रानी दी अपनी मलाईदार चुत के साथ माँ को भी चुदवा दी- भाग 1

हेलो दोस्तों, मेरा नाम विक्की है और आज मैं 24 साल का हो गया। मैं भोपाल में रहता हूँ। मैं अनाथ था, लेकिन मेरी किस्मत अच्छी है कि मुझे शालिनी और सुमित ने गोद ले लिया था। मतलब शालिनी और सुमित ही मेरे मॉम डैड हैं। वे मुझसे बहुत प्यार करते है  और मैं भी अपने मम्मी-पापा से बहुत प्यार करता हूँ।  मेरे माँ पापा के सिर्फ एक लड़की थी इसलिए उन्होंने मुझे गोद लिया था। अब मेरी पूरी दुनिया इन्ही तीनों लोगों और परिवारों में है।

 

 

माँ और दी दोनों के मलाईदार चुत को चोदकर रसमलाई बनाया

 

तो हां आपको बता दूं मेरी दीदी मुझसे 7 साल बड़ी है। मेरी दीदी का नाम रानी है। जैसा कि नाम है रानी। वो सच मे रानी ही है। दूध से सफेद बदन, भरा हुआ शरीर जिसमे 36 की सुडौल कड़क चुचियाँ। 28 की कमर और गांड तो पूछो मत 38 से भी ज्यादा की दीदी की गांड किसी साँचे में ढली हुई है। दोनों चूतड़ों के बीच की दरार देखकर सन्यासी का भी लंड फुँफकारने लगे।

 

डैड का बिजनेस है और वह अक्सर अपने काम से बाहर जाते हैं। इनफैक्ट महीने में वो 20 से 25 दिन बाहर ही रहते हैं। घर पर हम तीनों भाई-बहन और माँ रहते हैं। मेरी माँ भी बहुत खूबसूरत है। दीदी की तरह ही वो भी दूध सी सफेद हैं और दीदी से भी दुबली हैं मतलब माँ की फिगर 32, 28 36 है।

चुकी दीदी मुझसे 7 साल बड़ी थी इसलिए उनके सामने मैं काफी छोटा था। मेरा घर भी रहिशों की तरह ही पूरा खुला हुआ था। मम्मी और दीदी बिना झिझक के मेरे सामने कपड़े बदलते थे। यहाँ तक कि हर तरह की बातें खुल के करते थे। लेकिन अब मैं भी जवान हो गया था और मुझे हर चीज की समझ हो गयी थी। ( ये कहानी आप nightqueensstories पर पढ़ रहे हैं)

 

सबके चुत गांड के दर्शन हो गए मुझे:

 

ये कहानी तब की है जब मैं 17 साल का था। और मेरी दीदी 24 की थी। एक बार होली का दिन था। और रानी दी की सारी सहेलियां घर पर होली खेलने आयी। मैं तो एक रूम में बंद हो गया। लेकिन दी और उनकी सहेलियां क्या धमाल मचाई। सबने एक दूसरे का कपड़े फाड़ दिए और नंगा करके सबने एक दूसरे को रंग लगाया। हॉल में जब ये रियल फ़िल्म चल रहा था तो मैं अपने कमरे में से झांक कर देख रहा था। ऐसा शायद ही कोई था जो पैंटी में बचा हो। सबके चुत गांड के दर्शन हो गए मुझे तो।

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एक साथ इतने सारे काले बालो से ढकी और चिकनी चुत का दर्शन होना कोई मुराद पूरी होने जैसा था। दीदी की चुत पर ढेर सारे काले बाल थे। लेकिन उसकी गांड इतनी गोरी और मख्खन की तरह मुलायम थी। जो रंग लगने के बाद बिल्कुल रंगीन हो गई थी। दोपहर के करीब 2 बजे मॉम भी मोहल्ले से होली खेल के आयी तो बिल्कुल रंगीन होकर आयी थी। नंगे तो नहीं थी लेकिन बस पेटीकोट और ब्लाउज में आई। शायद उसकी भी साड़ी फाड़ दी गई थी। तब तक दी कि सारी सहेलिया नहा चुकी थी। और सभी ने एक एक दी कि कपड़े पहने और चली गई। दी अब तक नहीं नहाई थी। फिर मॉम सीधे बाथरूम में गई और अपने पेटीकोट और ब्लाउज उतार कर सिर्फ पैंटी में हो गई। ब्रा पहले से नहीं पहनी थी। फिर दी को आवाज लगाई की रानी जरा आकर मेरे रंग छुड़ा दे। दी तो पहले से नंगी थी लेकिन फिर वो पैंटी पहन ली थी। दीदी बाथरूम में जाकर माँ का रंग छुड़ाने लगी। तभी माँ बोलि की विक्की कहाँ है तब दी को ध्यान आया कि अरे हमलोग तो होली खेलने के चक्कर मे उसे भूल ही गए। फिर करीब 20 मिनट बाद दी बाथरूम से बाहर आई तो तौलिया लपेटे हुई थी। और उनके हाथों में ढेर सारा रंग था वो आयी और सीधा मुझपर कूद गई और मुझे नीचे गिरा कर रंग लगाने लगी इसी में दी कि तौलिया भी खुल गई। उनकी बड़ी बड़ी चुचियाँ बिल्कुल आजाद हो गई लेकिन रंग लगाने के चक्कर मे उनको होश ही नही था। मुझे पूरा बदन में रंग लगाने लगी। जब रंग खत्म हो गया तो मेरे ऊपर आकर अपने शरीर को रगड़ने लगी। और रंग लगाने लगी। तब तक माँ बाथरूम से बाहर आ गयी थी। वो तो देख के हसने लगी। और बोली कि अच्छा तो बेटा चिकना चुपड़ा बना हुआ था। और लगाओ इसे रंग। दी तो पूरा मुझे निचोड़ के रंग लगाई। फिर अलग हुई तो तौलिया उठाई और बाथरूम में चली गई। हमारा बाथरूम शीशे के है। दी अपना पैंटी उतारी और शावर के नीचे खड़ी जोकर नहाने लगी। वो पर्दा नही लगाई जिससे मैं पूरी तरह से उनके गांड को देख रहा था। पतली कमर और चौड़े गांड देखकर तो मेरा मुना फड़फड़ाने लगा। मेरा लन्ड बिल्कुल लोहे की तरह सख्त हो गया। मैं तो उस दिन 2 बार मुठ मारा।

 

अब मैं रोज चोरी छिपे मॉम और दी को नंगे नहाते और कपड़े बदलते देखने लगा और मुठ मारने लगा।

 

तभी कुछ दिनों बाद दी कि शादी हो गई। जीजाजी जबलपुर में बैंक मैनेजर थे। दी वहीं रहने लगी। करीब 2 महीने बाद दी और जीजाजी एक दिन घर आये। वो 6 दिन की छुट्टी लेकर आये थे। माँ बहुत खुश थी। पहले दिन जीजाजी की खूब खातिरदारी हुई। रात को हम डिनर कर चुके थे। और छत पर चले गए खुले में। साथ मे जीजाजी और दीदी ने अपने हनीमून की एलबम लायी। और हमे दिखाने लगे। माँ बोली कि मैं बाद में देख लुंगी अभी सोने जा रही हूँ। सारी फोटो काफी खूबसूरत थी। लेकिन कुछ फोटो जिसमे।दीदी समंदर किनारे और पानी में बिकनी में थी जिसमे सिर्फ उनकी चुत और चुचियों के दाने ढंकने वाले कपड़े पहने थे। बहुत सेक्सी लग रही थी। मेरा तो देखते ही लन्ड सलामी मारने लगा था।

 

फिर हम सबको नींद आने लगा। वैसे बता दूं शादी के बाद रानी दी और भी खूबसूरत और सेक्सी हो गई थी। शायद लण्ड खाकर पूरा सेक्सी हो गई थी। उनका पति भी उनसे बहुत प्यार करता था। जबसे आये थे मैं देख रहा था दी जीजाजी के पास चिपकी रहती थी। और जीजाजी भी उसे बहुत प्यार दे रहे थे।

 

शुरू हुई रानी दी कि पयासी चुत की चुदाई

 

रात को छत पे अंधेरा था लेकिन चांदनी रात थी इसलिए थोड़ा उजाला भी था। मैं एक तरफ चारपाई पर सो गया। और दी और जीजाजी एक दूसरे के साथ चिपक के वही सो गए। ( ये कहानी आप nightqueenstories पर पढ़ रहे हैं)

मुझे नींद नही आ रही थी और दी कि पानी मे नंगा बदन वाला फोटो बार बार आंखों में आ रहा था। मेरा लन्ड लगातार कड़क था। फिर करीब आधे घंटे बाद मैंने देखा कि दी जीजाजी का 5 इंच का लन्ड पकड़ रखी है और उसे जोर जोर से हिला रही है। और जीजा जी के छाती पर चाट रही और किसी कर रही है। जीजाजी के मुंह से सससीईईईईससीईईई की आवाज आ रही थी। ये सब देखकर मेरा लन्ड और भी कड़कनाथ हो गया। उन्हें लग रहा था कि मैं सो गया हूँ।

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फिर रानी दी उठी और जीजाजी के दोनों साइड पैर करके उनके लण्ड को अपने चुत में घुसा ली। और जोर जोर से कूदने लगी। अब दी कि मुँह से aahhhhhhhhhh aaaahhhhhhhhhh ooohhhhhhhhhhhhhh yaaaaahhhhhhhhh की आवाजें आने लगी। वो जोर जोर से उछल के चोदे जा रही थी।

 

 

रानी दी कि अधूरी चुदाई

 

दीदी की कामुक आवाज चीख पुकार मुझे तो पागल कर दिया था। करीब 10 मिनट ऐसे ही चुदाई करने के बाद जीजाजी का लन्ड से पानी निकल गया। लेकिन दीदी चोदे जा रही थी तो जीजाजी बोले कि बस करो अब। तो दी बोली कि बस थोड़ी देर और फिर मेरा भी झाड़ जाएगा लेकिन जीजा जी का लन्ड पानी छोड़कर सिकुड़ गया था। जो अभी भी दी की चुत में ही था लेकिन अब दी को एहसास हुआ कि चुत में लन्ड है ही नही। तो दी बोली कि यार आज फिर से तुम्हारा लन्ड धोखा दे दिया और मेरी चुत प्यासी ही रह गई। फिर  दी उठी और छत के एक कोने में जाकर अपने चुत को हाथों से रगड़ने लगी और उंगलियां दोने लगी। करीब 10 मिनट बाद वो जोर से चिलाई aaaaaahhhhhhh aaaaaahhhhhhhh aaahhhhhhhbhhh और उसके चुत से पानी का फब्बार्रा बाहर फेंक दिया। फिर दीदी उठी और जीजाजी के ऊपर आ के सो गई। दोनों नंगे ही सो गए। मेरे से भी नही रहा जा रहा था। तो जब मैने देखा कि दोनों सो गए तो उठा और दीदी जहाँ चुत में उंगली की थी वही जाकर मुठ मारने लगा। वहां छत पर दीदी की चुत से निकली पानी फैली हुई थी। और बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी। थोड़ी देर बाद मेरे लन्ड देव भी उल्टी कर दिए और मुझे शांति मिली। फिर मैं आकर अपने चारपाई पर सो गया। सुबह के करीब साढ़े4 बजे नींद खुली तो देखा दी अभी भी जीजा जी के बाहो में सोई हुई है और उसकी एक चूची दिखाई दे रही है। और जीजाजी का लन्ड सूखे खजूर की तह छोटा सा दिख रहा था। फिर मैं वैसे ही लेटा रहा और दी का मेरे तरफ मुड़ने का इंतजार करने लगा ताकि उसकी चुत का दर्शन पा सके लेकिन ऐसा हुआ नहीं और फिर दोनों की नींद खुल गई। तो मेरे तरफ देखे लेकिन मेरी आँखें बंद पा के वे कपड़े पहने और नीचे चले गए।

 

मैं करीब 7 बजे उठा। तो मेरा लन्ड खड़ा था फिर मैं कैसे करके लन्ड को दबा के सीधा बाथरूम में गया और मुठ मार कर लण्ड का पानी निकाला।

 

अब कहानी का अगला भाग में पढ़िए की दी कि मलाईदार चुत को मैंने उस रात कैसे चोदा। और फिर माँ बेटी दोनों मतलब मॉम और दी दोनों के मलाईदार चुत को चोद कर रसमलाई बनाया। …..

 

 रानी अपनी मलाईदार चुत के साथ माँ को भी चुदवा दी।…

 

 

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