सफर में दबी हुई सिसकारियां

 181 

बस की खामोश सफर में दबी हुई सिसकारियां

सूरज मैं झड़ने वाली हूँ डालो तेज। तेज तेज उँगली करो। अब मैं गई जल्दी जल्दी डालो मेरी चुत पानी छोड़ रही है। और फिर वह ऐंठते हुए झड़ गई। उसकी चुत तो पानी छोड़ दिया था लेकिन मेरा लन्ड तो अभी पूरे जोश में था। और वह अब मेरे लन्ड को धीरे धीरे हिला रही थी। तो मुझे लगा शायद अब ये ठंडी हो गई तो मेरा लन्ड छोड़ देगी।

तो मैं बोला आरती मेरा अभी नही हुआ है तुम हिलाओ ना जोर जोर से। क्या मेरे लन्ड का पानी नही निकालोगी। तो वह बोली तुम थोड़ा और किनारे हो। तो मैं हो गया और वो झुककर मेरा पूरा लन्ड मुँह में ले ली। और मुंह मे चुदने लगी। अब वो मेरे दोनो गोटियों को भी पैंट से बाहर खिंच ली थी।

 

सभी https://nightqueenstories.com के सेक्सी हैंडसम पाठकों को मेरा सादर नमस्कार।

दोस्तों मैं कोई लेखक नही हूँ ना ही मैं लिखता हूँ। बल्कि मैं तो एक https://nightqueenstories.com का सामान्य नियमित पाठक हूँ। इस साइट की सभी कहानियां पढ़ चुका हूँ और मुझे हर रोज इंतजार रहता है। और जैसे ही कहानी अपलोड होता है मैं कहानियां पढ़ता हूँ। मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे इस साइट पर कहानियां पढ़ने का मौका मिला इस साइट ने मेरी जिंदगी ही बदल दी। मेरा रहन सहन सबकुछ। अब मैं एक VIP की तरह खुद को पेश करता हूँ और ये सब मैंने इस साइट से सीखा है। और आज मैं इसी साइट की वजह से खुद की कहानी लिख रहा हूँ। यह मेरी खुद की कहानी है।

मेरे प्यारे दोस्तों मेरा नाम सूर्यांश कुमार सिंह है। और मेरे घर मे और मेरे सभी दोस्त मुझे सूर्या कहकर बुलाते हैं तो कुछ लोग सूरज भी कहते हैं। वैसे सच पूछो तो मुझे भी सूरज ही पसन्द है।

तो चलिए अब बिना देरी के असली कहानी की ओर चलते हैं। दरअसल यह कहानी 2 साल पहले का है। 28 जनवरी 2019 का। और अब मैं 27 साल का हो चुका हूँ। मेरा लन्ड जब खड़ा होता है तो 8 इंच का हो जाता है। और काफी मोटा भी।

सफर में लन्ड और चुत चाटने का सुखद एहसास क्या होता है

मैं एक मार्केटिंग का जॉब करता हूँ। और बनारस में रहता हूँ। मैं बनारस के साथ साथ मिर्जापुर और सोनभद्र भी देखता हूँ। मैं हफ्ते के 6 दिन जर्नी करता हूँ। और लगभग सभी जगह बस में ही आना जाना होता है।

तो उस दिन मैं मिर्जापुर गया हुआ था। और लेट हो गया। मैं बस स्टैंड पहुँचा तो शाम के 7 बज चुके थे। मैं बस का टिकट लिया और अपनी सीट पर जाकर बैठा जो की खिड़की के किनारे वाली सीट थी लेकिन मेरे बगल वाली सीट अब भी खाली थी। बस खुलने में थोड़ा समय था बस खुलने ही वाली थी तभी एक औरत हाँफते हुए बस में चढ़ी उसकी उम्र लगभग 30 से 35 के बीच रही होगी। उसके साथ एक 5-6 साल की बेटी भी थी। जो बहुत प्यारी थी। वह मेरे पास आई और मेरे से पुछी ये सीट खाली है क्या, तो मैंने जवाब हा में दिया। वो वही पर अपने बेटी के साथ बैठ गई। उसे बैठने में थोड़ा प्रॉब्लम हो रही थी तो वह बोली आप मुझे खिड़की तरफ बैठने देंगे। तो मैं हाँ बोला और वो खिड़की साइड बैठ गई।

वैसे तो वह बहुत खूबसूरत नही थी। और सांवली भी थी लेकिन उसके चुचियाँ बहुत बड़ी बड़ी थी और कमर बिल्कुल पतले वही चुचियों की तरह ही उसके गांड़ बड़े थे। बहुत चौड़े और गोल। उस महिला में सबसे खास बस यही था। दोस्तों मुझे बड़े बड़े चुचियों वाली औरतें बहुत पसंद है।

कुछ ही देर में बस खुल चुकी। और बस की लाइट भी बंद हो गई। बस में अब बिल्कुल अंधेरा था। और ठंढ की वजह से सारे खिड़की बन्द थे और पर्दे भी लगे थे। तो बाहर की रोशनी भी अंदर नही आ रही थी। उसकी बेटी खिड़की तरफ थी। और बस चलते ही सो गई।

बस के थोड़ी दूर चलने के बाद मैंने सोचा थोडा कुछ शैतानी किया जाए तो मैं अपनी कोहनी से उसके बूब्स को धीरे से टच किया ऐसे ही 2, 3 बार मैं किया लेकिन उसकी कोई प्रतिक्रिया नही मिला तो मैंने फिर से उसकी बूब्स को टच किया और इस बार थोड़ा तेज से दबाया। वैसे तो बस में बिल्कुल अंधेरा था लेकिन फिर भी मुझे डर सता रहा था कि कही कोई देख ना ले। लेकिन फिर भी मैं लगा हुआ था और जल्द ही मेरा लन्ड भी खड़ा हो गया। फिर मैं सोचा चलो बात करते हैं। तो मैं उससे पूछा मैडम आप कहां तक ​​जाओगी तो वो बोली मैं बनारस जाऊंगी।

फिर वो भी मुझसे पूछी तो मैं बोला मैं भी बनारस ही जाऊंगा। फिर मैं उसका नाम पूछा तो वो बताई मेरा नाम आरती है। और मैं सनबीम स्कूल में टीचर हूँ। तो मैंने भी अपना नाम बताया। फिर हम बातें करने लगे।

फिर मैंने उससे पूछा बनारस में कहाँ रहती हो तो वो बताई की मैं रामनगर में रहती हूँ और सनबीम स्कूल में मैथ की टीचर हूँ।

तो मैं बोला मैं BHU के पास ही लंका पर रहता हूँ। फिर वो मुझसे पूछी की तुम्हारे घर और कौन कौन रहता है तो मैं बताया कि मैं अकेले ही रहता हूँ। फिर उसने मेरे परिवार के बारे में पूछा तो मैं बताया कि मेरा घर फैजाबाद में है और सारा परिवार वही रहता है।

मैं उससे पूछा कि तुम्हारे परिवार में कौन कौन है तो वो बताई की मैं अपने मायके में रहती हूँ। मेरा घर रामनगर में ही है। मेरा ससुराल इलाहाबाद में है। लेकिन मेरे हस्बैंड मुझे छोड़ दिये हैं। उनका किसी और से अफेयर है। और वो उससे शादी करने वाले हैं। कुछ ही दिनों में हमारा तलाक हो जाएगा।

मैं बोला तुमलोग कितने साल से अलग रह रही हो तो वो बोली की मैं 2 साल से अपने मायके में हूँ। मैं अपने माँ-पिताजी की इकलौती बेटी हूँ तो मेरे पैरेंट्स भी मुझे बहुत प्यार करते हैं।

दोस्तों ये सुनते ही कि वो 2 साल से ही अपने पति से अलग है तो मैं समझ गया कि शायद वो 2 साल से नही चुदी होगी। इसीलिए जब मैं अपने कोहनी से उसके चुचियों को रगड़ रहा था तो वो विरोध नही की। शायद उसे भी मजा आ रहा होगा।

तो दोस्तों अब मेरा हौसला भी थोड़ा बढ़ा क्योंकि अब हम बात करके थोड़ी कम्फर्टेबल हो गए थे।

आरती अब मेरे लन्ड को जीन्स के ऊपर से ही सहलाने लगी

मेरा लन्ड तो पहले से खड़ा हो चुका था तो मैं बहुत हिम्मत करके उससे धीरे से कान के पास जाकर कहा क्या आप थोड़ा मेरी तरफ और सट कर बैठ सकते है तो वो बिना कुछ बोले मेरी तरफ खिसक गई और मेरे से बिल्कुल चिपक कर बैठ गई। और मैं बिना देरी किए अपना हाथ उसके बूब्स पर रख दिया और दबाने लगा। तो वो धीरे से बोली ये आप क्या कर रहे हो। कोई देख लेगा। लेकिन मेरा हाथ नही हटाई। और बूब्स दबवाने लगी। इधर मेरा लन्ड पूरे जोश में उफान मारने लगा था। और लग रहा था जैसे जीन्स फाड़ कर अभी बाहर आ जाएगा। तो मैं धीरे से उसके कान के पास अपने मुँह किया और बोला आप भी कुछ करो। लेकिन वो चुपचाप थी। तो मैं उसका हाथ पकड़ा और अपने लन्ड पर रख दिया। और उसके हाथ को लन्ड पर रगड़ने लगा। फिर छोड़ दिया। तो वह खुद ही जीन्स के ऊपर से ही मेरे लन्ड को सहलाने लगी।

आरती अपनी साड़ी ऊपर उठाई और मेरा हाथ पकड़ कर चुत पर रख दी

मैं तो पागल हुआ जा रहा था। फिर मैंने अपने जीन्स का जीप खोल दिया और लन्ड बाहर निकाल दिया तो वो हाथ हटा ली तो मैं फिर उसका हाथ पकड़ा और लन्ड पर रख दिया, लेकिन वह फिर से हाथ हटा ली। और अब वो अपना हाथ भी नही पकड़ने दे रही थी। लेकिन मैं भी बार बार उसकी हाथ पकड़ रहा था तो फिर वह मान गई। फिर मैं उसका हाथ अपने लन्ड पर रख दिया। पहले तो वो झिझक रही थी। फिर मैं उसके हाथ को लन्ड पर रगड़ा और मुट्ठी में ऊपर नीचे किया। अब वो खुद ही ऐसा करने लगी। तो मैं उसके साड़ी में ऊपर से हाथ डालने कि कोशिस किया लेकिन उसकी साड़ी बहुत टाइट बंधी हुई थी। तो हाथ अंदर नही गया तो वह साड़ी नीचे से उठाई और मेरा हाथ पकड़ के चुत पर रख दी उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी तो मैं उसके पैंटी में हाथ डालकर उँगली उसके चुत में डाल दिया और अंदर बाहर करने लगा। वह आहहहहहहहहहहहहहहहहह… की।

अब वो और जोर जोर से मेरा लन्ड हिलाने लगी। तो मैं भी जोर जोर से उँगली उसकी चुत में डालने लगा। उसके मुँह से अब धीमी आवाज में आहहहहहहहहहहहहहहहहह….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. आहहहहहहहहहहहहहहहहह….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. ओहहहहहहहहहहहह… ऊँहऊँहऊँहउहहहहहहहहहहह ….. करने लगी। जो सिर्फ मुझे ही सुनाई दे रही थी।

दोस्तों उसकी चुत झांटो से भरी हुई थी। शायद वह काफी दिनों से चुदी नहीं थी इसीलिए झांट साफ नही की थी। उसके चुत पर घने झांट थे। और इतने बड़े बड़े की पकड़ के जुड़ा भी बन जाए। पूरा चुत झांट जे ढका हुआ था। बड़ी मुश्किल से उसकी चुत के दाने मेरे हांथ में आ रहे थे। मैं लगातार उसकी चुत रगड़ रहा था और उँगली चुत में अंदर बाहर कर रहा था। मैं तो उससे कानो में धीरे से बोला कि तुम्हारी चुत पर इतनी झांट क्यों है। क्या तुम इसे साफ नही करती। लेकिन वो कुछ नही बोली। और मजे लेते रही। और मेरा लन्ड जोर जोर से रगड़ते रही।

सूरज मैं झड़ने वाली हूँ मेरी चुत में जोर जोर से उँगली डालो

शायद उसे उतना मजा नही आ रहा था क्योंकि बैठे होने के कारण और पैंटी की वजह से उँगली ठीक से अंदर नही जा पा रहा था तो वह थोड़ा खड़ी हुई और धीरे से अपनी पैंटी घुटनो तक सरका दी। और पैरों को चौड़ा कर दी। अब मेरी उंगलिया अच्छे से उसकी चुत में सटासट अंदर बाहर हो रहा था। अब वो धीमे आवाज में बोल रही थी आहहहहहहहहहहहहहहहहह….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. जोर जोर से उँगली डालो। आहहहहहहहहहहहहहहहहह….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह… डालो तेज तेज।… उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. मेरी चुत में बहुत कीड़ा काट रहा है उँगली से चोदो जोर जोर से… ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. ईईर्ररर्राहहहहहहहहह… ऊँहऊँहऊँहउहहहहहहहहहहह ….. वह मदहोश थी। और बड़बड़ा रही थी साथ ही मेरे लन्ड को जोर जोर से हिला रही थी। फिर वह मेरे लन्ड पर थूक दी जिससे मेरा लन्ड बिल्कुल चिकना हो गया और वो और तेज फिसलने लगा। अब मुझे भी और ज्यादा मजा आने लगा।

कुछ ही देर में उसकी चुत पानी छोड़ने वाला था और वो बोली आहहहहहहहहहहहहहहहहह….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. जोर जोर से उँगली डालो। आहहहहहहहहहहहहहहहहह….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह… डालो तेज तेज।… उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. मेरी चुत में उँगली से चोदो जोर जोर से… ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई…..

सूरज मैं झड़ने वाली हूँ डालो तेज। तेज तेज उँगली करो। अब मैं गई जल्दी जल्दी डालो मेरी चुत पानी छोड़ रही है। और फिर वह ऐंठते हुए झड़ गई। उसकी चुत तो पानी छोड़ दिया था लेकिन मेरा लन्ड तो अभी पूरे जोश में था। और वह अब मेरे लन्ड को धीरे धीरे हिला रही थी। तो मुझे लगा शायद अब ये ठंडी हो गई तो मेरा लन्ड छोड़ देगी।

आरती की लन्ड चूसने का तरीका बता रहा था कि वह चुदाई की बहुत बड़ी खिलाड़ी है

तो मैं बोला आरती मेरा अभी नही हुआ है तुम हिलाओ ना जोर जोर से। क्या मेरे लन्ड का पानी नही निकालोगी। तो वह बोली तुम थोड़ा और किनारे हो। तो मैं हो गया और वो झुककर मेरा पूरा लन्ड मुँह में ले ली। और मुंह मे चुदने लगी। अब वो मेरे दोनो गोटियों को भी पैंट से बाहर खिंच ली थी।

क्या बताऊँ दोस्तों वह सेक्स और चुदाई की बहुत बड़ी खिलाड़ी थी वह लन्ड चुसते समय लगातार मेरी गोटियों को सहला रही थी। और कभी कभी गोटियों पर भी जीभ फिरा रही थी। वह मेरे लन्ड के सुपाड़े पर जीभ की ऐसी हरकत कर रही थी कि मैं पागल हो चुका था।

थोड़ी ही देर में मुझे लगा कि अब मैं नही रुक पाऊंगा और फिर मैं उसके सर को हटाने लगा लेकिन वह मेरा हाथ पकड़ के हटा दी और वो और जोर जोर से मुँह में मेरा लन्ड ऊपर नीचे करने लगी। और तभी मेरा लन्ड गर्म लावा उसकी मुँह में छोड़ने लगा।

दोस्तों वह मेरे लन्ड का वीर्य पीना चाहती थी इसीलिए वह सर नही हटाई। और वह पूरा रस पी गई। और चाटकर अच्छे से लन्ड को साफ की।

और फिर सीधा हुई और मुझे किस की। और बोली तुम्हारा माल बहुत टेस्टी था। मैं सालों बाद किसी मर्द का वीर्य पी हूँ। मुझे वीर्य पीना बहुत पसंद है।

तुम बहुत अच्छे हो सूरज। तुमने आज सालों बाद मेरी तमन्ना पूरी की।

तब तक हम बनारस कैंट पहुँच गए। तो मैं पूछा कि घर कैसे जाओगी। तो वो बोली कि मैं तो पापा को कॉल करना भूल ही गई। अब पहुँच के कॉल करूँगी और उनके आने तक मुझे वेट करना होगा। तो मैं बोला कि तुम मेरे रूम पर चलो। रात वही रुकना सुबह मैं तुम्हे घर छोड़ दूंगा। तो पहले तो वो मना कर रही थी लेकिन फिर हाँ कर दी। और फिर हम बनारस पहुँच गए। मैं ऑटो रिज़र्व किया और घर जाने लगे।

Meet Women Online!!

दोस्तों ये कहानी बहुत अलग और बिल्कुल नई है तो मैं उम्मीद करता हूँ आप सब जरूर पसन्द करेंगे। आप हमें कमेंट करके बताएं कि कहानी का कौन सा पार्ट आपको सबसे ज्यादा पसंद आया। और कहानी को लाइक और शेयर जरूर करना। ताकि https://nightqueenstories.com आप सब के साथ उनको भी चुदाई का सुख दे सके जो अनजान हैं। तो मिलते हैं फिर किसी और कहानी में। धन्यवाद।।

 

75% LikesVS
25% Dislikes

One thought on “सफर में दबी हुई सिसकारियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *