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ताका झांकी से शुरू हुई चुदाई

खिड़की – ताका झांकी से शुरू हुई चुदाई।

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निरंजन और भक्ति दोनों की बस कुछ दिन पहले ही शादी हुई थी , उन्होंने शहर से दूर एक छोटे से गांव में एक प्यारा सा मकान ख़रीदा था। दोनों को देख कर ऐसा लगता था की वह बस एक दूसरे के लिए ही बनाये गए थे। एक सुन्दर और प्रेमी जोड़े का बेहतरीन उद्धरण थे वह दोनों। पर वह कहते है न , जैसा दीखता है वैसा अक्सर होता नहीं।

मेरा नाम है टीटू और में निरंजन भइया और भक्ति भाभी के घर पर काम करता था।

शुरवात के दिनों में ये बात तो ज़ाहिर थी की भइया भाभी की रोज़ जम कर चुदाई करते थे। कमरा बंद ही रहता था सुबह के ९ बजे तक और अंदिर से “उफ़ आ आइए…” आवाज़े आती रहती थी।

भाभी थी भी तो इतनी करारी की रोज़ चोदने का मन करता ही होगा भइया का।

अगर सच्च बात बताऊ आपको तो मेरा भी बहुत मन करता था भाभी की चुत मारने का। पर पाप लगने के डर से मैं अपने ऐसे खयालो को मारतारहा, ऐसे पावन जोड़े के साथ ऐसा कुछ करने की सोचना भी पाप था।

एक दिन हुआ यु की मैं रोज़ की तरह काम पर आगया और कमरे के अंदर चुदाई चल रही थी। मेरा मन मन नजाने क्यों बहुत ज़्यादा विचलित होने लगा। मैं अपने मन को मारने की पूरी कोशिश कर रहा था और तब मेरी नजर पड़ी खुली हुई खिड़की पर। मेने देखा की किस तरह भइया भाभी की ले रहे थे।

उन्होंने भाभी के दोनों हाथो को पलग के खुटे से बंधा हुआ था, जैसे ही मेने ऐसा नज़ारा देखा तो मैं तुरंत ही भाग कर खिड़की के पास चला गया। कमरे के अंदर तो बहुत ही अजीब सा खेल चल रहा था , भइया ने अपने चहरे पर एक काले रंग का नकाब पहन रखा था। भाभी का मुँह भी रुमाल ठूस कर भइया ने बंद कर दिया था। निरंजन भइया के हाथो में एक काले रंग का नकली लंड भी था और उनका लंड भी पूरी तरह से खड़ा था।

ऐसी विचित्र चुदाई का खेल मेने अपनी ज़िन्दगी में पहले कभी नहीं देखा था। मै तो बोहोचका था की अंदर चल क्या रहा था, तभी अचानक मेरे हाथो में पकड़ी ख़र्ची गिर गई

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और उसके शोर से भइया और भाभी रुक गए। खिड़की में उन्होंने मुझे झाकते हुए पकड़ लिया। उस वक़्त मेरे जिस्म का पूरा खून सुख गया था।मै डर के मारे दोबारा रसोई में चला गया और बस कुछ ही पलो में भइया बहार आये और मुझसे पूछा , “टीटू , कब से कर रहा है ये ताका झांकी ?”

मैं भइया के पेरो में गिर पड़ा और माफ़ी मांगने लगे , “मुझे माफ़ करदो , बस आज ही ये भूल हुई है मुझसे। ”

“अरे बेटा ऐसे कैसे भूल होगई तुजसे , अब भूल हुई है तो सज़ा भी मिलेगी। ”

मैं रोता रहा और भइया मुझे घसीटते हुए कमरे के अंदर लेकर गए।

कमरे में भाभी पूरी नंगी थी और वह एक अजीब से यन्त्र को तयार कर रही थी। दोनों ने मिलकर मुझे उस यन्त्र पर बन्द दिया, मैं रोते रहा बिलकता रहा , लेकिन दोनों ने मेरी नहीं सुनी और फिर मेरे कपडे खोलने लगे। उस वक़्त में भी भाभी को नंगा देख कर मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा होगया था। मेरे लंड को देख कर भाभी बोली , “निरु देख रहे हो लोंडे का लंड , मेरी चूचियों को देख कर कैसे तना हुआ है। ”

“हाँ बिलकुल , मुझे वैसे इसपर शक था ही। चलो आज इसे ज़रा जनत की सेर कराते है। ”

फिर भाभी मेरे सामने अपनी चूचियों और चुत को मसलने लगी और मुझे ललचाने लगी। उस पल मुझे ऐसा लग रहा था जैसे की में उसकी चुत में अपना लंड डालू और जम कर चोदू। मैं अपने खयालो में डूबा रहा और अचानक से भइया ने मेरे लंड को पकड़कर मेरे गोटो को बंद दिया। मैं चीखने की कोशिश कर रहा था लेकिन उन्होंने मेरे मुँह में भी एक बेल्ट से बंदी हुई छोटी से गेंद डाल रखी थी।

भाभी ने मुझसे कहा , “टीटू भाईसाहब झड़ना नहीं है , वर्ना चाकू से लंड काट दूंगी आपका।”

ओह्ह! , वह सुनकर तो मेरे पसीने छूट गए। लेकिन भाभी ? वह तो मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। उस वक़्त मुझे डर के साथ साथ बहुत ज़्यादा हवस का भी अनुभव हो रहा था , मैं चुसाई के पुरे मजे लेने लगा।

हलकी मदहोशी में खोता हुआ मैं अचानक से मुझे महसूस हुआ की पीछे से कोई मेरी गांड सेहला रहा था। जब आँख खुली तो भइया सामने तो नहीं थे , तो मैं समझ गया की आगे मेरे साथ क्या होने वाला था। मेने उन्हें रो रो कर कहने की कोशिश की ऐसा अनर्थ मेरे साथ मत करो , लेकिन उन्होंने मेरी नहीं सुनी।

सामने से अब भाभी मेरा लंड चूस रही थी , जिसका मुझे कोई अफ़सोस नहीं था , लेकिन पीछे से भइया मेरी लेने की पूरी तयारी कर चुके थे।

भइया ने मेरे गांड के छेद को तयार कर कर अपना लंड धीरे धीरे अंदर डाला और भाभी मेरे सामने झुक गई और मेरा खड़ा लंड अपनी चुत में ले लिया।

भाभी की गीली और मजेदार चुत को मारते हुए मैं तो उनकी चुत में ही झड़ गया और भइया मेरी गांड में। फिर उन्होंने मेरा मुँह खोला और मुझसे भाभी ने कहा।

आजसे तेरा प्रमोशन हो चूका है , अब घर के काम के साथ साथ तू हमारी और भी सेवा करेगा। मेने दोनों से दरख्वास्त की लेकिन उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी और भइया ने मुझे एक लम्बी सी छड़ी दिखाई और कहा , “अगर तूने ज़्यादा छू चा की तो तुजे इस छड़ी से सजा मिलेगी। ”

उस छड़ी को देख मैं उन दोनों की बात मान गया और उन्हें साथ रोज़ रोज़ चुदाई करने लगा। कभी भइया भाभी की चुत मारते और कभी मैं , कभी भइया मेरी गांड मारते और कभी अपनी मुझसे मरवाते थे। उनके इस हवस के खेल का मैं पूरी तरह से हिस्सा बन चूका था।

एक दिन दोनों को सुझा कुछ अलग करने का और भाभी ने मुझसे कहा , “टीटू देख अब मज़ा नहीं आ रहा तेरे साथ , एक काम कर आज पानी भरने जायेगा तब गांव की किसी सुंदर सी लड़की को भेहलाफुसला कर ले आ।“

तो मैं घर से निकला किसी कमसिन कली की तलाश में , जब मैं नदी के किनारे आया तो वहा सभी औरतो का जमावड़ा लगा हुआ था। सभी के जिस्मो को मैं दूर से घूरने लगा , गांव की औरतो का शरीर काफी सुडोल था , क्युकी वह काफी मेहनत किया करती थी। पर मुझे मुलायम , नरम जिस्म की तलाश थी और तब अचानक मेरी नज़र पड़ी मानसी पर।

भोली काकी की भतीजी जो छुटियो के दिन गांव आई थी। उसका जिस्म अनछुए लग रहा था मुझे , मैं पास गया और सभी से बात चीत हुई। मुझपर किसीको शक नहीं हो सकता था , क्युकी मैं गांव में सभी के साथ प्रेम से रहता था।

मेने बातचीत करकर मानसी को फसा लिया और भोली काकी को भी , बस जाते वक़्त एक छोटी सी गड़बड़ मुझसे होगई। रस्ते में मुझे अलका मिली और मुझसे हाल चाल पूछा , लेकिन उसकी नजर मेरे खड़े लंड पर पड़ गई।

“”टीटू तू ये मानसी को लेकर कहा जा रहा है ?”

“भइया भाभी के पास , उन्होंने इससे बुलाया है , शायद कोई काम देने वाले है इससे। ”

“अच्छा , ठीक है फिर बाद मे मिलती हु तुजसे। ”

अलका अपने रास्ते चली गई और मै मानसी को लेकर घर आगया। भइया और भाभी की नज़रे मानसी को देख कर चमक उठी थी , भाभी ने मुझसे कहा , “इसकी तो किसी ने आज तक सील भी नहीं तोड़ी होगी। ”

“हाँ भाभी बहुत भोली है ये। ”

भइया ने मानसी से पूछा , “बेटी तुम एक मज़ेदार खेल खेलना चाहोगी। ”

“खेल ? हाँ ज़रूर। ” मानसी ने ख़ुशी से कहा।

फिर हम चारो अंदर वाले कमरे में गए जहा भइया और भाभी अपने चुदाई यन्त्र रखते थे। जैसे ही मानसी ने उन सारि चीज़ो के देखा , उसकी आखे चमक उठी और उसने हमसे कहा , “अरे ये सारे यन्त्र तो मेने पोर्न मूवीज मे देखे हुए है। ”

जैसे ही उसने ये बात कही हमसब हैरान होगये।

और फिर आगे मानसी से कहा , “अच्छा तो ये वाला खेल खेलना है ? और जिस सील की आप बात कर रहे हो न भाभी , मेने दो साल पहले ही तुड़वाली थी। मै बस शकल से भोली भाली लगती हु। ”

मानसी की बात सुनकर सबके चेहरे चमक उठे और फिर भाभी मानसी के पास आकर उसे चूमने लगी। भइया भी मानसी के पास गए और उसकी चूचिया दबाने लगे। दोनों पति पत्नी मानसी के जिस्म के मज़े ले रहे थे और मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चूका था।

मेने अपनी लंगोट को खोल दिया और अपना खड़ा लंड बहार निकालकर हिलाने लगा। फिर दोनों ने मानसी के कपडे खोले और भाभी नीचे झुककर मानसी की चुत को चाटने लगी। मानसी आह भर रही थी और भइया उसकी चूचियों को पीछे से दबा रहे थे।

भइया का खड़ा लंड अब मानसी के गांड के छेद में घुसना चाहता था और भाभी चुत चटाई के बाद नकली लंड को पहने लगी।

मानसी अपनी आखे बंद करके मज़े ले रही थी , उस वक़्त मेने सोचा की साला ये चूज़ी तो बहुत बड़ी चुदकड़ निकली। भइया ने उससे उठाकर बिस्तर पर लेटा दिया और भाभी उसकी टंगे खोलकर उसकी तंग चुत में वह नकली लंड डालने लगी।

भाभी ने फिर मानसी को चोदना शुरू किया और भइया उसके मुँह में अपना लंड देकर चुसाई का मज़ा लेने लगे।

मानसी को बहुत मज़ा आ रहा था और मुझे भी। मेने सोचा की जब पति पत्नी का चोदना होजायेगा तो में भी मानसी की रास्ते में खेतो के बिच लैलूंगा।

भाभी ने नकली लंड चुत से बहार निकालकर उसे उतार दिया और मेरी तरफ देख कर कहा , “टीटू महाराज चलो आज तुम्हारे भइया को तंग चुत के मज़े लेने दो और तुम आकर मेरी चुत मारो। ”

मै ख़ुशी ख़ुशी भाभी के पास चला गया क्युकी मुझे चुत की सख्त ज़रूरत थी। भाभी की गीली चुत में मेने अपना लंड डाला और उनकी चूचिया दबाते हुए उन्हें चोदता रहा।

वहा गांड मारने के शौकीन भइया अब मानसी की छोटी सी गांड के फाटक को खोलकर उसकी गांड के छेद को चाटने लगे। मानसी मज़े से कराह रही थी , “आह , उफ़ , आह…”

चाटने के बाद उन्होंने अपना खड़ा लंड धीरे धीरे मानसी की चुत में डालना शुरू किया तो मानसी की चीख निकल गई। “आह…”

भइया ने मानसी से कहा , “बस थोड़ी देर ही दर्द होगा तुजे , उसके बाद मज़े ही मज़े देगा मेरा लंड। ”

मानसी बस मुस्कुराई और भइया धीरे धीरे उसकी गांड मारने लगे। भाभी भी चुदाई के मज़े लेलेकर उछाल रही थी मेरे लंड पर। भाभी ने कहा , “टीटू , चल अब में झुक रही हु , तेरे लिए कुतिया बन रही हु। पहले मेरी गांड को सुंग और फिर अपना लंड मेरी गांड के छेद को चाटकर अंदर डाल। ”

जैसा भाभी ने कहा मेने वैसा ही किया और बहुत ज़यादा मज़ा आया। ताबड़तोड़ चुदाई चल रही थी और तभी अचानक घर के दरवाजे पर ज़ोर से दस्तक हुई।

उस वक़्त हम सब रुक गए और भइया दरवाजे की तरफ बड़े। उन्होंने अपने कपडे पहने थे , हम मे से किसी ने भी नहीं।

जैसे ही भइया ने दरवाजा खोला तो उन्होंने देखा की बहार अलका आई थी मुझे और मानसी को ढूंढ़ते हुए , कोई बहाना बनाते हुए भइया ने उसे वहा से भगाने की कोशिश की लेकिन वह तो घर के भीतर घुस गई और हमे उस हाल में देख लिया।

हम परेशां थे और सभी खामोश , भइया ने फिर अलका से कहा , “तुम्हे किसी को कुछ भी बताने की कोई ज़रूरत नहीं है , तुम्हे जो चाहिए बस मांगलो। ”

अलका ने जवाब दिया , “मुझे बस चुदाई चाहिए। ”

हम सभी ने एक दूसरे की तरफ देखा और दोबारा ज़बरदस्त चुदाई शुरू हो गई।

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One thought on “ताका झांकी से शुरू हुई चुदाई

  1. jo housewife aunty bhabhi mom girl divorced lady widhwa akeli tanha hai ya kisi ke pati bahar rehete hai wo sex or piyar ki payasi haior wo secret phon sex yareal sex ya masti karna chahti hai .sex time 35min se 40 min hai

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