18 साल के भतीजे से ठंडी करवाई प्यासी चूत

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अपनी जिस्म की हवस और चूत की ज्वाला अपने 18 साल के भतीजे से ठंडी करवाई।

हेलो https://nightqueenstories.com के पाठकों कैसे हो आपसब चूत की आग और लंड का ज्वाला आप सब को चैन से रहने दे रहा है या पागल हुए पड़े हो। आ जाओ मेरी चूत चाट लो। मेरे चूत की पानी मल्टीविटामिन से भरी हुई है पीकर लाल हो जाओगे लल्ला। रण्डी समझने का भूल मत करना मुझे, मैं शौकीन हूं चुदाई की इसलिए चुदवाती हूं।

तो सुनो मेरा नाम नूरी खान है। मैं मेरठ में रहती हूं। मेरे शौहर एक सरकारी अधिकारी हैं। और मेरे से 15 साल बड़े हैं। अब वह 50 के हो चुके हैं। तो दोस्तों यह कहानी मेरी चूत की चुदाई की है जो मेरे भतीजे मतलब मेरे देवर के लड़के ने की। हां एक बार और उसका बाप भी मुझे बहुत चोदा है जब मैं गांव में थी। और मेरी बड़ी वाली लड़की भी उसी का बीज है।

कैसे मैं अपनी बूढ़े पति के मुरझाए लंड से परेशान होकर अपने 18 साल के भतीजे के 8 इंच के तगड़े लंड से अपनी चूत की ज्वालामुखी शांत की

तो दोस्तों एक दिन मेरे पति इलियास ने मुझे अचानक बताया कि उनके भाई का लड़का यहीं मेरठ में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिये आ रहा है, उसका नाम सरवर है। और वो हमारे साथ हमारे ही घर में ही रहने वाला है। तो मैं परेशान हो गई मुझे यह सही नहीं लगा, उसके हमारे घर में रहने से मेरी पूरी आज़ादी छीन जाएगी। क्योंकि मैं अकेले में यहां अपने सहेलियों के साथ पार्टी, मस्ती किया करती थी। लेकिन कर भी क्या सकते थे घर की बात थी, इसलिए मजबूरन मुझे मानना पड़ा और मैं कोई विरोध नहीं कर पाई। मेरठ में झंडा अपना घर है हमलोग घर बना लिए हैं, और यह 3 मंजिल का मकान है और कुछ रूम रेंट पर भी हैं, लेकिन घर ऐसे बना है की ऊपर वालों का बिलकुल अलग है। तो मैं उसके लिए फर्स्ट फ्लोर पर एक कमरे को ठीक कर दिया।

वैसे तो सरवर सीधा साधा लड़का है और पढ़ाई में भी अच्छा है मैं कई बार उससे मिली हूँ, और वो मेरी काफी इज़्ज़त भी करता है लेकिन अभी मुझे उसका आना पसंद नहीं था। क्योंकि अब मैं अकेले रहना चाहती थी मुझे आजादी चाहिए था। मैं किसी की दखलंदाजी नही पसंद करती थी। इसीलिए मैं अपने दोनो बेटियो को देहरादून हॉस्टल में पढ़ने भेज दी थी। खैर अब तो कुछ कर नही सकते थे और कुछ ही दिनों में सरवर हमारे घर आ गया। वो सिर्फ 18 साल का था और दुबला पतला भी था। हां उसकी लंबाई काफी ग्रोथ की थी। लेकिन था बहुत संस्कारी। मैं उसे करीब 6 साल बाद देखी थी क्योंकि वो भी गांव में हॉस्टल में रह के पढ़ता था और मैं जब कभी गांव गई भी थी, तो बस 2,4 दिनों के लिए ही। इसीलिए उसे देखें लंबा समय हो गया था। इसलिए मैं तो एक बार पहचान ही नहीं पाई और उसे देखती ही रह गई। फिर मैंने उसे पानी वानी पिलाया। वो अभी भी बहुत संस्कारी और सीधा सदा था। फिर मैं उसे उसका ऊपर का कमरा दिखा दिया। और बोला नहा लो फिर खाना खा लो और तब आराम करना। फाइनली अब वह हमारे साथ हमारे घर में रहने लगा। वो कितना सीधा सदा था उतना ही शर्मीला लड़का था।

दोस्तों मैं आपको एक बात बताता हूं मुझे शुरू से ही कम उम्र के लड़के काफी पसंद हैं, और सच पूछो तो एक बार मैं अपने सहेली के 19 साल के लड़के से जब से चुदवाई तबसे कम उम्र के लड़कों के प्रति मेरा नजरिया ही पूरी तरह बदल गया। वैसे भी मेरे पति की उम्र 50 साल की हो गई है, और अब उनसे कुछ होता नहीं जबकि मैं अभी जवान हूं और हमेशा मेरी चूत में चिंगारी भड़कते रहती है, और सहेलियों के बातों से और ज्यादा चूत चुदास हो जाती है। इसलिए सरवर को देखकर मेरी यह दबी हुई इच्छा फिर से जागने लगी।

तो एक क्या हुआ की मैं छत पर कपड़े लेने जा रही थी क्योंकि सुबह धूल के डाला था। और चुकी सेकंड फ्लोर पर सरवर के अलावा कोई और नहीं रहता था तो मैंने देखा सरवर बाथरूम में नंगा नहा रहा है और बाथरूम का दरवाजा खुला था। शायद उसे अंदाजा था की अभी इधर कोई नही आयेगा। ओह माय गॉड वो बिल्कुल नंगा शावर से नहा रहा था और खुले दरवाजे से उसके काले काले घने झांटों के बीच उसका गोरा सा 8 इंच का लंड खड़ा था। वह बिलकुल गर्म था। शायद नहाने की वजह से उसका लंड बिलकुल टाइट हो रखता। सरवर भले दुबला पतला था लेकिन उसका लंड बहुत विशाल था। और फिर मैं वहीं खड़े होकर देखने लगी मेरी नजर उसके लंड पर से हट ही नहीं रहा था। जवान लंड देखते ही मेरे तन बदन में आग लग गई, मैं तो बस खड़ी खड़ी देखती ही रह गई और दरवाजे के पीछे वो मजे से नहा रहा था।

थोड़ी देर बाद जब उसका लंड दरवाजे से छिप गया तब मैं किसी तरह खुद को मनाती हुई नीचे आ गई, मैं कपड़े लेने छत पे भी नही गई। मेरे अंदर की सोई हुई चुदासी कीड़े जाग चुके थे, चूत में हजारों कीड़े कुलबुलाने लगे थे। सरवर मेरा इज्जत तो करता ही था लेकिन उसका लंड देखने के बाद अब मुझे वो और भी प्यारा लगने लगा था। अब मैं उसका और भी ध्यान रखने लगी और धीरे धीरे उसके करीब आने की कोशिश करने लगी।

और अब मैं उसका लंड का स्वाद चखने के लिए तड़पने लगी, अब मुझे अपने बूढ़े पति में कोई इंटरेस्ट नहीं था, मुझे तो बस मेरा जवान भतीजा का ही लंड चाहिये था। लेकिन डर भी लग रहा था की कैसे होगा अगर कुछ गड़बड़ हुई तो पूरी उम्र सुनना पड़ेगा। अपने पति, घरवालों और अपनी बेटियों को मैं क्या मुँह दिखाऊंगी। सरवर के बाथरूम की कुण्डी थोड़ी मुश्किल से लगती थी, शायद इसलिए नहाते समय वो बाथरूम का दरवाजा हमेशा खुला रखता था। अब मैं हररोज अपने भतीजे के लंड का दीदार करने लगी। और जब वो कपड़ा बदलता उसी समय बहाने से उसके कमरे में चली जाती और वो मुझे देख के शर्मा जाता था, कई बार मैने उसे नंगा देखा था। धीरे धीरे ऐसे ताका झांकी में महीने बीत गए, अब मैं और सरवर काफी नजदीक आ गए थे। अब वह शर्माता कम था और सिर्फ अंडरवियर में मेरे सामने आ जाता था, मैं भी उसे ऐसे दिखती जैसे कोई बात नहीं, लेकिन चोरी चोरी उसके लंड पर नजर गड़ाए रखती और उसे ये अहसास भी दिलाती की मैं उसके लंड को देख रही हूं, इधर कुछ दिन से मैं नोटिस कर रही थी की वो भी अब मेरी चुचियों गांड और चूत का दीदार करने की कोशिश करता। मैं भी कई दिनों से मेहनत कर रही थी की वो मेरी चूत गांड के लिए तरसे और मेरा टोटका काम कर रहा था। मैं जब तब उसके सामने कपड़े बदलने लगती, और मैं भी नंगे होकर कपड़े बदलती और वो मुझे चोरी चोरी देखता। कई बार मैं जब देखती की वो मुझे देख रहा है तो मैं कपड़े पहनने में देरी करती और अपने चुचियों, को सहलाती और अब तो मैं चूत में उंगली करने लगती। कुल मिलाकर अब मैं उसे पाने के लिए रंडीपना पर उतर आई थी। लेकिन मेरी चूत अब भी सरवर के लंड के लिये तड़प रही थी। मुझे अब ये समझ में आ गया था कि लंड लेना है तो अब बात मुझे खुद आगे बढ़ानी पड़ेगी क्योंकि वो आगे नहीं आयेगा।

मैं दिन के समय सलवार सूट या टॉप और लोअर पहनती हूँ, और रात में नाइटी। मेरी नाइटी स्लीवलेस और बड़े गले की है, और सिर्फ जांघों तक ही है जांघों का मतलब सिर्फ मेरी गांड ही ढकती है और मेरी पूरी गोरी और मोटी जांघ दिखती है। इसमें मैं बहुत सेक्सी दिखती हूँ। ये नाइटी अब तक मैं अपने पति का सामने ही केवल पहना करती थी, पर अब यह नाइटी मैंने सरवर के सामने भी पहनना शुरु कर दी ताकि उसे अपने बड़े बड़े चुचियों और मोटी मोटी जांघो का अच्छे से दीदार करा पाऊं। अब मैं उठते बैठते अजय को अपने बूब्स की दीदार करने लगी और उसकी नजर भी मेरी चूचियों की घाटी में आकर मानो फंस ही जाती थी, और जब तब मेरी गांड पर टिक जाती और जब कभी बैठती तो मेरा चूत का दीदार करने लगता। क्योंकि मैं अब पैंटी भी नहीं पहनती थी ताकि वो मेरे चूत का दर्शन कर सके। और ऐसे में जब भी हमारी नज़र मिलती तो वो झेम्प जाता और मैं मुस्कुरा देती।

अब मैं सरवर को रिझाने के लिए रोज अपनी चूत चुचियों और गांड का दर्शन करवाने लगी

ऐसे ही कुछ दिन और बीत गए पर बात अब भी बनती नज़र नहीं आ रही थी क्योंकि वो बड़ा सभ्य लड़का था, और मैं खुल के पहल कर नही पा रही थी। अब मैं छत पे कपड़े सुखाने को सरवर को भेज दिया करती थी जिसमे मेरी ब्रा और पैंटी भी होती थी। वो भी बड़े प्यार से मेरे ब्रा पैंटी को सुखाता था। एक दिन मुझे अपनी एक सहेली के यहाँ जाना था, तो मैंने सरवर को कहा मुझे लेट हो रही है और मेरा कपड़ा प्रेस नहीं है, प्लीज मेरा कपड़ा प्रेस कर दो, नहीं तो मैं लेट हो जाऊंगी। तो वह मेरे कमरे में ही मेरा कपड़ा प्रेस करने लगा और मैं अपने रूम के अटैच्ड बाथरूम में नहाने चली गई।

मैं जल्दी नहा कर अपने गुलाबी तौलिया को अपने बूब्स के ऊपर बाँध कर बाहर आई और उसे जल्द प्रेस करने को बोलती हुई अपने बाल संवारने लगी। मैं चारों तरफ घूम घूम कर बाल संवार रही थी ताकि अजय को अपना बदन अच्छे से दिखा पाऊं, सरवर भी चोरी चोरी मुझे निहार रहा था। अब मैं जानबूझ के झुक भी रही थी जिससे पीछे से मेरी नंगी चूत भी दिख रही थी।

यह सब देख कर सरवर का बुरा हाल हो रहा था। और उसका लंड खड़ा होने लगा। अब वो जल्दी से प्रेस करके बाहर जाने लगा तो मैंने उसे फिर रोक लिया और इधर उधर की बातें करने लगी। और मैं साफ देख रही थी उसका लंड सलामी मार रहा है। फिर मैं उसकी और पीठ की और तौलिया खोल के जमीन पर गिरा दी और नंगे हो गई और ब्रा पहनने लगी। और आईने में सरवर की की बैचनी साफ़ देख रही थी, वह मेरी गांड पर बराबर नजर बनाए हुए था। और फिर मैंने सरवर को अपनी ब्रा का हुक लगाने को कहा वो डरते डरते मेरे पास आया और हुक लगाने लगा, उसके हाथ बहुत तेज काम्प रहे थे। मैंने उसे कहा- अब तुम्ही रोज मेरी ब्रा का हुक लगा दिया करना, मुझे हाथ पीछे ले जाने में प्रॉब्लम होती है। वो चुपचाप वहीं खड़ा रहा, जैसे वो बुत बन गया हो, जैसे उसे कुछ समझ ही ना आ रहा हो

फिर मैंने वहीं उसके सामने ही पैंटी पहनी सरवर ऐसे व्यवहार कर रहा था जैसी मानो मैंने उसे सम्मोहित कर लिया हो, वो चुपचाप मेरे अधनंगे बदन को देख रहा था और मुझसे आँखें बचा के अपने लंड को सहला रहा था। उस दिन के बाद सरवर रोज मेरी ब्रा का हुक खोला और लगाया करता था, और अब वो रोज मूठ भी मारने लगा था। मैं भी ब्रा पहनते और खोलते समय उसे अपने बड़ी बड़ी चूचियों के दर्शन करवा देती थी। अब सरवर ज्यादा समय मेरे साथ बिताने लगा था और मेरी ध्यान भी रखने लगा जैसे मानो मैं उसकी गर्लफ्रेंड हूँ। खाना भी हम साथ बनाते थे और किचन में काम करते समय कई बार वो मेरे अंगों को छू देता था जिसके बदले मैं भी मौका देख के उसके लंड पर हाथ फेर देती थी और अपनी चूचियाँ या चूतड़ उसके बदन से रगड़ देती थी। सरवर बहुत समझदार था, वो मेरे पति के सामने कभी मुझे देखता भी नहीं था और मुझसे दूरियां बना के रखता था, यह चीज मुझे बहुत अच्छा लगता था। सरवर के साथ मुझे मजा तो आ रहा था पर अब भी मेरी चूत की आग धधक ही रही थी, मेरी चूत को उसे अब तक सरवर के लंड का स्वाद नहीं मिला था।

एक दिन मैं नहा रही थी तो मुझे शैतानी सुझा और मैं तौलिया जानबूझ के नही ले गई और ऐसे ही नहाने चली गई। फिर नहाने के बाद सरवर को तौलिया लाने को बोली। फिर वह मुझे आवाज लगाया और तौलिया लेकर आया तो मैंने कहा, दरवाजा खुला है, अंदर आकर रख दो। सरवर अंदर आया और मुझे शावर के नीचे नंगी नहाते हुए देखने लगा। वो बिना पलक झपकाए अपनी मुझे देख रहा था। तो मैंने मुस्कुराते हुए पूछा तुम्हें भी नहाना है क्या? तो वो बोला नहीं।

मैं भी उसके हाथ से तौलिया लेती हुई अपने नंगे बदन को पौंछने लगी लेकिन मैं चाहती थी मन तो मेरा कर रहा था उसे अभिनपक्द के उसका लंड अपनी चूत में घुसा लू लेकिन, क्या करें नही कर पा रही थी।

उस दिन मुझे सरवर पे बहुत गुस्सा आ रहा था, साला इतनी सुन्दर औरत जिसको देखने ले लिए सारा मुहल्ला परेशान रहता है, वो उसके सामने नंगी खड़ी है और इस चूतिये को कुछ नही करना है। तो मैं उससे नाराज हो गई और बात नही कर रही थी तो सरवर समझ गया कि मैं नाराज हूँ, इसलिए वो मुझे मेरी नाराजगी का कारण पूछने लगा और ज़िद करके मुझे गले लगा लिया। फिर मैं उससे पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या? तो उसने साफ़ मना कर दिया। फिर मैंने उससे पूछा, पहले कभी किसी लड़की को नंगा देखा है क्या? उसने धीरे से शरमाते हुए कहा चाची जी, मैं कभी किसी को नंगा नही देखा हूं लेकिन आपको बहुत बार देखा हूं, लेकिन आज आपको इस तरह नंगा देखकर मुझे बहुत मजा आया। फिर उसने धीरे से बोला आप अपने नीचे के बालों को क्यों नहीं साफ़ करती, इतना घना है। उसके मुँह से इस तरह की बात सुन के मेरे अंदर सनसनी बढ़ गई। फिर मैं झट से बोली, किसके लिये साफ़ करूं? तो उसने बोला क्यों चाचा जी साफ करने नहीं बोलते? मैंने कहा- उन्हें जैसे भी मिल जाये वैसे ले लेते हैं, फिर मैं बोली वैसे तुम भी तो साफ़ नहीं करते। यह सुनते ही वो सकपका गया और पूछा आपको कैसे मालूम? तो मैं बोली, दरवाज़ा खोल के नहाओगे तो सब मालूम चल ही जायेगा।

मैं सरवर के 8 इंच को अपने चूत के मुंह पर लगाई और धीरे धीरे उसका पूरा लंड अपनी चूत में डाल ली

फिर अगले दिन मैंने अपनी झांटों को साफ की और बाथरूम में अपनी पीठ पर साबुन लगाने के बहाने सरवर को अंदर बुलाया। उस वक्त मैं पूरी नंगी थी। फिर मैने उसे बोला तुम्हारे कपड़े गीले हो जायेंगे इन्हे उतार दो। तो वह शर्माते हुए कपड़े उतार दिया लेकिन निकर नही उतारा तो मैने उसे भी उतरने बोला और फिर वो उतार दिया। अभी तक मैं अपनी चिकनी चूत की उसे दर्शन नही करवाए थे क्योंकि मैं बैठी हुई थी और उसके तरफ मेरा पीठ था। सरवर भी शायद कल रात में अपना झांट साफ कर लिया था क्योंकि वो जब नंगा हुआ तो उसके झांट साफ थे। और फिर मैं खड़ी हुई और उसकी तरफ घूम गई वह मेरे चिकनी चूत देखकर पागल हो गया। फिर मैं उसके लंड को सहलाने लगी तो उसका लंड बहुत जायदा टाइट हो गया। और तब वह भी मेरे जिस्म को सहलाने लगा तो मैं अपनी चूचियां उसके मुंह में दे दी और उसका हाथ पकड़ के चूत पर रख दी और अपने पैरो को फैला दी। थोड़ी देर हम ऐसे ही एक दूसरे को सहलाते रहे फिर मैं उसके लंड को पकड़कर उसे रूम में ले आई और वहाँ बेड पे लिटा के उसके उसके ऊपर चढ़ के चूमने लगी और सरवर का लंड अपनी चूत में रगड़ने लगी। उसकी सांसें तेज चल रही थी मैंने धीरे से पूछा, पहली बार है क्या? तो उसने शरमाते हुए हाँ कहा। तो मैं समझ गई थी कि अब सब मुझे ही करना है, यह तो अनाडी है।

तो मैं धीरे से अपनी चूत पर उसके खड़े लंड को सेट करके धीरे धीरे बैठने लगी और धीरे धीरे अजय का लंड मेरी चूत में समाता चला गया। उसे दर्द हो रहा था, लेकिन वह बर्दाश्त कर रहा था, और अपनी लंड मेरी चूत में जाते हुए अपनी गर्दन उठा के यह सब देख रहा था। फिर वह बोला चाची दर्द हो रहा है तो मैं रुक गई और वैसे ही लंड घुसाए पड़ी रही। 2 मिनट बाद उसका दर्द कम हुआ तो मैं चोदने लगी और मेरे मुंह से आहहहहहहहहहहहहहहहहह….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई.. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई निकलने लगा और 5, 7 मिनट बाद ही मेरी चूत पानी छोड़ दिया।

अब मैं उसे ऊपर आकर चोदने बोली और वो अपना 8 इंच का तोप का nal मेरे चूत में डालकर घचाघच चोदने लगा और मैं जोर जोर से चिल्लाते हुए उससे चुदवाने लगी

लेकिन सरवर का लंड अभी भी युद्ध के लिए तैयार था तो मैं उसको ऊपर आ के चोदने बोली और मैं लेट गई। और उसे सामने से लंड डालने बोली वह मेरे चूत में लंड डालकर मेरे पर लेट गया और चोदने लगा मैं भी चिल्ला चिल्ला कर उससे चोदवाने लगी आहहहहहहहहह.. चोदो मेरी जान चोदो…. आआआहहहहहहह चोदो मेरी चुत। चोदो हहहहहहहहहहहह…….. जोर से आहहहहहहहहहहहहहहह……

सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. आहहहहहहहहहहहहहहहहह….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह….फक मि डार्लिंग फक मि। आहहहहहहहहहहहहहहहहह उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह…. सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. ओहहहहहहह हहहहहहह…… आह हहहहहहहहहहहहह….. इरर्राहहहहहहहहह.. चोदो मेरी जान चोदो…. आआआहहहहहहह चोदो मेरी चुत उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह… .सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. आह हहहहहहहहह… ऊँहऊँहऊँहउहहहहहहहहहहह बेबी….. सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. आहहहहहहहहहहहहहहहहह….. फक मय पुसी किंग ओह माइ किंग ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह….सससीईईईईईईसससीईईईईईई….. ओहहहहहहहहहहहहहहहहह…. उममहःहहहहहहहहहहहहहहहह… आहहहहहहहहहहहहहहहहह…ओहहहहहहह हहहहह

आहहहहहहहहहहहहहहहहहः ओहहहहहहहहहहहहहहहहह सससीईईईईईई .. और जोर से चोद चोद मुझे ..आहहहहहहहहहहहहहहहहहः ओहहहहहहहहहहहहहहहहह सससीईईईईईई अपने चाची को रंडी बना ले अपनी .. और जोर से चोद.. आह फाड़ डाल मेरी चुत। आहहहहहहहहह

मैं 3 बार झड़ चुकी थी तभी उसकी स्पीड बढ़ गई तो मैं समझ गई की उसका लंड पानी छोड़ने वाला है तो मैं उसके कमर को पकड़ी और नीचे से कमर उछालने लगी तभी उसके लंड ने गर्म लावा मेरी चूत में उगलने लगा। मैं तृप्त हो चुकी थी और सरवर हांफते हुए मेरे ऊपर लेट गया। हम दोनों कुछ देर तक वैसे ही लेटे रहे। और थोड़ी देर बाद उसका लंड मेरी चूत में ही फिर से खड़ा हो गया तो एक बार और हम चुदाई किए। और वैसे ही सो गए। 1 घंटे बाद जब मेरी आंख खुली तो मैं देखी सरवर अभी भी मेरे ऊपर था उसका लण्ड मेरे चूत में ही था, तो मुझे बहुत मजा आया और मैं नीचे से कमर हिलाने लगी तो उसका लंड मेरी चूत में ही फिर खड़ा होने लगा। और हम एक बार फिर से चुदाई किए। अब रोज हमदोनो पूरी रात एक दूसरे के बांहों में सोते हैं जब मेरे हसबैंड घर में नही होते हैं।

तो दोस्तों यह चाची भतीजे की लंड चूत का खेल कैसा लगा। मुझे आपके कमेंट का इंतजार रहेगा।

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मेरी अगली कहानी का शीर्षक है “जवान चुदास औरत और मेरा लंड

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धन्यवाद।

 

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