विधवा मौसी की प्यासी चुत चोदने के बाद गांड का सील तोड़ा

मौसी के आँखों से आंसू बहने लगे।  मैंने भी उनको गले से लगा कर पकड़ रखा था और बोला मौसी मैं हूँ ना आपका ख्याल रखूंगा। आप अकेला मत फील किया करो। इतना सुनकर वो और जोर से मुझे भींच लीं। उनकी चुचियाँ बहुत हार्ड थी। मेरा तो लंड अब और कड़क होने लगा। और ये उनको फील हुआ। क्योंकि उनकी खुली जांघ में मेरा लंड टच हो रहा था। तभी मुझे शरारत सूझी और मैं उनके गले पर किस करने लगा और उनकी गाउन में पीछे से हाथ डालकर उनकी पीठ को सहलाने लगा। थोड़ी देर तो वो चुप रही फिर मैंने उन्हें थोड़ा ढीला किया और उनके होंठो पर अपना होंठ रख दिया। और उन्हें चूमने लगा। फिर वो मुँह हटाते हुए बोली बेटा ये क्या कर रहे हो। मैं तेरी मौसी हूँ।

हेलो दोस्तों मैं हूँ आपका दोस्त सिद्धार्थ। जैसा कि आप सब जानते हैं। मैं एक नम्बर का चूत का रसिया लड़का हूँ। 13 साल की उम्र में पहला चुदाई का आनंद लेकर मैं चूत का दीवाना बन गया हूँ। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। अब मेरी उम्र 24 साल है।

तो ये कहानी भी मेरी सच्ची कहानी है।

ये कहानी मेरी और मेरी विधवा मौसी की है। मेरी मौसी की उम्र 55 साल है। और वो भी दिल्ली में ही रहती हैं. उनकी एक बेटी और एक बेटा हैं. मौसा जी का देहांत 12 साल पहले एक सड़क दुर्घटना में हो चुका है। मेरी मौसी की बेटी की शादी हो चुकी है और वो मुम्बई में रहती है और उनका बेटा US अमेरिका में नौकरी करता है। इसलिए मौसी अकेली ही रहती हैं. मौसी की बेटी कभी कभी दिल्ली आती है।

मौसी कभी कभी मेरे घर आ जाती हैं और सारा दिन यहीं रुकती हैं. कभी कभी हम भी मौसी के घर चले जाते हैं। वो अक्सर मुझसे शिकायत करती हैं की तुझे तो अपनी मौसी का ख्याल ही नहीं रहता है, कभी हाल चाल भी नहीं लेता की मौसी मर गई कि जिंदा है।

मौसी के प्रति मेरे मन मे कोई गलत ख्याल नहीं आया था। क्योंकि वो बहुत अच्छी थी। हमारा ख्याल रखती थीं। और आखिर वो उम्र में मुझसे काफी बड़ी थीं और थीं तो मेरी माँ की बहन ही।

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लेकिन पिछले कुछ दिनों से मौसी के प्रति मेरे मन मे विचार बदल गए थे। अब वो मुझे काफी सेक्सी लगती थी। मैं अक्सर उनको नंगे देखने का कामना करता था। और अब तो उनके नाम से मेरा लंड भी खड़ा हो जाता था। और मैं उनके नाम का मुठ मार लेता था। तब ऐसा फील होता था जैसे मैं सच मे मौसी को ही चोद रहा हूँ।

दोस्तो, जैसा कि मैंने बताया कि मेरी मौसी अकेली ही रहती हैं. उनके घर में और कोई भी नहीं रहता है. घर का सारा काम भी खुद ही करती हैं।

एक दिन मैं ऑफिस में ही काम कर रहा था कि मेरी मौसी का फोन आया और उन्होंने बोला कि मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही है. तो मैंने बोला कि मैं माँ को आपके पास भेज देता हूँ. तो उन्होंने बोला कि तेरी माँ का भी तो तबियत ठीक नहीं रहता है। वो और परेशान हो जाएगी। ऑफीस से छुट्टी के बाद तुम्ही आ जाना। मैने बोला लेकिन अभी आपकी तबियत खराब है तो मैं छुट्टी लेकर आ जाता हूँ तो उन्होंने कहा कि कोई बात नई अभी मैं ठीक हूँ शाम में आ जाना।

एक दिन मैं ऑफिस में ही काम कर रहा था कि मेरी मौसी का फोन आया और उन्होंने बोला कि मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही है. तो मैंने बोला कि मैं माँ को आपके पास भेज देता हूँ. तो उन्होंने बोला कि तेरी माँ का भी तो तबियत ठीक नहीं रहता है। वो और परेशान हो जाएगी। ऑफीस से छुट्टी के बाद तुम्ही आ जाना। मैने बोला लेकिन अभी आपकी तबियत खराब है तो मैं छुट्टी लेकर आ जाता हूँ तो उन्होंने कहा कि कोई बात नई अभी मैं ठीक हूँ शाम में आ जाना।

आकर पूछा, क्या हुआ मौसी आप ठीक तो हो तबियत कैसी है अब आपकी। तो उन्होंने कहा ठीक हूँ तुम बैठो मैं तेरे लिए कॉफ़ी लेकर आती हूँ। मैंने कहा- नहीं मौसी, आप परेशान मत हो। लेकिन फिर भी वो गई और 2 कप कॉफ़ी लेकर आई और कफ की ट्रे को रखने के लिए जैसे ही मौसी झुकीं, तभी अचानक से मेरी नज़र उनके नाइटी  के बड़े गले से दिखतीं उनकी बड़ी-बड़ी और बिल्कुल दूध सी सफेद चुचियों पर जा पड़ी। और ये बात उनको भी पता चल गई। फिर मैंने हड़बड़ा कर नजरें हटाया और उनकी तरफ देखा तो वो कातिल मुस्कान के साथ मुझे देखी। फिर वो मेरे पास बैठी और हम कॉफ़ी पीने लगे। इन्होंने पूछा कि आफिस में दिन कैसा बिता। मैंने कहाँ आप जब से कॉल की थी। मैं परेशान था कि आपकी तबियत पता नई कितना खराब है।

फिर मैंने भी उनसे पूछा कि क्या हुआ मौसी? आपकी तबियत अब कैसी है अपको क्या हुआ है। तो वो बोलीं- कुछ नहीं शरीर में थोड़ा सा दर्द है और सिर भारी है। घर मे दवा पड़ा हुआ था तो वो मैंने खा लिया है अभी तो ठीक है इसीलिए मैं बोला कि ऑफीस से छुट्टी के बाद आना। क्योंकि मुझें लगा रात में तबियत ठीक नही लगा तो अकेले मैं क्या करूंगी। मैंने कहा कोई बात नहीं मौसी अब मैं आ गया हूँ। मैं आपकी देखभाल करूँगा।

हम ऐसे ही गपशप करते रहे और कब 8 बज गया पता ही नहीं चला। फिर मुझे याद आया कि घर मे सब परेशान हो रहे होंगे कि मैं अब तक घर क्यों नाहीं लौटा तो मैंने कहा मैं कॉल केर देता हूँ तो मौसी बोली कि दिन में मैं पहले तुम्हारे माँ के पास ही कॉल किया था कि सिद्धार्थ को मेरे घर भेज दो मेरी तबियत थोड़ी आज ठीक नहीं लग रही है। फिर तुम्हारी माँ  बोली की वो तो ऑफिस गया है। ठीक है मैं कॉल कर देती हूँ वो चला जाएगा। फिर मैंने कहा कि रहने दो मैं ही कॉल कर देती हूँ फिर। की ऑफिस से छुट्टी के बाद मेरे घर आ जाए। तो वो बोली ठीक है। फिर भी मैं कॉल किया और बताया तो माँ भी बोली कि बेटा आज वहीं रुक जा। रात में देखभाल भी हो जाएगा उसका। फिर मौसी ने मटर पनीर और कचौड़ी और गाजर का हलवा बनाई और हमदोनों खाए क्या मस्त स्वादिष्ट बनाई थी। फिर रात के करीब 10 बज गए। और किचन में खड़े रहने से मौसी के पैर में दर्द होने लगा और फिर से थोड़ा सर भी दुखने लगा।

तो मैंने बोला- मौसी  आप लेट जाओ, मैं आपके सिर में बाम लगा देता हूँ और पैरों में भी बाम से मालिश कर देता हूँ। वो बोली- ठीक है बेटा।

मौसी लेट गईं लेकिन लेटने से पहले गाउन का ऊपर वाला हिस्सा उतार दी। अब सिर्फ उनके जांघो तक का ही हिस्सा बचा था। मैंने पहली बार मौसी की नंगी टांगें देखी थीं, बहुत ही उनकी जांघे बिल्कुल गोरी और सुडौल थी लग रहा था जैसे केले के तने का हिस्सा हो। उनकी गोरी मोटी जांघे देखकर मेरा तो बुरा हाल हो गया। और लेटने के बाद उनकी गाउन का हिस्सा जो जांघो तक था वो और ऊपर हो गया मौसी ब्लैक कलर की पैंटी पहनी हुई थी जो अब साफ दिख रहा था। उनकी पैंटी में फूली हुई उनकी चूत देख कर मेरा लंड खड़ा होने लगा था लेकिन फिर मैंने अपने आप पर काबू किया और मालिश करने लगा.

मौसी के पैर मेरे गोद मे थे और मैं मालिश कर रहा था। मौसी अपनी आँखें बंद की हुई थी। और उनकी सांसे तेज होने लगी थी। मैं बीच बीच मे उनसे बात कर रहा था तो उनके आवाज में कंपकपाहट थी। लग रहा था जैसे मुश्किल से वो बोल पा रही हो। वो मुश्किल से हाँ-ना में जवाब दे रही थी।

मौसी की पैर मेरे लंड से टच हो रहा था। और मेरा लंड अब नाग की तरह फुंफकारने लगा था। वो ऊपर नीचे हो रहा था जो शायद मौसी को भी महसूस हो गया था।

तभी मैंने कहा मौसी आप अकेले कैसे रह लेती हो। और वो कांपते हुए बोलीं- क्या करूं बेटटा…..……इस उम्र में अकेलापन तो महसूस होता है। तुम्हारा भाई नौकरी करता है। और बेटी की शादी हो गई है सब अपना परिवार संभालने में व्यस्त हैं मेरी फिक्र कोई नही करता।  तेरे मौसा जी के जाने के बाद तो मैं बिल्कुल अकेली पड़ गई हूँ। उनकी बहुत याद आती है। लेकिन जिंदगी है तो काटनी तो है ना। और वो भावुक हो गईं और उठकर मुझे अपने सीने से लगा लीं। क्या बताऊँ दोस्तों उनकी चुचियाँ तो आज भी बिल्कुल 16 साल की उम्र की लड़कीं की तरह कड़क थी। जो मेरे छाती में चुभ रही थी।

मौसी के आँखों से आंसू बहने लगे।  मैंने भी उनको गले से लगा कर पकड़ रखा था और बोला मौसी मैं हूँ ना आपका ख्याल रखूंगा। आप अकेला मत फील किया करो। इतना सुनकर वो और जोर से मुझे भींच लीं। उनकी चुचियाँ बहुत हार्ड थी। मेरा तो लंड अब और कड़क होने लगा। और ये उनको फील हुआ। क्योंकि उनकी खुली जांघ में मेरा लंड टच हो रहा था। तभी मुझे शरारत सूझी और मैं उनके गले पर किस करने लगा और उनकी गाउन में पीछे से हाथ डालकर उनकी पीठ को सहलाने लगा। थोड़ी देर तो वो चुप रही फिर मैंने उन्हें थोड़ा ढीला किया और उनके होंठो पर अपना होंठ रख दिया। और उन्हें चूमने लगा। फिर वो मुँह हटाते हुए बोली बेटा ये क्या कर रहे हो। मैं तेरी मौसी हूँ।

फिर मैंने कहा मौसी आप बहुत सुंदर हो। बहुत सेक्सी हो। आप किसी अप्सरा की तरह हॉट हो। और मैं जानता हूँ आप भी बहुत प्यासी हो। आज मुझे मत रोको। फिर वो बोली की ये गलत है बेटा। मैंने कहा कुछ गलत नहीं है मौसी बस आप ये सोचो कि हम दोनों मर्द औरत हैं और जिस्म के प्यासे हैं।

बेटा मैं भी प्यासी हूँ

फिर मौसी भी मान गई और बोली बेटा तुम कितने अच्छे हो मेरी फिलिंग को भली भांति समझते हो। हाँ बेटा तेरे मौसा जी के जाने के बाद से तो मैं भी बहुत अकेली हो गई हूँ। तुम्हारे मौसा जी के जाने के बाद मैंने आज तक अपनी जिंदगी अपने लिए नहीं जी है. लेकिन अब मेरा फिक्र किये बिना सभी अपनी अपनी दुनिया में मस्त हैं. मैं जानती हूँ कि तुम्हारी उम्र के आदमी भी बाहर सेक्स करने के सपने देखते हैं. हालांकि मैं उम्र में तुमसे बड़ी हूँ, लेकिन मेरा ये वादा है कि तुमको किसी भी जवान औरत से ज़्यादा सुख दूंगी.

अब मौसी खुलकर मुझसे अपनी दिल की हाल बताने लगी।

बेटा तुम सच मे बहुत अच्छे हो। तुमने सच कहा कि मैं भी प्यासी हूँ। और तुम्हे मैं काफी दिनों से चाहती हूं। और तुमसे चुदना चाहती हूँ। लेकिन बोल नहीं पाती थी। मैं चाहती तो अपने ऑफिस में भी किसी मर्द को पटा लेती या किसी किराए का मर्द बुला के चुदवा लेती। लेकिन मैं तुम्हे चाहती हूँ तुमसे ही चुदना चाहती हूं।

तभी मैं बोला- नहीं मौसी, मैं आपको वो सारी खुशियां दूंगा, जो आप चाहोगी. मैं आपको अपनी पत्नी की तरह प्यार करूंगा. आख़िर घर वाले घर वालों के काम नहीं आएंगे, तो कौन आएगा! मैं आपकी भावनाओं को अच्छे से समझता हूँ । ये सुनकर मौसी बहुत खुश हो गईं और हम दोनों एक दूसरे से कस कर चिपक गए. एक दूसरे के होंठ चूसने लगे. अब मैं अपने एक हाथ से मौसी की चुचियां दबाने लगा और मौसी अपने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ ली और सहलाने लगी। मेरा लंड तो बिल्कुल टेंट हो गया। जिससे मुझे बहुत मजा आ रहा था। फिर मैं मौसी की हाफ गाउन उतार दिया। और उनकी ब्लैक रंग की ब्रा को भी उतार कर फेंक दिया। और मैं उनकी गोल और सख्त चुचियों को मुँह में लेकर पीने लगा। उनकी बड़ी बड़ी चूचियां मेरी आंखों के सामने बिल्कुल नंगी थीं। मैं मौसी के मम्मों को बहुत जोर से दबाने लगा. उनकी बड़ी बड़ी चूचियां हाथ में नहीं आ रही थीं। मैं अपने दोनों हाथ से उनकी एक चुची दबा रहा था और एक चूची के निप्पल को दांत से काट रहा था, जिससे उनको भी बहुत मजा आ रहा था.

फिर मौसी मेरा टीशर्ट उतार दी। और मुझे लेटा दी। और मेरा लोअर के साथ अंडरवियर भी एक ही झटके में उतार दी। और मौसी ने मेरे लंड पर टूट पड़ी। मेरा मोटा लंड देखकर उनकी आंखों में चमक आ गई। अब वो मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। मैं पूरा जोश में आ चुका था। मैं बदन को ऐंठ रहा था।

उनकी नरम होंठ किसी गुलाब की पंखुड़ियों की तरह मेरे लंड पर स्पर्श हो रहे थे। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मेरे साथ अब मौसी भी सिसकारियां लेने लगी थी।

मैं रुकना चाहता था। लेकिन ना चाहते हुए भी संयम खो बैठा। और मौसी मेरा लंड चूस चूस कर मेरा पानी निकाल दी और फिर चाटकर मेरे  लंड को साफ की मौसी मेरे लंड का सारा पानी पी गई।

फिर वो बोली बेटा मैं बाथरूम से आती हूँ। वो चली गईं फेशवॉश लगाकर अपनी चूत को अच्छे से साफ की। और वापस आई मैंने देखा उनकी चूत से पानी टपक रहा था। उनकी चूत पर एक भी बाल नही थे शायद वो आज ही अपने झांट को साफ की थी। उनकी चूत का दाना भी साफ दिख रहा था।

बेटा आज से मेरा प्यासा बदन तुम्हारा हुआ

 

उसके बाद वो बिस्तर पर लेट गईं। और बोली बेटे आज अपनी मौसी को जैसे चाहो निगल लो। मेरा प्यासा बदन तुम्हारा हुआ। फिर मैंने मौसी के ऊपर आ गया और झुककर उनकी होंठो को किस करने लगा। उनकी आँखें बंद हो गई और वो मुझे जोर से पकड़ ली और भरपूर साथ देने लगी। फिर मैं थोड़ा नीचे आया और उनकी चुचियों पर मुँह रख दिया वो तो तड़प गई और बदन को ऐंठने लगी। मैं उनकी एक चूची बूब्स को पी रहा था तथा दूसरी को अपने हाथों से मसल रहा था। फिर मैं नाभि को चाटते हुए नीचे की तरफ आया। मैंने देखा मौसी की चूत पानी पानी हुआ पड़ा है और जैसे सांस लेते हैं वैसे अंदर बाहर हो रहा है। उनकी चुत से पानी रिस रहा था। मैंने झट से उनकी चूत पर एक चुम्मा लिया। वो जोर से सिसक पड़ीं.

अब मैं  उनकी चूत चूसने लगा। कभी चूत के अंदर मेरा जीभ जाता तो कभी उंगली। थोड़ी ही देर में मौसी की चूत पानी छोड़ने लगा। मौसी मेरा सर अपनी चूत पर दबा दी। मैं भी सारा पानी पी गया। बहुत स्वादिष्ट और गर्म पानी था। मौसी का चूत पुरी तरह झड़ चुका था।

कुछ पल निढाल रहने के बाद मौसी की आंखों में ख़ुशी दिखने लगी. उनकी आंखों में अलग सी चमक थी। और चेहरे पर मुस्कान के साथ एक सुकून। मैं जल्दी में नही था लेकिन मौसी जल्दी चुदना चाहती थी। क्योंकि मौसा जी के जाने के बाद उनकी चूत बिल्कुल प्यासी थी। वो मुस्कुराते हुए कहने लगीं- अब मुझे

चोदो राजा ……..… मेरी ये वर्षो की प्यासी चूत तेरे हवाले है। अब से ये तेरा हुआ। इसपर सिर्फ तेरा हक है। आ जा मेरे राजा बेटे और चोद ले अपनी मौसी की प्यासी धधकती चूत को।

मैं बिस्तर से नीचे आ गया और उन्हें भी बिस्तर पर बिल्कुल किनारे खींच लिया। फिर उनकी गांड के नीचे 2 तकिया लगाया इससे उनकी चूत बिल्कुल ऊपर हो गई। मैंने उनके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखा और अपना लंड उनकी चूत में फंसाकर जोरदार धक्का मारा।

मौसी ‘आह्हहहहहहहहहहहहहहहहहह……….. आआह्ह हहहहहहहहहहहहहहहह………की आवाज़ करने लगी। मैं एक 2 झटके में ही अपना पूरा लंड उनकी चूत में घुसेड़ दिया था। अब मैं पूरी रफ्तार से उनकी चूत चुदाई कर रहा था और वो भी अपने चूतड़ों को आगे पीछे करके चूत चुदाई का मजा ले रही थीं. और चिल्ला रही थी

मैने भी जोरदार धक्कों के साथ चोदना शुरू कर दिया। अब वो चीला रही थी। चोदो मेरे राजा बेटे। चोदो। चोदो जोर से। फाड़ दो मेरी प्यासी चूत। सालों से मेरी चूत प्यासी है। आहहहहहहहहहहहहहह…………. मेरे राजा चोदो जोर से। मेरी जवानी में तेरे मौसा ने भी इतना जोरदार चुदाई नहीं किया। आज तुम मुझे चुदाई का असली एहसास दिलाए। आज मैंने असली मर्द का लंड से चुद रही हूँ। आहहहहहहहहहहहहहहह आहहहहहहहहहहहहहहहहह बेटे चोदो बेटे चोदो अपनी मौसी को। फाड़ दो अपनी मौसी की चूत। निकाल दो सारा रास अपनी मौसी की चूत की।  ओह हहहहहहहह हहहहहहह हाँ बेटे आई लाइक दिस माय किंग सन। फ़क मी हार्ड माय सन फक मी हार्ड। चोदो। मैं प्यासी हूँ मेरी चूत तुम्हारे लंड खाने को कबसे बेताब था। आज मै पूरा  निगल लुंगी इसे। तेरे मौसा ने भी कभी इतना नहीं चोदा मुझे। आज तुमने मुझे जिंदगी का सच्ची चुदाई का एहसास दिलाया। चोदो । चोदो जान।  चोदो। चोदो अपनी रंडी मौसी को। फाड़ डालो अपनी रंडी मौसी के चूत को। तुम्हारी मौसी अब रंडी बन चुकी है। अपने बेटे का लंड खा के बिल्कुल रंडी बन चुकी है। चोदो अपनी रंडी मौसी को बेटे। मैंने भी करीब 1 घंटे के चुदाई के दौरान मेरी मौसी कई बार झड़ चुकी थी। फिर मैंने कहा मेरी मौसी मैं झड़ने वाला हूँ। तो उसने कहा मेरी चूत में ही झड़ बेटा। अपना लंड  का पानी मेरे चूत में ही छोड़। और फिर मैं भी झड़ गया। और हाँफते हुए मौसी के ऊपर लेट गया। मेरी मौसी मुझे कस के अपनी बाहों में जकड़ ली।  मेरी मौसी अब पूरी तरह संतुष्ट हो चुकी थी।  मैं पूरी तरह से उन्हें संतुष्ट कर दिया था।

उस रात मैं मौसी की चूत लगातार 3 बार चोदा।

मेरी मौसी गांड कभी नहीं मरवाई थी। लेकिन मैं उनकी चूत चोदने के दौरान ही उनकी बन्द गोल छेद वाली गांड को देख लिया था और मन बना लिया था कि आज तो इसकी बिना गांड मारे नहीं रहूंगा। और फिर कैसे मैं बाथरूम में उनकी गांड फाड़ दिया। ये जानने के लिए आपको अगला भाग का इंतजार करना होगा। आप सब कमेंट करके बताइएगा। तभी मैं मौसी की गांड चुदाई की कहानी लेकर आऊंगा। तब तक के लिए दीजिए इजाजत।

नोट: इस कहानी के सभी पात्रों के नाम काल्पनिक हैं।

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