विधायक जी की कुँवारी बेटी को चोदा। भाग-1

विधायक जी की कुँवारी बेटी के बाद बीवी को भी चोदा। भाग-1

 

हेलो दोस्तो, जैसा कि आपसब जानते हैं मेरा नाम बंटी है और एक बार फिर आपके लिए एक कहानी ले कर हाजिर हूं। मैं मथुरा का रहने वाला हूँ। और  ये कहानी मेरे क्षेत्र के विधायक के बेटी वन्दना और उसकी मॉम साक्षी की चुदाई की है।

 

 दरअसल विधायक जी 2 शादी किये थे। तो पहली पत्नी और उनकी बेटी गाँव मे रहती थी। तो वन्दना भी शुरू से ही शहर में पालीबढ़ी थी। लेकिन कुछ साल पहले विधायक जी दूसरी शादी कर लिए तो उनकी पहली पत्नी बेटी को लेकर गांव गयी। और यहीं रहने लगी।  वन्दना 18 साल की मस्त चुलबुली लड़की थी। उसकी फिगर किसी हेरोइन से भी ज्यादा अच्छी थी 30-26-32 कि भरे बदन, पतली कमर, और विशाल गांड किसी को भी दीवाना बना देती थी। https://nightqueenstories.com

 

वो बेहद गोरी और सुंदर है। चुकी वो बचपन से शहर में रही और पली बढ़ी तो उसे मॉडर्न ड्रेस पहनने का बहुत शौक है।

 

तो दोस्तों वन्दना गांव में आ तो गई थी लेकिन वह बहुत रिजर्व रहती थी घर से बाहर नही जाती थी। मेरा घर उसके घर के पीछे था।

मैं वन्दना के घर आता जाता था। गांव में वन्दना का एक मात्र दोस्त मैं ही था। उसकी मॉम भी मुझे घर आने से मना नहीं करती थी। चुकी यहाँ हमदोनों का ही घर था बाकी सभी घर थोड़ी दूरी पर थे। इसलिए उनका भी दोस्ती और आना जाना सिर्फ मेरे घर ही था। मैं धीरे धीरे वन्दना को पसंद करने लगा था। हम साथ मे बातचीत करते और समय बिताते थे।

 

वन्दना का खेत तो बहुत था लेकिन वो लोग को खेती से कोई मतलब नही था। घर के आस पास ज्यादातर खेत वन्दना का ही था और कुछ मेरा था। हमारी खेतों में हम खुद खेती करते थे। और घर के आस पास के वन्दना के खेतों में भी मेरे पिताजी ही खेती करवाते थे।

 

वन्दना कभी कभी मेरे साथ खेतों में घूमने भी चली आती थी। हमारे खेतों में बहुत मोर थे। और वन्दना को मोर बहुत पसंद थे। ठंढी का मौसम था और खेतों में गेंहू लगे हुए थे। गेंहू बिल्कुल हरे भरे थे। उस दिन मैं और वन्दना साथ मे घर के बाहर में बैठे हुए थे। जनवरी के महीना था। जबरदस्त ठंढी के साथ चारो तरफ घना कोहरा था। और मैं 2 दिन पहले खेतों में जब गया था तो मोर के बच्चे देखे थे। वो एक घोंसले में थे। अभी उनके पंख भी ठीक से नहीं आए थे। तो मैं वन्दना से बोला

 

मैंवन्दना तेरे को मोर बहुत पसंद है ना?

 

वन्दना –  हाँ मुझे मोर बहुत पसंद हैं। लेकिन मैं कभी पकड़ी नही हूँ। मैं कभी मोर को पकड़ के गोद मे लेकर देखूंगी।

 

मैं-: तुम्हे एक बात बताऊँ खेतो में एक घोंसले में मोर ने बच्चे दिए हैं। 4 बच्चे है। अभी बहुत छोटे हैं। शायद कुछ दिनों के ही हैं। तुझे देखना है, तो मेरे साथ खेत चल।

 

वन्दना तैयार हो गई और अपने मॉम से बोल के आयी कि मैं खेतों में मोर के बच्चे देखने जा रही हूँ। उसकी माँ मना कर रही थी कि बाहर बहुत ठंढ और कोहरा है मत जा लेकिन वो नही मानी और मेरे साथ चल दी। खेतों में जाने के बाद मैंने उसे मोर के बच्चे दिखाए वो उसे गोद मे उठा कर खूब प्यार की। वो मोर के बच्चे को घर ले जाना चाहती थी। लेकिन मैंने बोला कि अभी बहुत छोटा है अगर मर गई तो पाप लगेगा इसलिए बड़ा होने दो। तो वो रख दी। फिर हम खेतों में घूमने लगे। मेरे और उसके खेतों में चौड़े मेड बने हुए हैं और रोड भी। तो चलने में परेशानी नहीं होती है। खेतों के बीच एक झोपड़ी जैसी बनी हुई है जिसमें गद्दे भी लगे हुए हैं वहाँ मेरे पिताजी रात को सोते हैं। तो हम घूमते हुए वहाँ पहुच गए। अंदर चौकी पर गद्दा लगा हुआ था और रजाई भी था। तो वन्दना चौकी पर बैठ गई। वो ऊपर तो स्वेटर पहनी थी लेकिन नीचे मिनी स्कर्ट पहने हुए थी। उसे शॉर्ट्स कपड़े बहुत पसंद थे। इसलिए वो ठंढी में भी शॉर्ट्स ही पहने रहती थी। https://nightqueenstories.com

वन्दना की गोरी और मोटी नंगी जांघे देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया

जब वो चौकी पर बैठी तो उसकी गोरी और नंगी जांघे देखकर मेरे मन मे हवस का शैतान जाग गया। उसकी टांगे बहुत खूबसूरत थी। 

 मैं खड़ा था और मुझे बहुत ठंड लग रही थी। मैं थोड़ा कांप भी रहा था। तो वन्दना बोली कि तुम कांप रहे हो। तुम्हे ठंड लग रही है। तुम थोड़ी देर रजाई में बैठ जाओ।

 

तो मैं ऊपर चौकी पर रजाई में घुस गया और लेट गया।

 

वन्दना बैठी हुई थी। मैंने बोला कि वन्दना तुम भी पैर ऊपर कर लो और रजाई से ढक लो थोड़ी देर। फिर घर चलेंगे। तो वो बोली कि मेरे पैरों में गेंहू और घास पर से ओस लग गए है। रजाई गद्दा गीला हो जाएगा। तो मैंने बोला कि सामने देखो पापा का तौलिया है उससे पोंछ लो। पापा तौलिया यहीं रखते थे क्योंकि वो सुबह यहीं ट्यूबवेल से नहाकर जाते थे। तो वन्दना उठी और बारी बारी से दोनों पैरों को चौकी पर रखकर साफ की। फिर ऊपर आकर रजाई में पैर डाल ली। उसकी गोरी और मोटी जांघे देखकर आज मेरे लंड में हलचल हो गया था। और जबसे मैं रजाई में घुसा था मेरा लंड खड़ा हो गया था।

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थोड़ी देर बात करने के बाद वन्दना खुद ही लेट गई। अब हमदोनों एक ही रजाई में साथ थे। लेकिन तकिया एक ही था तो साथ मे एक ही तकिया पर सर रखकर सो गए।

मैं वन्दना की पैंटी साइड से हटाया और अपना लंड उसके गांड पर रगड़ने लगा।

करीब आधा घंटा हो गया था। और बात करते करते वन्दना को नींद आ गया। लेकिन मेरा हाल तो बुरा था। मेरा लंड लगातार खड़ा था। मैं अपने हाथों से लंड को मसल रहा था।

 

कुछ देर बाद मैं वन्दना के तरफ मुड़ा और उसकी बिल्कुल पास चिपक गया। क्या बताऊँ दोस्तों उसकी जिस्म बिल्कुल गर्म थी। फिर मैं उसकी स्कर्ट को ऊपर किया जो सिर्फ उसकी चूतड़ों को ही ढकती थी। और उसके गांड पर हाथ रख दिया। मैं बयान नहीं कर सकता उसकी गांड बिल्कुल मुलायल  थी। करीब 2 मिनट मैं ऐसे ही उसके चूतड़ों पर हाथ रखकर पड़ा रहा। जब देखा कि वो बिल्कुक नींद में है तो मैंने उसके पैंटी को नीचे सरकाने की कोशिश किया। लेकिन दबे होने के कारण नही हुआ।

 

तो मैं उसकी पैंटी साइड से हटाया और अपना लंड उसके गांड पर रगड़ने लगा। थोड़ी देर बाद उसकी नींद खुल गई और उसे जब अपने गांड पर कुछ एहसास हुआ तो हाथ पीछे की तो मेरा गर्म लंड उसके हाथ मे गया। वो चिल्लाकर उठी। और बेड से नीचे उतर गई। और बोली कि तुम क्या कर रहे थे। और रजाई हटा दी तो मेरा 6 इंच का लंड बिल्कुल उफान मार रहा था। तो वो चिल्लाने लगी कि छि तुम नंगे होकर क्या कर रहे हो

 

चलो घर मैं सबको बताती हूँ कि तुमने मेरे साथ क्या किया। मैं तो डर गया और फट से पैंट पहनकर उससे माफी मांगने लगा और बोला कि प्लीज किसी को मत बताना अब ऐसी गलती नहीं करूंगा। थोड़ी देर में वो मान गई। और बोली कि मैं घर जा रही हूँ। तो मैंने उसे बोला कि रुको थोड़ी देर मैं भी चलता हूँ। फिर वो मान गई। तो मैंने उसे फिर से चौकी पर बैठने बोला तो वो नहीं बैठ रही थी लेकिन काफी मनाने के बाद बैठ गई। हम करीब 5 मिनट चुप रहे फिर वो खुद बोली कि तुम ऐसा क्यों किए। तो मैंने उसे आई लव यू बोला। और बताया कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। पहले तो वो हैरान हुई फिर मैंने बताया कि जब तुम चौकी पर मेरे सामने बैठी तो मैं तुम्हारी गोरी और मोटी जांघो को देखकर बहक गया था।

मैं वन्दना के चुत पर अपना लंड लगाया तो वो सिहर उठी

फिर वो बोली कि क्या सच मे तुम मुझसे प्यार करते हो। तो मैंने कहा कि हाँ मैं तुम्हे अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता हूँ।

 

फिर हम बातें करने लगे अब मैं भी बैठा हुआ था। ये सब सुनकर वन्दना बहुत खुश हो गयी थी। और हम कब एकदूसरे को किस करने लगे पता ही नही चला।

 

फिर मैं उसे लेटाया और उसके बदन पर किस करने लगा। अब वो भी मजे ले रही थी। और फिर फाइनली मैं उसके पैंटी उतार दिया। और उसके चुत पर मुँह रख दिया। लेकिन वो फट से मेरा सर हटाई और बोली कि नही वहां मुंह मत लगाओ गंदा है। मैं तो उसकी चुत चाटना चाहता था जैसा कि ब्लू फिल्म में देखा था लेकिन वो तैयार नही हुई।

 

फिर मैं अपना लंड उसकी चुत पर लगाया तो वो सिहर गई और

आह्ह्ह्ह.. बंटी…, मत करो उम्म्ममम्मम्ममम्ममम्म बहुत दर्द होगा। https://nightqueenstories.com

 

लेकिन मैं वन्दना के चुत पर अच्छे से लंड सेट कर लिया।  फिर उसे एक ही धक्के में आधा लंड वन्दना की चुत में पेल दिया। वन्दना चीख उठी उसे बहुत दर्द हो रहा था। और मुझे भी ना जाने क्यों बहुत दर्द हुआ था। शायद मेरे भी पहली बार चुत में लंड डालने के कारण दर्द हो रहा था। फिर मैं जैसा सेक्स कहानियों में पढ़ा था। वैसे ही थोड़ी देर बिना हिले पड़ा रहा फिर अचानक जोर का धक्का मारा और पूरा लंड वन्दना के चुत में समा गया। वन्दना के आंखों में तो आँसू गए। उसके मुँह से चीख भी नही निकल पाई इतना दर्द हुआ था। वही मुझे भी बहुत तेज दर्द हुआ। और जब लंड बाहर निकाला तो मेरे लंड पर खून लगे हुए थे। और वन्दना के चुत से भी खून बाहर बहने लगा।

कुँवारी चुत

फिर थोड़ी देर बाद मैं फिर से वन्दना के चुत में लंड डाला और चोदना शुरू कर दिया तो वन्दना बोली प्लीज बंटी धीरे-धीरे करो, बहुत तेज दर्द हो रहा है मुझे। थोड़ी ही देर में वन्दना को भी मजा आने लगा। और कमर उछालने लगी। और मेरा भी रफ्तार बढ़ गया।

 

वन्दना अब मस्ती में: आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह..उम्ममम्ममम्मममम्ममम्म.. आहहहहहहहहहहा चोदो बंटी आह बहुत मजा रहा है।…… जानू।  हाँ बेबी आह्ह्ह.. फाड् दो मेरी चुत बेबीफाड् दो मेरी चूतओह्ह्ह्हहहहहहहहह….  और ज़ोर से बेबी, चोद डालो मुझे नहीं पता था इतना मजा आता है। चोदो…. …

बन्टीहठहठठह आह्हहहहहहहहहहहहहहहहह चोदो.. और फिर वो झड़ने लगी। और मुझे कस के दबोच ली। उसकी तो जैसे आँखे बाहर गयी थी। झड़ते समय उसे बहुत मजा आया।  और फिर 4, 5 झटकों में मैं भी वन्दना के चुत में ही झड़ गया। मेरा लंड सारा वीर्य उसकी चुत में ही उड़ेल दिया।

फिर मैं वन्दना के ऊपर ही लुढ़क गया। और जोर जोर से हांफने लगा। वन्दना के सांसे भी बहुत तेज चल रही थी। जिससे उसकी चुचियाँ मेरे सीने में धस रहा था। करीब 10 मिनट बाद मेरा लंड फिर से अकड़ गया। और फिर हम दोनों एक बार और चुदाई किए। उसके बाद हम घर आ गए। लेकिन अब ये चुदाई का सिलसिला तो रोज का हो गया। हमें जब भी मौका मिलता हम चुदाई करने लगते। कभी उसके घर मे कभी मेरे घर मे तो कभी खेतों में।

 

इस तरह करीब 1 महीना गुजर चुका था। और एक दिन वन्दना की मम्मी किचन में खाना बना रही थी। दोपहर के 1 बजे थे। तो हमे मौका मिल गया। और हम वन्दना के रूम में ही चुदाई करने लगे। हम चुदाई में इतने मशगूल थे कि हमे एहसास ही नही रह की वन्दना की माँ घर मे है। और जब वन्दना मेरे ऊपर आकर चुदाई कर रही थी हमारी चुदाई बिल्कुक चरम सीमा पर थी। तभी वन्दना की मम्मी गई और जोर से चिल्लाई ये क्या कर रहे हो तुमलोग। वन्दना तो झट से उतरी और चादर खींच के खुद को ढक ली

 

लेकिन मेरा 6 इंच का लंबा लंड कुतुबमीनार की तरह खड़ा था और वन्दना के चुत का लसलसा पानी लगा हुआ था जिससे मेरा लंड चमक रहा था। वो वन्दना के माँ देख ली। फिर मैं भी झट से उठा और पैंट पहन के जल्दी से रूम से निकल कर भाग गया।

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अब आगे मेरे साथ और वन्दना के साथ क्या हुआ और फिर मैं वन्दना की माँ साक्षी ऑन्टी को कैसे चोदा कहानी के अगले भाग में बताऊंगा।

तब तक के लिए दीजिए इजाजत।

 

तो दोस्तों मेरी कहानी कैसी लगी।।  उम्मीद करता हूं, की आप सब को कहानी पसंद आई होगी और आप लोगो ने पूरी तरह आनंद लिया होगा।

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