सेक्सी Seema

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शादीशुदा बॉयफ्रेंड और सेक्सी सीमा

नमस्ते दोस्तो! मेरा नाम सीमा है। आज मुझे आपसे मेरा सबसे पसंदीदा अनुभव शेयर करना चाहती हूँ। ये बात तब की है जब मेरे गली के एक दोस्त ने मेरी चुदाई की थी, वो भी उसके दुकान में!

दरसल मेरी गली में मेरी ज्यादा लोगों से दोस्ती नही थी। वहा पर हम हालही में रहने के लिए आये थे। हमारे घर के ठीक नीचे वाली मंजिल पर एक कपड़ों का छोटा दुकान था। वो दुकानवाला एक लड़का था। उसकी उम्र लगभग 24 साल थी और नाम था सूरज।

जब हम यहा रहने आये तब वो दुकान बंद थी। वो छुट्टी पर था शायद। 2-3 दिन बाद उसने दुकान खोलनी चालू की थी। हम अगर कही बाहर जा रहे हो तो हमारे घर की चाबी हम उसके दुकान में रख के जाते थे। तो अब थोड़ी जान पहचान हो गयी थी। आते जाते कभी कबार थोड़ी बातें भी हुआ करती थी।

हम रोज एक दूसरे को देखते थे। जैसे वो देखता था ऐसा लग रहा था की वो मुझे पसंद करता है। पर मैने कभी उसको कोई हिंट नही दी। उसको मेरे आने जाने का टाइम भी पता था। जब भी मैं वहासे गुजरती वो काम छोड़ कर मुझे ही देखता रहता। अब लगने लगा था की आज नई तो कल ये मुझे प्रोपोज़ कर देगा। और में भी यही चाहती थी, क्यूंकि मुझे भी वो अच्छा लगने लगा था। दिखने में भी अच्छा था, जिमिंग भी करता था और मुझे पसंद था।

उसी दौरान एक दिन मुझे माँ से पता चला कि सूरज की शादी हो गयी। ये सुनकर में चौंक गयी थी। वैसे तो हम दोनों में कुछ नही था, मगर कुछ हो सकता था। जो अब नही होनेवाला था। ऐसे कैसे उसकी शादी हो गयी! लव मैरिज थी या अर्रेंज्ड मैरिज? अगर शादी तय हुई थी तो ये मुझसे क्यूं फ़्लर्ट करता था? मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था और साथ ही दुख भी हो रहा था।

माँ ने बताया कि सूरज के घर दुल्हन की मुह दिखाई के कार्यक्रम में जाना है। मुझे जाने का मन नही था। फिर भी में तैयार हो गयी। हमने कपड़े बदल लिए। और उसके घर चले गए। उनका घर ज्यादा बड़ा नही था और इस वक्त औरतों से भरा हुआ था। मेने और मेरी माँ ने हॉल का एक कोना पकड़ा और बैठ गए।

थोड़ी देर बाद दुल्हन को लाया गया। वो बीच मे बैठ गयी। मगर सूरज कही दिख नही रहा था। किसी ने दुल्हन के हाथ मे हल्दी-कुमकुम दिया और सारी औरतों को लगाने के लिए भेजा। उसने मेरी माँ को कुमकुम लगाया और मुझे लगाने के लिए झुकी। तभी किसीने पीछे से बोला “अरे उसको मत लगाओ। शादी नही हुई अभी उसकी।” वो सूरज था। उसे देख मुझे फिर गुस्सा आ रहा था। मुह दिखायी केबाद हम घर चले आये।

उसके बाद एक हफ्ते तक सूरज की दुकान बंद ही थी। फिर एक दिन उसने दुकान खोली। में दोस्त के पास जा रही थी। मेने देखा तो वो अभी भी मुझे देख रहा था। मेंने उसकी ओर गुस्से से देखा और वहासे चली गयी। जब में वापिस आयी तब वो बाहर खड़ा था। मुझे देख कर बोला “क्या हुआ सीमा। ऐसा मुह बना के क्यूं घूम रही हो?” तो मैने बोला “तुमसे मतलब?!” उसने बोला “अरे ऐसे कैसे! हमसे गुस्सा हो तो बताओ हमे। किया क्या है हमने?” तो मैने कहा “तुम्हे क्या करना है लेकिन? अब शादी हो गयी ना। तो जाओ अपनी बीबी से बात करो…” तो वो शांत हुआ और फिर मुस्काते हुए बोला “अच्छा! मतलब आग दोनो तरफ से लगी थी”

में कुछ समझी नही। उसने बताया “अरे में ये शादी करना नही चाहती थी। लेकिन तुम मुझे भाव ही नही देती थी तो मैने हाँ बोल दिया शादी को” में कुछ बोल नही पा रही थी। वो सच ही तो कह रहा था। उसने पास आ कर कान में बोला “मगर सीमा, मेरे दिल मे अभी भी तुम ही हो…” मेने उसकी ओर देखा और बोला “तुम्हारी शादी हो गयी है!!!! तुम पागल हो गए हो?” तो उसने कहा “देखो सीमा, मेरी शादी से मुझे दिक्कत नही है तो तुम्हे क्या दिक्कत है। हम दोनों एक दूसरे को चाहते है तो जरूरी नही है कि हम शादी ही करे। जब तक तुम यहा हो, में नही चाहता कि मेरी शादी हम दोनों के बीच आये” में कुछ समझ नही पा रही थी तो में वहासे चली गयी।

घर जाने पर मेंने बहुत सोचा। मुझे रात को नींद नही आ रही थी। सूरज ने जो कहा वो सच था। हम दोनों एक दूसरे को चाहते थे। और ये भी सच था कि उसकी शादी हो चुकी थी। लेकिन मेरा ध्यान इस बात पर था कि सूरज सचमें मुझे पसंद करता था और आज भी पसंद करता है। उसने कहा था ‘आग दोनों तरफ से लगी हुई है!’ ये बात सोच सोच कर ही मुझे शर्म आ रही थी। मेने सोचा की सचमे अगर सूरज को कोई दिक्कत नही है तो मुझे भी कोई दिक्कत नही होनी चाहीये उसकी शादी से।

मेने उस रात सूरज को सोचते सोचते अपने आप को खूब सहलाया। उसने जब कान में वो बात बोली थी, तो उसकी सास का मेरे कान को स्पर्श हुआ था। वो स्पर्श याद करके मेरे पूरे बदन पर रोंगटे खड़े हो गए थे। मेने अपनी रूम का दरवाजा बंद कर लिया और स्लो म्यूजिक चला लिया। मेंने गाने के ताल पर नाचते नाचते अपने आधे कपड़े निकाल फेके। और बेड पर लेट गई। अपनी ब्रा से मेरी चुचियाँ बाहर निकाल कर उन्हें सहलाने लगी। और अनजाने में ही मेरा हाथ मेरे पैंटी में डाल दिया। मेरी चुत को धीरे धीरे सहलाने लगी। मे चरम सुख के करीब ही थी। मेने जोर जोर सेहलाना शुरू किया और अपने चुत की गर्मी शांत की। उस रात में बड़े चैन और सुकून के साथ सोई।

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अगले दिन मे, माँ और पापा बाहर जानेवाले थे। एक रिश्तेदार से मिलने जाना था। हम जाने के लिए तैयार हो गए। नजाने मेरे दिमाग मे क्या आया की मेरा मन बदल गया। मेने पापा से कह दिया “में साथ नही आना चाहती उनके घर। आप दोनों ही चले जाओ ना प्लीज” तो माँ ने कहा “अकेले क्या करोगी मगर घर मे। बोर हो जाओगी।” तो मैने बोला “नही नही। उनके घर से तो कम ही बोर होगा। में रुकती हूँ घर मे। टीव्ही देख लुंगी।” वो दोनों मान गए।

मेने सोचा थोड़ी देर बाद सूरज को ऊपर घर मे बुला लुंगी। मगर समझ नही आ रहा था कैसे बुलाऊ और क्या बोलू। मेने अपना एक सेक्सी गाउन पहन लिया जो घुटने तक आता था। और नीचे सैंडल पहन लिया। अपने बाल सवारे और नीचे चली आयी। दुकान में वो अकेला बेठा था। हमेशा उसका दोस्त उसके साथ बेठा करता था मगर आज वो नही था। में दुकान के दरवाजे में खड़ी हो गयी। उसका अपने मोबाइल में था। तो मेने झूठमुठ ही खास ने की आवाज निकाली। वो चौंक कर खड़ा हो गया। सामने में थी। तो बोला “अरे तुम! आओ ना बैठो। बोलो क्या खरीदने आयी हो?” में सामने स्टूल पर बैठ गयी। मेने बोला “तुम कितने में मिलोगे?” तो उसने कहा “में पांच मिनट में मिलूंगा” ये सुन कर में हस पड़ी।

तभी एक औरत अपने बच्चे को लेकर दुकान में आयी। उसको शर्ट खरिदना था। तो सूरज ने मुझे बैठे रहने को बोला। वो शर्ट्स निकाल रहा था, तब में टेबल के दूसरी ओर सूरज के बगल वाले स्टूल पर जाके बैठ गयी। वो सामने कपड़े दिखा रहा था। दस-पंधरा मिनिट हो गए, लेकिन उस औरत को कुछ पसंद ही नही आ रहा था। मुझसे और इंतजार नही हो रहा था।

मेंरा मुड चुदासी हो रहा था। में चाहती थी कि सूरज उस औरत को जल्दी से भगा दे। तो मैने अपना पैर आगे किया और सूरज के पैर पर घुमाने लगी। उसने नीचे शॉर्ट्स पहनी थी। मेने अपने अंगूठे के नाखून से उसके पैर पर निशान खींचा। उसे गुदगुदी हो रही थी या शायद कुछ और हो रहा था। उसने मुझे इशारे कर के रुकने को बोला। मे आगे सरक गयी और पैर का निचला हिस्सा उसके पैर पर घिसने लगी। उसकी शक्ल देख कर मुझे बड़ा मजा आ रहा था। में उसे और छेड़ना चाहती थी। मेने अपना गाउन नीचे से उठाया और अपने घुटने के ऊपर सरका कर रखा। और में मेरी एक टांग दूसरे टांग पर रख के बैठी गई। उसने पीछे मुड़ कर देखा तो उसे मेरी एक टांग पूरी नंगी दिखाई दी।

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उसने अगले दो मिनट में उस औरत को बिना कुछ बेचे ही भगा दिया। उसने दुकान का शटर भी जल्दी से बंद कर दिया। वो मेरे पास आया तो में खड़ी हो गयी। मेने उसके चेहरे पे हाथ घुमाया। उसने मेरा वही हाथ पकड़ा और चुम लिया। में उसके और करीब चली गई। हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे। उसने नीचे से मेरा गाउन उठाया और मेरे पैर पर अपने हाथ से रेंगते रेंगते कमर तक पहुँच गया। मेरी चुत मचलने लगी थी। मेने उसका शर्ट उतार दिया। उसने अपना दूसरा हाथ भी निचे से कमर तक लाया और दोनों हाथों से मेरा गाउन पूरा उठा के निकाल दिया।

मेने अब बस ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी। मेंने कहा “शादी किसी और से…सुहागरात किसी और से?” तो उसने कहा “चाहे तो सजा दे दो। तुम्हारे सामने हूँ।” मेने कहा, ” सजा तो मिलेगी।” में जाके टेबल पर बैठ गयी और बोली “अपने कपड़े उत्तरों और उस स्टूल पर बैठ जाओ।” तो उसने “स्टूल पर क्यूं?” तो मैने कहा “शहह! करो…” उसने अपनी जीन्स उतारी। और फिर अंडरपैंट भी उतारी। फिर मैंने उसके हाथ पीछे ले कर बांध दिए। और उसकी गोद मे जाके बैठ गयी।

उसने कहा “देखो सीमा, में कंट्रोल नही कर पाऊंगा। हाथ खोल दो मेरे।” मेने कहा “अच्छा! इतनी जल्दी है क्या…”

में बैठे बैठे अपनी पैंटी उसकी लंड पर रगड़ने लगी। अपनी बाहे उसके गले मे डाल कर मेने उसे किस किया। फिर मेने अपनी ब्रा नीचे की और अपनी चुचियों को उसे मुह पर लगाया। वो मेरी निपल्स को किस करने लगा तो में उठ के दूर हो गयी। और वो कुछ नही कर सका। मुझे उसे तड़पाने में बड़ा मजा आ रहा था। मेने फिर अपनी पैंटी भी उतार दी।

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में फिर से टेबल पर बैठी और अपनी टांगे फैला कर अपनी चुत को सहलाने लगी। वो अपने स्टूल से उठ कर मेरे पास आया और मेरे सामने नीचे घुटनों पर बैठ गया। वो अब मेरी टांगों के बीच अपना मुह डाल कर मेरी चुत चाटने लगा। मेने उसके सिर को पकड़ा और मेरी चुत को उसके हवाले कर दिया। वो मेरी चुत को चाटता रहा और मुझे मजा देता रहा। उस बंद दुकान के अंदर मेरी आवाजे निकल रही थी…

ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…

सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. आहहहहहहहहहहहहहहहहह……

सूरज!!!…

उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह… आहहहहहहहहहहहहहहहहह…ओहहहहहहह हहहहहहह…… आह हहहहहहहहहहहहह….. चाटो मेरी चुत।… आआआहहहहहहह और जोर से..जोर से ओह मेरे हीरो आआआहहहहहहह

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मेरी आवाज से सूरज जोश में आ गया था। वो चाहता कि में उसके हाथ खोलू। और अब मेरी चुत को भी उसके लंड की जरूरत थी। तो मैने उसके हाथ खोल दिये। हाथ खोलते ही उसने मेरे हाथ पकड़ लिए और एक ही दम में अपना पूरा लंड मेरी चुत के अंदर डाल दिया। मेरी जोरदार चीख निकली।

सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. आहहहहहहहहहहहहहहहहह……

ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह… आहहहहहहहहहहहहहहहहह…ओहहहहहहह हहहहहहह…… आहहहहहहहहहहहहहह…..

में इतनी जोर से चींख रही थी कि उस वक्त अगर बाहर से कोई गुजर रहा हो तो उसे पक्का सुनाई दी होगी। मगर हम दोनों को बिल्कुल होश नही था। उसने अगले एक घंटे तक मुझे खूब चोदा, जमीन पर भी और टेबल पर भी। मुझे इतना संतुष्ट किया कि में सोचने लगी ‘काश मेने उसके प्रोपोज़ करने का इंतजार नही किया होता…और खुद ही हिंट दी होती!”

फिर कुछ देर बाद हमने कपड़े ठीक कर लिए। बाल वगेरा ठीक कर लिए और दुकान का शटर खोल दिया। शाम होने को आयी थी तो में उसे बोल कर अपने घर चली गयी। मेने घर जाके मस्त शॉवर किया और सो गयी। इसके बाद कई महीनों तक हमारा अफेयर चलता रहा। जब तक हम वहा रह रहे थे।

तो एक थी दोस्तों मेरी दुकान मे सेक्स की कहानी, वो भी मेरे शादीशुदा बॉयफ्रेंड के साथ। अगर ये कहानी पढ़ कर आपको मजा आया तो लाइक और कमेंट जरूर करे।

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मेरी अगली कहानी का शीर्षक हैवाशरूम में हवस की रासलीला

धन्यवाद।

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