नेताजी ने टिकट के बदले मेरी चूत मारी। भाग-2

दोस्तों जैसा कि मैंने आप सब से वादा किया था कि कहानी नेताजी ने टिकट के बदले मेरा चुत मारी की अगला भाग लेकर आऊंगा और आप सब से साझा करूँगा की कैसे मैंने मंत्री बनने के बाद नेताजी से चुदाई का बदला लिया 

 

तो लीजिए मैं हाजिर हूँ उस सच्ची घटना की दूसरा भाग के साथ।

 

कहानी के शुरुआती भाग के कुछ अंश और अपनी संक्षिप्त परिचय के साथ शुरू करते हैं।

 

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम सपना रानी है मैं पिछले कई सालों से एक बड़ी राष्ट्रीय पार्टी में राजनीति में सक्रिय हूँ। हर बार जब विधानसभा का चुनाव आता है तो मैं टिकट की बस उम्मीद ही करके रह जाती हूँ लेकिन टिकट नहीं मिलता। जबकि बाहर से लोग आकर पैसे से टिकट खरीद लेते हैं। और मैं बस एक कार्यकर्ता की तरह पार्टी का झंडा बैनर लेकर घूमती रह जाती हूँ। मेरे पति भी राजनीति में सक्रिय थे। समाज के लिए मैं कुछ करना चाहती थी लेकिन बिना पावर के कुछ नही कर सकती थी। मैं देखने मे बहुत खूबसूरत हूँ। हर रोज जिम जाती हूँ फिट कर्वी बॉडी है।

 

तो फिर से UP  में विधानसभा चुनाव नजदीक चुके थे। और सारे नेता टिकट पाने के लिए भाग दौड़ में लग गए थे। मैं भी टिकट की चाह में प्रदेश अध्यक्ष के यहाँ पहुँच गयी। मैं प्रदेश अध्यक्ष के पैर छुए।

 

मुझे अब बहुत गुस्सा भी रहा था कि साले का खड़ा होता नहीं है और जवान चुत चाहिए। बड़ी मुश्किल से उसका लण्ड मेरे चुत में घूँसा अब मैं ऊपर नीचे होने लगी और उसके लण्ड पर कूदने लगी। मुझे तो लग ही नही रह था कि मेरी चुत में कुछ घुसा भी है। करीब 5 मिनट ऐसे ही चोदने के बाद बूढ़ा बोला कि मेरा।लण्ड पानी छोड़ने वाला है तुम चुत से निकालो और मेरे लण्ड का पानी पियो। मैं नीचे हो गई और हाथ से उसका मुरझाया लन्ड हिलाने लगी। और मुंह मे ले ली जैसे ही मुँह में ली। उस हरामी बूढ़े का वीर्य बहुत थोड़ा सा बमुश्किल 1, 2 बून्द निकला लेकिन मैं पी गई। और देखते ही देखते बूढ़ा गहरी नींद में सो गया। मैं भी मन मसोस के उसके बगल में लेट गया। और पूरी रात वैसे ही पड़ा रहा मुझे बिल्कुल भी नींद नही आई। सुबह का करीब 6 बजे बूढ़े का नींद खुला तो मुझे बोला सपना जी आप बहुत हॉट हो। आपने मुझे बहुत मजा दिया। चलिए आपकी टिकट कन्फर्म हुई। और फिर बूढ़ा बोला कि आप यही रुकिए मेरे निकलने के कुछ देर बाद आप निकलिएगा तब तक आप ऐसे ही नंगी मेरे आँखों के सामने रहिए। और फिर वो अपना सफेद धोती कुर्ता पहना और चला गया। उसके जाने के बाद मैं भी कपड़े पहनी और वहाँ से निकल गयी। और ऐसे ही एक हफ्ता बिता। अगले।दिन टिकट का अनाउंस होने वाला था मैं बेचैन थी। कि मुझे सच मे टिकट मिल पाएगा या नही। लेकिन जब टिकट अनाउंस हुआ तो मेरा भी नाम था। मैं चुनाव लड़ी और जीत गई।

अपनी चुत का बदला नेताजी का गांड फाड़कर लिया

तो मेरी चुत ने मुझे विधानसभा का टिकट दिलवा ही दिया और मैं बड़े मार्जिन से चुनाव भी जीत गई। और मंत्री भी बन गई।

 

लेकिन मेरे अंदर नेताजी से बदला लेने की आग थोड़ा भी कम नहीं हुआ था। मैं बदले की आग में जल रही थी। मुझे हर रोज उस कुत्ते हरामी नेता का छुहाड़े की तरह मुरझाया लंड दिखाई देता था। और याद आता था कि कैसे उसका लंड खड़ा नहीं हो रहा था , और चुत में घुसने के बजाए रबर की तरह मुड़ जा रहा था। और कैसे ना चाहते हुए भी उसने जबरदस्ती अपने सूखे लंड का बदबूदार पानी मुझे पिलाया था। उस हिजडें ने मेरी स्वाभिमान को ठेस पहुँचाया था।

 

मैं जिस चुत को संभालकर रखी थी, जो मेरी इज्जत थी। उस इज्जत को हरामी खूसट बूढ़े ना रौंद दिया था।

 

और मैं उसी दिन शपथ ले ली थी कि इसी चुत को हथियार बनाकर एक दिन मैं इस बुढ़े से बदला लूंगा।

 

अब मेरे पास पॉवर था पैसा था। सबकुछ था। फिर एक दिन मैंने उस बूढ़े को कॉल किया और प्यार से बोला, की नेताजी आपकी दया दृष्टि से आज मैं मंत्री बन चुकी हूँ। तो मैं खुशी से अब आपको खुश करना चाहती हूँ।

आपका एहसान चुकाना चाहती हूँ। तो कहाँ मिलें।

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बूढ़े ने बिना सोचे समझे झट से बोल दिया कि सपना जी हम फिर से वही मेरे फार्महाउस पर मिलते हैं। आप जहां आशीर्वाद ली थी। वही एहसान भी चुका दीजिएगा।

 

और मैने बोला नेताजी मैं चाहती हूँ हमदोनो के बीच कोई ना आए। मैं खुल के आपके साथ चुदवाना चाहती हूँ। चाहे घर के अंदर हो या बाहर। तो कृपया आप अपने गार्ड और ड्राइवर को भी वहां से हटा दीजिएगा। हमदोनो अकेले चुदाई का खेल खेलेंगे। बुढा बहुत खुश हुआ। शाम को ठीक 8 बजे मैं उसके फार्महाउस पर पहुँच चुकी थी। और देखा तो गेट पर ना गार्ड था ना ही बूढ़े की गाड़ी थी। मैं अंदर गई। बेल बजाया तो बुढा ने दरवाजा खोला और देखा कि हरामी सारे कपड़े उतार के सिर्फ निकर में था। और मुझे बाहों में भरते हुए बोला जाओ सपना रानी देखो आज रात भर हमे कोई डिस्टर्ब नही करेगा। मैं ड्राइवर को भी भेज दिया हूँ और गार्ड को भी अब वे सुबह ही आएंगे।

 

बूढ़ा उतावला हुआ जा रहा था। मेरा तो मन कर रहा था साले को अभी पिटाई कर दूँ। लेकिन मैं बर्दास्त की। लेकिन हरामी नेता जल्दी में था। उसने अपना निकर उतार दिया और उसका सूखा लंड सामने था। फिर उसने मेरे भी कपड़े उतारने लगे। लेकिन उससे तो ब्लाउज के हुक भी नही खुल रहे थे तो झुंझलाकर बोला, खोलो ना इसे। सारे कपड़े उतारो। मैंने भी एक एक कर सारे कपड़े उतार दिए। और पूरी नंगी हो गई। बूढ़े की आँखे फ़टी की फटी रह गई और मेरे बूब्स पर मुँह लगा दिया। फिर किंग साइज बेड पर लेट गया और बोला सपना रानी मेरा लंड चुसो। ऐसे हुक्म दे रहा था जैसे मैं उसका गुलाम हूँ। मैने भी उसके लंड को सहलाना शुरू कर दिया लेकिन मुँह में नही लिया बुढा आंखे बंद किये पड़ा रहा। हरामी का लंड खड़ा होने का नाम नही ले रहा था

 

फिर करीब 5 मिनट बाद ही उसका लंड बिना खड़ा हुए ही वीर्य उगलने लगा जो कुछ बूंद ही था। बूढ़ा आहहहहहह.. करते हुए शांत हो गया और आंखे बंद करके हांफने लगा और उसे नींद आ गई। फिर मैं उठी और अपने साथ कोड़े छिपाकर लाई थी उसे निकाला और बुढा को बोला उठ साले हरामी के पिल्ले। वह उठा तो मेरे हाथ मे कोड़े और गुस्से में मेरी लाल चेहरा देखकर डर गया। और बोला सपना जी ये क्या है। तो मैने जोर से उसे कोड़े मारा और बोली।

 

हरामी साले दिखाई नही दे रहा ये कोड़ा है इसे तुम्हारे लिए ही लाया हूँ। तुम्हे बहुत शौक है ना टिकट के बदले चुत चोदने का तो हरामी तुम्हारा लंड बिना खड़ा हुए झड़ क्यो गया और मैने कोड़ा मारा वो बिलबिलाने लगा और हाथ जोड़ने लगा। मैं उसके मुँह पर बैठ गई और अपना चुत रगड़ने लगी वो सांस नहीं ले पा रहा था। और मैने 2 झापड़ कस के मारे। और बोला साला चाट मेरी चुत। कुत्ते के पिल्ले। वह ना चाहते हुए भी कुत्ते की तह मेरी चुत चाटने लगा। ऐसे ही 15 मिनट तक मैं उसके मुँह पर चुत रगड़ते रही फिर मैं झड़ गई। उस दौरान उसे मैंने बहुत झापड़ मारे। उसका पूरा गाल लाल हो गया था। लेकिन अभी तो शुरुआत थी। फिर मैं लेट गई और उसे बोला चल खड़ा हो और बैठकर मेरी चुत चाट। वह हाथ जोड़ने लगा कि रहम करो माफ कर दो। मत करो ऐसे। मैं मर जाऊंगा बुढा हूँ। मैने जोर से एक लात मारा तो वो हरामी बिस्तर से नीचे जा गिरा और कराहने लगा मैं बोली आ मेरी चुत चाट नही तो तेरी भुरकुश बना दूंगी यहीँ। वह डर के मारे आया और चुत चाटने लगा उसके हांथ और पूरा जिस्म कांप रहा था फिर कुत्ते की तरह चुत चाटने लगा तो मैं उसका सर पकड़ के उसकी नाक मेरी चुत में लगा दिया उसे सांस नही लिया जा रहा था। वह छटपटाने लगा।

 

फिर जब मैं उसका सर छोड़ा तो हाथ जोड़कर रोते हुए माफी मांगने लगा। लेकिन मैं कोई दया नही दिखा रही थी। और एक लात मारा तो वो फिर से बिस्तर से नीचे जा गिरा। अब मैं उठी और कोड़े बरसाने लगी। 8, 10 कोड़े में वो जमीन पर लुढ़क गया। फिर मैं अपने साथ छुपाकर लायी स्ट्रैप ऑन निकाली। जो नकली लण्ड होता है। जिसे पहनकर लेस्बियन औरतें एक दूसरे का चुदाई करते हैं। और पहन लिया और उस बूढ़े को उल्टा किया वह रोये जा रहा था और माफी मांग रहा था। लेकिन मैं रहम करने वाली नही थी। फिर उसके पैर फैलाए और नकली लंड को उसके गांड में घुसेड़ दिया। वह जोर से चिलाया लेकिन मैं अपने हाथों से उसका मुंह जोर से दबा दिया। और जोर जोर से उसका गांड में लंड डालने लगा। 8, 10 धक्के मारे होंगे कि साला हरामी बेहोश हो गया। मैं वैसे ही उसकी गांड में लंड डालते रही।

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फिर उसके मुँह पर पानी मारा तो उसे होश आया और हाथ जोड़कर माफी मांगने लगा। मैं जोरदार एक किक मारी और फिर से लंड उसकी गांड में घुसेड़ दिया। जोरदार 8, 10 धक्कों के बाद बुढा फिर बेहोश हो गया। अब वह पूरी तरह से असहाय हो चुका था। तो मैं अपने कपड़े पहनी और बूढ़े के मुँह पर पानी मारा। वह होश में आ चुका था। फिर मैं वहाँ से निकल गई। रात के करीब 12 बज रहे थे। फिर मैं अपने घर आ गई। और घर आकर सारे कपड़े उतार कर मशीन में डाले और मैं शॉवर के नीचे बैठ गयी करीब 1 घण्टा तक मैं शावर के नीचे बैठी रही। अब मेरे मन मे सुकून थ। मैंने अपनी चुदाई का बदला ले ली थी।

 

तो ये थी मेरी नेताजी से चुदाई का बदला। और नेताजी ने टिकट के बदले मेरी चुत मारी का भाग-2।

 

तो दोस्तों कैसी लगी मेरी कहानी कमेंट करके बताना। और ये जरूर बताना की मैंने सही किया या गलत।

 

तो मिलते हैं अब फिर से किसी घटना के साथ।।

 

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