माँ-बेटे की चूतफाड़ चुदाई की कहानी

ये मेरे और मेरे मां के बीच की सच्ची घटना है। मैं अभी 24 साल का हूं, लेकिन जब मैंने पहली बार अपनी माँ को चोदा तब मैं मात्र 14 साल का किशोर लेकिन एक जवान लड़का था, और उस समय वह 36 साल की थी।

मेरी माँ की शादी 22 साल की उम्र में हो गई थी लेकिन तब मेरे पिताजी की उम्र 36 साल थी। मेरी माँ लगभग 5 फुट 4 इंच की छरहरी काया की मल्लिका हैं। दूध सी सफेद चमड़ी, और झील सी हरी और नीली मिलती हुई आँखें। केले के तने की तरह भरी हुई चिकनी मखमली जांघेसुडौल गांड, पतली कमर और बिल्कुल गोलमटोल चुचियों से भरा शरीर स्वर्ग की किसी अप्सरा से कम नहीं हैं। और इन सबसे खास उनकी पांव। जांघो से लेकर उनके पांव तक मखमली चमड़िया देखकर कोई भी पागल सा हो जाता है। उनके पांव छोटे मध्यम आकार के हैं और उसके तलवे काफी नरम हैं। वो सबसे ज्यादा अपने पैरों का ख्याल रखती है।

मैं जब 12 साल का था तब मैं अपनी माँ-पापा को चुदाई करते हुए पहली बार देखा था। और जब मैं देखा उस वक़्त मेरी माँ विस्तर पर नंगी लेटी हुई थी और आँखें बंद थी मुँह से एक अजीब सी कामुक कराह की आवाज निकाल रही थी और पापा मेरी माँ के एक पैर के उंगलियों को मुंह मे लेकर चूस रहे थे। फिर पूरे पांव को अपनी गीली जुबान से चाटते हुए मेरी माँ के जांघों को सहला रहे थे। मेरी माँ बदन को ऐंठते हुए दोनों हाथों से चादर को भींच रही थी। फिर  मेरे पिताजी मेरी माँ को

किस करते हैं, दोनों एक दूसरे को बेतहाशा चुम रहे थे। थोड़ी देर ऐसे ही चुम्मा चाटी करने के बाद मेरे पापा माँ के पैरों के बीच आ गए। और माँ के पैरों को फैला दिया। मुझे साफ दिख रहा था मेरी माँ के चुट9 पर एक भी बाल नहीं थे। उनका चूत बिल्कुल गोरा खूबसूरत था। और उसमें ब्राउन कलर का उनका चूत का दाना बहुत बड़ा थ जो बिल्कुल ऊपर निकला हुआ था। मेरी माँ की चूत गीला था और रोशनी पड़ने के कारण पानी की वजह से चमक रहा था। फिर पापा अपना लंड माँ के चूत पर लगाए और घुसेड़ दिया और घपा-घप चोदने लगे। मेरी माँ को बहुत मजा आ रहा था वो भी गांड उठा-उठा के चोदवा रही थी। और पापा को चोदने को बोल रही थी। लगभग 8-10 धक्कों के बाद पापा शांत हो गए। लेकिन तभी मैंने देखा माँ पापा को गाली देने लगी कि साले भड़वे जाकर दवाई क्यों नहीं कराता हिजडें की तरह 4 धक्के मारकर लुढ़क जाता है। तुम बूढ़े से शादी करके मेरा जीवन बर्बाद हो गया। आज तक कभी लगा ही नहीं कि मैं अपनी चूत चुदवाई हूँ। एक तो साला मादरचोद तुम्हारा लंड खरगोश की तरह छोटा सा है। ऊपर से लंड में चुदाई करने का दम नहीं है । तो साले क्यों मेरे शरीर मे आग लगाता है। साला हिंजड़ा। ये बोलते हुए माँ पापा को धक्का देकर एक तरफ गिरा देती है। और गुस्से में उठकर बाथरूम में चली जाती है।

पापा तो जैसे स्टैच्यू की तरह चुप थे। मुझे पापा पर बहुत तरस आ रहा था और माँ का गाली देना मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आया था। फिर पापा का लंड सिकुड़ कर 2 इंच का हो गया। और वो सो गए।

माँ का बाथरूम में चूत में ऊँगली

लेकिन माँ बाथरूम में जाकर टॉयलेट सीट पर बैठ गई। मेरा बाथरूम का दरवाजा शीशे का पारदर्शी है। और अंदर से पर्दा लगा हुआ है। लेकिन उस समय पर्दा नही लगा हुआ था, माँ ने पर्दा नहीं लगाया था। वो बिल्कुल नंगे थी। और अपना दोनों हाथ सर पर रखकर टॉयलेट सीट पर बैठी हुई थी। थोड़ी देर ऐसे ही बैठी रही। और फिर वो अपने चुचियों को सहलाने लगी। फिर एक हाथ नीचे ले गई और अपने पैरों को फैला दी। फिर हाथों से अपने चूत को मसलने लगी। उनके मुँह से सिसकारियां निकलने लगा। फिर वो अपनी 4 उंगलियों को चूत में घुसा दी और जोर जोर से अंदर बाहर करने लगी। उनकी आँखें बंद थी। और चहेरे पर कई तरह के एक्सप्रेशन दिख रहे थे। वो इसी तरह 10 मिनट तक अपनी चूत में उंगलियों से चोदती रही फिर उनके चूत से भी तेज तेज फच फच की आवाज आने लगी। और ये क्या ऐसा लगा जैसे मम्मी मुत रही है। उनके चूत से ढेर सारा पानी प्रेसर से निकलने लगा वह लगातार और जोर जोर से उंगलियों से अपनी चूत चोदने लगी। वह आहहहहहहहहहहहहहहहह आहहहहहहहहहहहहहहह सी सी की आवाजें निकाल रही थी। उनका पूरा बदन कांप रहा था। और फिर मम्मी शांत हो गयी वो अपने उंगलियों को चूत से निकाल ली थी और पीछे की तरफ दीवार के सहारे बैठ गईं। उनकी आंखें बंद थी। लेकिन चेहरे पर एक अनदेखी मुस्कान थी। जो खुशियों को बयां कर रही थी। उनके पैर अभी भी फैले हुए थे। और चूत से पानी अभी भी निकल के टपक रहा था। उनके चूत से बिल्कुल लसलसा गाढ़ा पानी निकल रहा था। थोड़ी देर ऐसे ही लेटने के बाद वो उठी और अपने बेडरूम में चली गई। मैं भी अब अपने बेडरूम में आ गया।

अब मैं रोज माँ को बाथरूम में नहाते तथा उंगलियों से तो कभी गाजर मूली से चूत को चोदते हुए देखता था। अब मुझे भी कुछ कुछ होने लगा था। मैं मोबाइल में इंटरनेट पर ये सब ढूंढना शुरू किया। तो मुझे पॉर्न साइट मिला अब मैं रोज ब्लू फिल्म भी देखने लगा।

ऐसे ही करीब 2 साल बीत गए। अब मैं बड़ा हो गया थ। और मुझे इनसब के बारे में काफी जानकारी हो गई थी।

माँ बाथरूम में फिसली लेकिन गिरी बेटे की लंड पर

एक दिन मेरी माँ बाथरूम में नहा रही थी मैं TV देख रहा था। तभी माँ फिसलकर गिर गई। और जोर से चिलाई। मैं भागे भागे देखने गया तो वो दर्द से कराह रही थी। उनके कमर और पैरों में चोट लगा था वो बिल्कुल नंगी बाथरूम के फर्श पर पड़ी हुई थी। उनके आँखों मे आंसू थे। मैंने कहा क्या हुआ माँ तब मेरी माँ ने मुझसे कहा कि बेटा मुझे सहारा दो। मैंने अपनी कंधों के सहारे माँ को उठाया तब उनकी कड़क गोल-मटोल चुचियाँ मेरे छाती से टच हो रहे थे। और फिर में उन्हें लाकर बिस्तर पर लेटा दिया।

वह चादर से खुद को ढक ली और वह बोली कि ड्रावर में ट्यूब है ले आओ और मेरे पैरों पर अच्छे से मालिश कर दो। मैं उनके पैरों को अपने गोद में लेकर हल्के हाथों से मालिश करने लगा, उनकी पैर मेरे लंड को टच कर रहे थे जिस कारण मेरा लंड सख्त हो गया और मेरे कैप्री (हाफ पैंट) में उसका उभार साफ दिखाई दे रहा था। मेरे लंड के स्पर्श से मेरी माँ भी उतेजित होने लगी थी। अब उनका दर्द कम हो रहा था। लेकिन चूत की गर्मी बढ़ रही थी।  मैंने देखा कि मेरी माँ आंखे बंद करके अपने

निचले होंठो को दांतो से काट रही है और मजे ले रही है। तो मैंने मां के पैरों को हल्का सा उठाया और कोमल उंगलियों पर चुम लिया। मेरी माँ लगातार आंखें बंद करके मजे ले रही थी, ये देखकर मेरा हौसला बढ़ा और मैंने माँ के पैर के उंगलियों को मुँह में लेकर चूसने लगा । फिर पूरे पाँव को अपनी गीली जुबान से चाटने लगा। मेरी माँ सिसकारियां भरने लगी और ओहहहहहहहहहहहहहहहह आहहहहहहहहहहहहहहहहह की आवाज निकालने लगी। मैं उनकी कोमल पांव को चाटते हुए सूंघ भी रहा था बहुत मजेदार खुशबू थी। मैं तो पागल होता जा रहा था। फिर उन्होंने कहा कि बेटा कमर में भी बहुत दर्द हो रहा है। जरा बाम कमर पर भी लगा दे। और फिर वो पेट के बल लेट गई। मैंने कहा चादर के ऊपर से कैसे लगाऊं। तो उन्होंने कहा कि चादर हटा दी बेटा। फिर मैं जैसे ही चादर हटाया उनकी सुडौल गोल-मटोल  गोरे गांड मेरे सामने थे। उनकी दोनों पैर बिल्कुल चिपके हुए थे जिस वजह से गांड में दरार साफ और बहुत खूबसूरत लग रहा थ। फिर मैं कमर पर बाम लगाने लगा।

मेरी उंगलियों के स्पर्श ने उन्हें उत्तेजित कर दिया था। वो अब सिसकारियां ले रही थी और लंबी लंबी साँसे भी। अब वो धीरे धीरे यपने पैरों को फैला रही थी। जिससे कि उनकी चूत नजर आने लगी थी। फिर उन्होंने कहा कि बेटे मेरे जांघो पर बाम लगा दे। और फिर वो और भी अपने पैरों को चौड़ा कर दी। अब उनका चूत पीछे से साफ दिख रहा था। मैं बाम से उनके जांघो को मालिश कर रहा था। मेरा तो लंड तम्बू बन गया था इससे पहले मेरा लंड इतना कड़क कभी नहीं हुआ था। मैं उनके जांघो पर बाम लगाते हुए, उनके चूत तक अब उंगलियों को ले जा रहा था। फिर मैं अब और भी ज्यादा उंगलियों को उनके चूत पर टच करने लगा था। मम्मी को शायद बहुत मजा आ रहा था, वो अब मौन कर रही थी, सिसकारियां भर रही थी। और मदमस्त आवाज में आहहहहहहहहहहहहहहह आहहहहहहहहहहहहहहह की आवाजें निकाल रही थी। मेरी उंगलियां उनकी चूत को टच कर रही थी फिर भी वो मुझे मना नही5 कर रही थी। तो मेरा हौसला बढ़ गया अब मैं पूरा हथेली माँ के जांघो के बीच ले गया और चूत को रगड़ने लगा। वो तो जैसे पागल हो गई। बहुत तेज तेज आवाज में सिसकारियां लेने लगी। उनकी चूत गर्म हो गई थी और बिल्कुल गीली भी उनकी चुट से अब पानी रिसने लगा था। मैंने उनकी गांड के दरार को फैलाया और उनकी गोल छेद वाली बन्द गांड को भी सहलाने लगा। मैं कभी उनकी गांड तो कभी चूत के छेद को रगड़ रहा था। करीब 10 मिनट रगड़ने के बाद माँ चिलाई की बेटा जोर जोर से मेरी चूत रगड़ो। और मैं और भी जोर से रगड़ने लगा। और फिर माँ की चूत ढेर सारा पानी छोड़ दिया। मेरी माँ की चूत से पानी बह रहा था और पूरा बिस्तर गीला लसलसा हो गया। मेरी माँ अब शांत हो गई। और फिर धीरे से घूमी उनके चेहरे पर मुस्कान के साथ एक अलग चमक थी। उन्होंने उठा और मुझे अपने सीने से लगा लिया। उनकी कड़क चुचियाँ मेरे सीने में चुभ रही थी।

और इस तरह माँ-बेटे की चुदाई शुरू हुई।।

माँ ने कैसे मेरे लंड की प्यास बुझाई, और मेरे लंड से अपनी चूत की आग कैसे शांत की इसके लिए आपको अगले भाग में आना होगा।

तो माँबेटे की चुटफाड़ की सच्चाई जानने के लिए मिलते हैं अगले भाग में। तब तक के लिए दीजिए इजाजत। ………

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