अपहरण

अपहरण – चुदाई हुई ताबड़तोड़ (गैंगबैंग)

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ये कहानी ही आशा की , जिस दिन वह १८ की हुई , मेने यानि की कुंदन सिंह ने उसका अपहरण किया था। में वैसे तो बिहार का रहने वाला हु , लेकिन काम की तलाश में मुंबई आया था।

मुंबई में जल्दी कमाने का बस एक ही तरीका है , ‘गलत काम’ और में तो बचपन से ही कमीना रहा हु। काम की तलाश में मेरी मुलाकात हुई ईश्वर यादव से जो मेरे ही गांव का रहने वाला था। ईश्वर ने मुझे कुर्ला मिलने बुलाया था , “तो देखो कुंदन भाई , ये काम जो है काफी जोखिम भरा है। ”

“काम क्या है और दाम क्या मिलेगा , बस ये बतादो ईश्वर भाई। ”

“१ लाख मिलेगा अगर पूरी तरह सफल रहे तो और जो सफल नई हुए तो कुछ बही नहीं। ”

“मंजूर है , चलो अब काम की जानकारी दो हमको। ”

“एक लड़की का अपहरण करना है तुम्हे , ये रही उसकी तस्वीर और ये रहा उसके कॉलेज का पता। ”

लड़की की तस्वीर देखकर तो में दंग रह गया था , गोरी चिट्टी , हलके भूरे बाल , लम्बी और सुडोल थी वह। मेने झट से ईश्वर भाई से कहा , “ये तो मेरे अंदर चुदाई की इच्छा जगा रही है। ऐसी चूचिया और कमर वाली को कैसे छोड़ेंगे ?”

ईश्वर ने हस्ते हुए कहा , “इसे चोदने की सोचना भी मत भोसड़ीवाले , हमको पैसा मिलने पर इसको सही सलामत इसके बाप को सोपना पड़ेगा। ”

“ऐसे कैसे भाई , इसको तो हम… ”

“ओये साला चूतिया , होश में आओ। इज़त से काम करपाओगे या नहीं ? वार्ना किसी और को ढूंढ़ते है। ”

“अरे भाई आप तो नाराज होगये , करेंगे बिलकुल इज़त में काम। ”

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“हम्म ठीक है तब , ये लो अपना advance और ये लो रंडीखाने का पता। कल तुम्हे काम को अंजाम देना है , उससे पहले अपनी हवस को ठंडा करलो मादरचोद। ”

तो सबसे पहले तो उस शाम मैं ईश्वर यादव के बताए रंडीखाने में गया , वहा मेरी मुलाकात हुई सकीना से। बहुत ही ज़बरदस्त औरत थी सकीना , पान खाकर मुँह लाल और शरीर मस्त कसा हुआ। उसके बुब्बे अच्छे बड़े बड़े थे लेकिन लटकने वाले नहीं , तने हुए और जिस्म मुलायम मखमल की तरह। सावला रंग और थीके नाक नक्श , मैं तो उसको देखते ही लिपक गया और वह हस्ते हुए बोली , “अरे ओ चिकने , ज़रा सबर कर , कमरे में तो चल पहले। सबको free show थोड़ी देना है। ”

फिर हम दोनों कमरे के अंदर गए और सकीना ने अपनी साड़ी को खोलना शुरू किया। मेने भी झट से अपनी पतलून निकाली और खड़ा लंड सकीना के सामने पेश करदिया। मेरे लंड को देखकर सकीना ने कहा , “वाह रे चिकने ! इतना लम्बा है तेरा , लगता है आज मज़ा आनेवाला है मुझे। ”

 

“चल अब जल्दी से चूस , बहुत वक़्त से बस तेरी बक बक सुन रहा हु। जितना नशीला जिस्म है तेरा , तुजे उतनी ही कम बाते करनी चाहिए। ”

मुस्कुराते हुए सकीना मेरे पास आई और मेरे लंड को अपने दोनों हाथो से पकड़ कर चूसने लगी। पहले उसने अपने मुँह के ज़्यादा अंदर नहीं लिया बस अपनी जीब से चाट रही थी , लेकिन फिर बस कुछ ही पल में वह लॉलीपॉप की तरह मेरा लंड चूसने लगी।

“आह… ” क्या मज़ा आ रहा था। ” क्या मस्त चुस्ती है रे तू सकीना बाई। ”

फिर सकीना ने अपने दोनों बुब्बो के बीच मेरा लंड लिया और हिलाने लगी। “ओ सकीना , क्या बुब्बे है रे तेरे। ”

“मज़े ले तू बस। ”

जब मुझसे रहा नहीं गया तो मेने सकीना को उठाकर बिस्तर पर फेखा और उसकी झंगो को फैलाकर उसकी चुत में अपना लंड डाल दिया। सकीना कराने लगी , “आरामसे डाल , बहुत बड़ा है तेरा। ”

 

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पर मैं होश में नहीं था मुझपर बस सकीना को चोदने का जूनून छाया हुआ था और मैं उसे टपा टप चोदता रहा। सकीना भी मज़े ले रही थी , “तेरा लंड काफी गहरा जा रहा है रे , बहुत मज़ा आ रहा है अब। ”

फिर मैं उसकी चुत के अंदर ही झड़ गया और उसके पास लेट गया।

सकीना मुझसे बोली , ” कल आएगा वापस ?”

“कल ? कल तो में एक ज़रूरी काम से बहार जा रहा हु। ”

“मेरी आदत नहीं लगी तुजे ?” हस्ते हुए सकीना ने पूछा

“हम्म , बहुत नशीली है तू। आऊंगा जल्दी वापस , लेकिन कल मुझे एक नाज़ुक सी चिड़िया को पकड़ना है। ”

“चिड़िया से क्यों खेलता है रे मेरे बाज़। अब तो तूने भरा हुआ गोष चख लिया है। ”

मैं बस मुस्कुराया और अपने कपडे पहेँलिए। सकीना को पैसे देकर मैं वहा से निकल गया और सुबह की तयारी में जुट गया।

मेने एक प्लान बनाया था इस लड़की आशा को फास्कर उसका अपहरण करने का , तो उसके कॉलेज के बहार जाकर मैं इंतज़ार करने लगा। कुछ देर बाद जब वह बहार आई तो मैं उसके पास गया और उससे एक पते की जानकारी पूछने लगा।

आशा ने बड़ी हड़बड़ाहट के साथ मुझे पता बताया और आगे बढ़ गई , वह किसी का इंतज़ार कर रही थी। उस वक़्त वहा कम लोग भी थे तो मोके का फायदा उठाकर मेने उसे ज़बरदस्ती अपनी गाड़ी में खींच लिया और गाड़ी भगाकर वहा से निकल गया।

वह गाड़ी में तो काफी छटपटाई लेकिन मेरे एक तमाचे ने उसकी अकल को ठिकाने लगा दिया , फिर मेने उससे कहा , “देखो बस कुछ ही घंटो में तुमहे छोड़ दिया जायेगा अगर तुम मेरा साथ दो। मुझे बस तुम्हारे बाप से कुछ पैसे चाहिए , जैसे ही वह पैसे भिजवाता है , मैं तुम्हे छोड़ दूंगा। ”

फिर मैं उसे अड्डे पर ले आया जहा और तीन मुश्तंडे मौजूद थे। एक बात मेने देखि की आशा की जवानी को देख उनकी लाल टपक रही थी , भूके भेडियो की तरह सेल उसे घूर रहे

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थे। मैं उसे चुप चाप अंदर वाले कमरे में बंद करने लगाया और तब उसने इशारा किया की मैं उसके मुँह पर लगी पट्टी हटा दू।

जैसे ही मेने पट्टी हटाई तो आशा ने मुझसे कहा , “तुम्हे और बहार खड़े तुम्हारे दोस्तों को देख कर मुझे ऐसा लग रहा है की…”

“बहार खड़े बन्दे मेरे दोस्त नहीं है और उन्हें तुम ना देखो तो ही अच्छा है , उनसे बचाने के लिए ही मैं तुम्हे यहाँ अंदर वाले कमरे में ले आया हु। ”

“हम्म। ”

“फ़िक्र मत करो , जल्दी ही तुम्हारा बाप आएगा और तुम्हे यहाँ से ले जायेगा। ”

मै बहार जाने लगा और तभी एक मुश्टण्डा अंदर आया , साला कम से कम ६ फुट लम्बा था। उसने मुझे बताया की ईश्वर भाई मुझे बुला रहा था और आशा की पहरेदारी उसे करने बोलै गया था।

जैसे ही मै बहार निकला उसने दरवाजा बंद करदिया और दूसरे दो जो बहार खड़े थे उन्हने मुझे पकड़कर बंद दिया और फिर वह भी अंदर चले गए। वह रक्षयाश की तरह हस रहे थे और आशा बिचारि चीख रही थी। मै छटपटाने लगा अपने आप को छुड़ाने के लिए , लेकिन मुझे बहुत कस कर बंधा था उन्होंने।

उनमे से एक ने मुझे कहा , “ऐसा चिकना हसीन गोष कौन छोड़ेगा रे। ऐसा मौका ज़िन्दगी में बस कभी कभी मिलता है , तू फ़िक्र मत कर हमलोग इसकी आरामसे से लेंगे। ”

फिर उसी ने आशा से कहा , “और तू , चुप चाप दे तो तुजे भी मज़ा आएगा , वर्ना खामखा तकलीफ तुजे ही होगी। ”

आशा को पता था की आगे क्या होने वाला था , किसी तरह वह अपना मन भी बना चुकी थी। हरामी मुश्टंडो ने अपने कपडे उतारे और आशा का चीरहरण शुरू करदिया। जैसे ही उसकी गोरी गोरी चूचिया दिखी तो उनमे से एक ने उसके गुलाबी निप्पल को अपनी उंगलियों के बिच मसला और आशा की चीक निकल आई। मेने उन्हें कहा , “मादरचोदो आराम से ठोके। ”

 

वह तो बस हस रहे थे और आशा के नंगे बदन का मज़ा ले रहे थे। एक ने अपना लंड आशा के मुँह के पास करदिया और अपना घोड़े जैसा बड़ा लंड उसे चूसने कहा। आशा ने धीरे धीरे उसका लंड अपने मुँह में लिया।

दूसरा अपना लंड खुद हिला रहा था आशा की चूचियों को दबाते हुए और तीसरा उसकी चुत चाट रहा था। चुत चाटने वाले ने आशा से पूछा , “मज़ा आरहा है ना ?”

आशा तो कुछ कहने की सिथि में नहीं थी क्युकी वह लंड चूसने में मग्न थी।

फिर उन्होंने आशा को कुतिया की तरह चार पेरो पर झुका दिया और उसकी चुदाई शुरू करदी , एक ने अपना लंड पीछे से उसकी चुत पर मसल कर अंदर डाला। दूसरा अब अपना लंड चुसवा रहा था और तीसरा तो आशा की गांड मरने की तयारी में था।

वह आशा के गांड के छेद पर अपनी थूक लगाकर अपनी ऊँगली धीरे धीरे अंदर डाल रहा था।

उस वक़्त जब मेरी नज़र आशा से मिली तो मेने उसके अंदर भी एक हवस की झलक देखि , उसे मज़ा आ रहा था। भोली भली आशा शायद जैसी दिखती थी वैसी थी नहीं।

फिर उस मुश्तंडे ने आशा की गांड में अपना लंड डाला और आशा जोर से चीखी। उन्हें आशा के दोनों खड़ो को चोदने के लिए अपनी position change करनी पड़ी।

एक बन्दे ने आशा को पीछे से अपनी गोद में ले लिया और उसकी गांड मरने लगा और दूसरा उसके पेरो को फैलाकर उसकी चुत मार रहा था।

तीसरा बंदा आशा के हाथो से अपना लंड हिलवाकर उसकी चूचिया दबा रहा था। आशा  अपनी आखे बंद कर कराह रही थी , ज़ोर ज़ोर से , “आह आह उफ़ , आह… ”

वो तीनो बहुत ही ज़बरदस्त तरीके से आशा की लेते रहे और जब झड़ने की बारी आई तो तीनो ने अपनी पूरी मलाई आशा के ऊपर निकालदी। आशा पूरी तरह से उनकी मलाई में भर चुकी थी , और अपने कपडे पेहेन रही थी। तीनो मुश्तंडे वहा से चले गए और बस मैं और आशा ही वहा थे।

“तुम ठीक हो ?” मेने उससे पूछा

“हाँ , मैं ठीक हु। ”

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तभी मुझे message आगया की आशा के पापा ने पैसे भिजवादिये थे। मेने उसे ये बात बताई और हम वहा से गाडी में निकल पड़े। “तुम्हे कही चोट तो नहीं आई ना ?”

वह मुस्कुराने लगी और मुझे बहुत अजीब लगा , ये बात का यकीन होचला अब की मासूम सी खरगोश दिखने वाली आशा अंदर से कुछ और ही थी।

 

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तो आप सब अपना ख्याल रखिएगा। कोविड का सिचुएशन है तो अपना विशेष ख्याल रखिएगा। नमस्कार।

The End

 

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