अंदर हाथ डालने लगा। मुझे और कंट्रोल नही हो रहा था।

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मेने उसका हाथ मेरे हाथ मे लिया और अपनी सलवार में नीचे से डाला। उसने अपना दूसरा हाथ भी अंदर डाला और मेरा टॉप उतार दिया। उसने मेरी ब्रा को एक साइड से नीचे किया और मेरी एक चूची को चूमने लगा। मे उसके बालों में हाथ डाल कर बैठी रही। उसने और कुछ देर मेरी चुचियों को चूमा। मेने उससे कहा “बैडरूम में चले?” फिर हम दोनों तुरंत उठे। बैडरूम की ओर चलते चलते मेने उसकी शर्ट उतार दी।

बैडरूम का दरवाजा अंदर से लगा लिया। उसने मुझे पकड़ कर दीवार से लगाया और मुझे पूरी शिद्दत से हर जगह चूमने लगा। मेने ब्रा अभी भी पहनी हुई थी। हम दोनों एक दूसरे को पागलों की तरह चुम रहे थे। उसने फिर मेरी पैंट का नाडा खोल दिया और मेरी पैंट पूरी उतर गयी। मेने सोचा अच्छा हुआ माँ ने आज ही ये सेक्सी ब्रा और पैंटी मुझे दिलाई। केशव ने फिर अपनी जीन्स उतार फेंकी और मुझे आकर पूरा चिपक गया। मेरी पीछे दीवार औऱ आगे केशव। उसके गर्म सीने को वो मेरी चुचियों पर दबा रहा था। औऱ उसका लंड मेरी पैंटी पर।

मेंरी सांसे तेज होने लगी थी और चुत गीली। मेने उसे ढकेला और बेड पे लिटा दिया। अब में उसके ऊपर लेट गयी थी। उसने अपने हाथ मेरी गांड पर रखे। और धीरे से मेरी पैंटी उतार दी। मे घूँटनों के बल बैठी और अपनी कमर उठायी। केशव लेटे लेटे मेरी चुत पर उंगली घुमाने लगा। मुझे मजा आ रहा था। आगे वो क्या करेगा ये सोच कर में अपने होठ चबाने लगी।

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उसने फिर अपनी उंगली मेरी चुत में गुसाईं और मेरी सारी हवस जगा दी। में अब सही मायने में चुदाई के लिए तैयार थी। उसने अपनी अंडरवेअर निकाली औऱ मुझे अपने लंड पर बिठाया। मुझे तुरंत चरम सुख मिला। वो मुझे चोदने लगा और मेंरी आवाजे निकलने लगी…

ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…

सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. आहहहहहहहहहहहहहहहहह……

चोदो….उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह… आहहहहहहहहहहहहहहहहह…ओहहहहहहह हहहहहहह…… आह हहहहहहहहहहहहह….चोदो मेरी चुत।… आआआहहहहहहह और जोर से..जोर से ओह मेरे हीरो आआआहहहहहहह

आहहहहहहहहहहहहहहहहह…ओहहहहहहह हहहहहहह…… आह हहहहहहहहहहहहह…..

चोदो मेरी चुत।…तबाह कर दो मेरी चुत को…

आआआहहहहहहह जोर से..। आहहहहहहहहहहहहहहहहह…ओहहहहहहह हहहहहहह…… आह हहहहहहहहहहहहह…..

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मेने अपनी ब्रा का हुक खोला और उसके मूह पर फेंकी। में अपनी चुचियाँ अपने हाथ से दबाने लगी। उसने अपनी आँखों पर से मेरी ब्रा हटायी और वो उठने लगा। उसने मुझे बेड पर लिटाया और मुझे चोदता रहा। इस पोजीशन में मुझे और मजा आ रहा था। मेरी आवाज सुनने के लिए घर मे अब सिर्फ केशव ही था।

आहहहहहहहहहहहहहहहहह…

ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…

सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. आहहहहहहहहहहहहहहहहह……

उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह… आहहहहहहहहहहहहहहहहह…ओहहहहहहह हहहहहहह……

जानवर बन जाओ!!! ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…

सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. केशव मेरी जान….

सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. आहहहहहहहहहहहहहहहहह……

मेरी आवाजे सुन कर केशव का जोश बढ़ रहा था। वो बहुत देर तक मुझे चोदता रहा। मुझे उसने बहुत खुश किया था मगर में अभी संतुष्ट नही हुई थी। हम थोड़ी देर के लिए वैसे ही लेटे रहे। वक मेरा हाथ अपने हाथ मे लेकर बेठा था। में फिर एक बार अपनी चुदाई करवाना चाहती थी।

में उठ गयी और उसके मुह पर चुत रख कर बैठ गयी। उसने मेरी चुत को चूमा और फिर चाटने लगा। और यही तो में चाहती थी। वो उठाना चाहता था तो में सरक गयी। वो बेठा और उसने मेरी टांगों के बीच अपना मुह डाला। अब वो पूरी शिद्दत से मेरी चुत में अपनी जीभ घुमा रहा था। में भी उसे खुश करना चाहती थी।

मेने उसका लंड हाथ मे ले लिया और हिलाने लगी। उसने अपनी आँखें बंद कर ली थी। मेने उसे लंड को मुह में ले लिया और उसे ब्लोवजोब दिया। केशव की आहे बता रही थी कि उसे मजा आ रहा था…

ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…

सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. आहहहहहहहहहहहहहहहहह……

मेने उसका लंड मुह से निकला और अपनी चुत पर रगड़ने लगी। वो उठा और उसने फिर से अपना लंड मेरी चुत के अंदर डाल कर मेरी चुदाई शुरू की। इस बार फिर उसने मुझे खूब चोदा और अलग अलग स्टाइल में चोदा। उसने अब मुझे एकदम संतुष्ट कर दिया था। कुछ देर बाद हम दोनों साथ ही झड़ गए।

थोड़ी देर सोये रहे। और फिर बाथरूम जा कर फ्रेश हो लिए। हम दोनों ने कपड़े पहन लिए। पापा को आने में अभी वक्त था। मगर में कोई रिस्क नही लेना चाहती थी। मेने केशव के लिए चाय बनाई और फिर उसे उसके घर भेज दिया। कुछ देर बाद माँ आयी। वो भी खुश दिख रही थी, नजाने कहा गयी थी।

शाम को पापा आये और उन्हें किसी भी बात की भनक नही लगी। तो एक थी दोस्तों मेरी घर मे सेक्स की कहानी, वो भी इतने सख्त स्वभाव वाले पिता होने के बावजूद। अगर ये कहानी पढ़ कर आपको मजा आया तो लाइक और कमेंट जरूर करे।

ऐसी कयामत भरी चुदास कहानी पढ़ने के लिए https://nightqueenstories.com पर बने रहना। हम आपको पूरा यकीन दिलाते हैं आपकी पसंद की हर कहानियां लेकर आएंगे। और चुत औऱ लन्ड की गर्मी शांत करते रहेंगे

मेरी अगली कहानी का शीर्षक है “मालकिन की प्यासी चुत“|

धन्यवाद।

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